फ्रांस के टूलॉन बंदरगाह पर भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास वरुण का 24वां संस्करण पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ. इस प्रतिष्ठित वॉर ड्रिल में भाग लेने के लिए भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल फ्रांस पहुंचा, जहां फ्रांसीसी नौसेना ने वॉटर कैनन सलामी देकर उसका गर्मजोशी से स्वागत किया. बंदरगाह पर औपचारिक स्वागत के तुरंत बाद दोनों देशों के नौसैनिक बलों ने खुले समंदर में जटिल और उच्च स्तरीय सैन्य अभियानों का अभ्यास शुरू किया. इस संयुक्त अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल को परखना और आधुनिक समुद्री चुनौतियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करना था.
खुले समंदर में पनडुब्बी रोधी युद्ध और लाइव फायरिंग ड्रिल
बंदरगाह से निकलने के बाद दोनों देशों के जंगी जहाजों ने समुद्र में व्यापक कॉम्बैट ऑपरेशन संचालित किए. इस अभ्यास के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध और सटीक लाइव फायरिंग जैसे चुनौतीपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया. दोनों सेनाओं के जवानों ने समुद्र की सतह पर तय किए गए लक्ष्यों पर अचूक निशाना साधने का गहरा अभ्यास किया. इस समुद्री ड्रिल को हवाई सुरक्षा और निगरानी प्रदान करने के लिए आसमान में एनएच90 हेलीकॉप्टर तथा अटलांटिक-2 समुद्री गश्ती विमान लगातार सक्रिय रहे. इन आधुनिक विमानों की मौजूदगी ने नौसैनिकों को बहुआयामी युद्ध परिस्थितियों में काम करने का व्यापक अनुभव प्रदान किया.
फ्रांसीसी युद्धपोतों और अत्याधुनिक पनडुब्बी के साथ साझा तालमेल
इस युद्धाभ्यास में फ्रांसीसी नौसेना ने अपने प्रमुख रणनीतिक हथियारों को मैदान में उतारा. अभ्यास के दौरान फ्रांसीसी नौसेना के एफडीए फोर्बिन और ला फायेत्ते जैसे शक्तिशाली जंगी जहाजों ने मोर्चा संभाला. इसके साथ ही फ्रांसीसी नौसेना की परमाणु हमलावर पनडुब्बी एसएनए सफ्रेन भी अभ्यास का हिस्सा बनी. अभ्यास के दौरान दोनों देशों के हेलीकॉप्टरों ने एक-दूसरे के जहाजों के डेक पर क्रॉस-डेक लैंडिंग की, जिससे दोनों सेनाओं के बीच वास्तविक समय में संचार और समन्वय की क्षमता परखी गई. इसी क्रम में भारतीय नौसेना के दल ने फ्रांस के विशालकाय विमानवाहक पोत चार्ल्स द गॉल का विस्तृत दौरा किया. भारतीय नौसैनिकों ने वहां के उन्नत एविएशन सिस्टम और परिचालन प्रक्रियाओं को बहुत करीब से देखा और समझा.
मार्सेय युद्ध स्मारक पर 205 भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि
सैन्य गतिविधियों और कड़े प्रशिक्षण के बीच इस दौरे में एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक क्षण भी देखने को मिला. आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर और उनके साथी नौसैनिकों ने फ्रांस के ऐतिहासिक शहर मार्सेय की यात्रा की. वहां उन्होंने मजार्ग वॉर मेमोरियल पर पहुंचकर वीर शहीदों को पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी. यह मेमोरियल भारत और फ्रांस के सदियों पुराने रक्षा संबंधों का एक अमिट प्रतीक है. यह स्मारक प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले 205 बहादुर भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है. भारतीय नौसैनिकों ने इस अवसर पर अपने वीर पूर्वजों के अदम्य साहस को नमन किया.
शीर्ष नौसैन्य वार्ता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल मुकाबला
समुद्री अभ्यास के समानांतर दोनों देशों के सैन्य नेतृत्व के बीच कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर की उच्चस्तरीय बातचीत भी हुई. आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर ने फ्रांसीसी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया. उन्होंने फ्रांसीसी नौसेना में ऑपरेशंस के डिप्टी कमांडर-इन-चीफ रियर एडमिरल मैकारा ऊक से शिष्टाचार मुलाकात की. इस बैठक में भावी समुद्री चुनौतियों और संयुक्त सैन्य ऑपरेशंस पर विस्तृत चर्चा हुई. टूलॉन में आईएनएस त्रिशूल के डेक पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें टूलॉन के डिप्टी मेयर लॉरेंट इसनार्ड विशेष रूप से उपस्थित रहे. दोनों देशों के नौसैनिकों के आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए एक दोस्ताना वॉलीबॉल मैच भी खेला गया, जिसने दोनों सेनाओं के बीच सौहार्द को और मजबूत किया.



















