गुजरात के साबरकांठा जिले में स्थित ईडर तालुका का गणेशपुरा गांव इस समय गंभीर सामाजिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। गांव में रहने वाले रावत समाज के 75 से अधिक हिंदू परिवारों ने लगातार मिल रही धमकियों और कथित उत्पीड़न के चलते सामूहिक पलायन करने की चेतावनी दे दी है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि दूसरे समुदाय के कुछ असामाजिक तत्व उन्हें निशाना बना रहे हैं, जिससे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बन चुका है। धार्मिक प्रतीकों पर हमले और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
गांव में दहशत और पलायन के फैसले की मुख्य वजह
गणेशपुरा गांव का इतिहास दोनों समुदायों के साथ मिलकर रहने का रहा है, लेकिन हाल के दिनों में यहां की परिस्थितियां तेजी से बिगड़ी हैं। रावत समाज के लोगों का कहना है कि असामाजिक तत्वों की ओर से उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। घरों से बाहर निकलने पर धमकियां दी जाती हैं, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। लगातार बढ़ते खौफ के कारण ग्रामीणों ने महसूस किया कि अपनी और अपने परिजनों की सलामती के लिए गांव छोड़ना ही एकमात्र विकल्प बचा है, जिसके बाद 75 से ज्यादा परिवारों ने पलायन की बात कही है।
महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप
स्थानीय निवासियों के अनुसार, गांव की महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महिलाओं के साथ सरेआम अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है और उन्हें खुलेआम बाहर न निकलने की धमकियां दी जा रही हैं। इस वजह से गांव की युवतियों और महिलाओं में अत्यधिक डर बैठ गया है। इसके साथ ही धार्मिक मामलों में दखलंदाजी ने इस तनाव को और गहरा कर दिया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि करीब एक वर्ष पहले लगाए गए एक पवित्र बरगद के पेड़ पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर उसे जानबूझकर सुखा दिया गया। इसके अलावा नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान गरबा और डीजे बजाने पर पाबंदी लगाने तथा आवाज धीमी कराने के लिए अनुचित दबाव बनाया गया था। धार्मिक आस्था से जुड़े इन प्रतीकों और आयोजनों पर बार-बार हुए हमलों ने गांव के लोगों की नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया।
हिंदू संगठनों का समर्थन और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गुहार
गणेशपुरा में परिवारों के पलायन की चेतावनी की जानकारी मिलते ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गांव में एकत्रित होकर ग्रामीणों के साथ एक बैठक की और पीड़ित परिवारों को पूरी कानूनी और सामाजिक मदद देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे।
एसपी कार्यालय में ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए एक विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उपद्रवियों पर सख्त कदम नहीं उठाए जाते और उन्हें ठोस सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक वे सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।
गणेशपुरा में भारी पुलिस बल की तैनाती और वर्तमान स्थिति
मामले की संवेदनशीलता और तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। गांव में कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को टालने के लिए गणेशपुरा में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस दल लगातार गांव की गलियों में गश्त कर रहे हैं और संवेदनशील इलाकों पर कड़ा पहरा रखा गया है।
फिलहाल गांव में शांति स्थापित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार न्याय और सुरक्षा की अपनी मांग पर पूरी तरह अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार तत्वों की पहचान कर उन्हें दंडित नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध और पलायन की चेतावनी बरकरार रहेगी।























