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गुजरात के गणेशपुरा में धमकियों और आस्था पर चोट के बाद 75 से ज्यादा हिंदू परिवारों ने दी पलायन की चेतावनीभारत
10 अक्तू॰ 2026, 7:06 pm (1 घंटे पहले)· 0

गुजरात के गणेशपुरा में धमकियों और आस्था पर चोट के बाद 75 से ज्यादा हिंदू परिवारों ने दी पलायन की चेतावनी

साबरकांठा जिले के गणेशपुरा गांव में असामाजिक तत्वों के कथित उत्पीड़न, महिलाओं की सुरक्षा पर खतरे और बरगद के पेड़ को जलाने की घटना के बाद तनाव फैल गया है, जहां 75 से अधिक परिवारों ने गांव छोड़ने का ऐलान किया है।

गुजरात के साबरकांठा जिले में स्थित ईडर तालुका का गणेशपुरा गांव इस समय गंभीर सामाजिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। गांव में रहने वाले रावत समाज के 75 से अधिक हिंदू परिवारों ने लगातार मिल रही धमकियों और कथित उत्पीड़न के चलते सामूहिक पलायन करने की चेतावनी दे दी है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि दूसरे समुदाय के कुछ असामाजिक तत्व उन्हें निशाना बना रहे हैं, जिससे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बन चुका है। धार्मिक प्रतीकों पर हमले और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

गांव में दहशत और पलायन के फैसले की मुख्य वजह

गणेशपुरा गांव का इतिहास दोनों समुदायों के साथ मिलकर रहने का रहा है, लेकिन हाल के दिनों में यहां की परिस्थितियां तेजी से बिगड़ी हैं। रावत समाज के लोगों का कहना है कि असामाजिक तत्वों की ओर से उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। घरों से बाहर निकलने पर धमकियां दी जाती हैं, जिससे दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। लगातार बढ़ते खौफ के कारण ग्रामीणों ने महसूस किया कि अपनी और अपने परिजनों की सलामती के लिए गांव छोड़ना ही एकमात्र विकल्प बचा है, जिसके बाद 75 से ज्यादा परिवारों ने पलायन की बात कही है।

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महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप

स्थानीय निवासियों के अनुसार, गांव की महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी हो गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महिलाओं के साथ सरेआम अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है और उन्हें खुलेआम बाहर न निकलने की धमकियां दी जा रही हैं। इस वजह से गांव की युवतियों और महिलाओं में अत्यधिक डर बैठ गया है। इसके साथ ही धार्मिक मामलों में दखलंदाजी ने इस तनाव को और गहरा कर दिया है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि करीब एक वर्ष पहले लगाए गए एक पवित्र बरगद के पेड़ पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर उसे जानबूझकर सुखा दिया गया। इसके अलावा नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान गरबा और डीजे बजाने पर पाबंदी लगाने तथा आवाज धीमी कराने के लिए अनुचित दबाव बनाया गया था। धार्मिक आस्था से जुड़े इन प्रतीकों और आयोजनों पर बार-बार हुए हमलों ने गांव के लोगों की नाराजगी को चरम पर पहुंचा दिया।

हिंदू संगठनों का समर्थन और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गुहार

गणेशपुरा में परिवारों के पलायन की चेतावनी की जानकारी मिलते ही विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने गांव में एकत्रित होकर ग्रामीणों के साथ एक बैठक की और पीड़ित परिवारों को पूरी कानूनी और सामाजिक मदद देने का भरोसा दिलाया। इसके बाद हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे।

एसपी कार्यालय में ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हुए एक विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक उपद्रवियों पर सख्त कदम नहीं उठाए जाते और उन्हें ठोस सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक वे सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।

गणेशपुरा में भारी पुलिस बल की तैनाती और वर्तमान स्थिति

मामले की संवेदनशीलता और तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। गांव में कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को टालने के लिए गणेशपुरा में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस दल लगातार गांव की गलियों में गश्त कर रहे हैं और संवेदनशील इलाकों पर कड़ा पहरा रखा गया है।

फिलहाल गांव में शांति स्थापित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार न्याय और सुरक्षा की अपनी मांग पर पूरी तरह अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार तत्वों की पहचान कर उन्हें दंडित नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध और पलायन की चेतावनी बरकरार रहेगी।

सवाल-जवाब

गुजरात के किस गांव में 75 से ज्यादा हिंदू परिवारों ने पलायन की चेतावनी दी है?
गुजरात के साबरकांठा जिले के ईडर तालुका स्थित गणेशपुरा गांव में 75 से अधिक हिंदू परिवारों ने पलायन की चेतावनी दी है।
गणेशपुरा में ग्रामीण किस बात को लेकर आक्रोशित हैं?
ग्रामीण असामाजिक तत्वों द्वारा दी जा रही धमकियों, महिलाओं के साथ अभद्रता और पवित्र बरगद के पेड़ को जलाने जैसी घटनाओं को लेकर आक्रोशित हैं।
धार्मिक आस्था से जुड़े किन विवादों का उल्लेख किया गया है?
पवित्र बरगद के पेड़ पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़ककर उसे सुखाने और नवरात्रि में गरबा व डीजे की आवाज दबाने के दबाव का आरोप लगाया गया है।
ग्रामीणों ने मामले को लेकर क्या प्रशासनिक कदम उठाया?
ग्रामीणों ने हिंदू संगठनों के साथ मिलकर जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर लिखित ज्ञापन सौंपा और सुरक्षा की मांग की।
गांव में स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने क्या किया है?
प्रशासन ने गांव में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया है और अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·3 मिनट पहले

अपने ही घर में डरकर रहना पड़े और पलायन की नौबत आ जाए, तो प्रशासन क्या कर रहा है? महिलाओं की सुरक्षा और आस्था पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 मिनट पहले

गांव में ऐसा डर और धमकियां मिलना बहुत गलत है। पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोग पलायन न करें।

Ravikash Gupta@ravikash·23 मिनट पहले

अर्जुन जी, बरगद के पेड़ को सुखाने वाली बात पढ़कर सचमुच हैरानी हुई। आस्था पर ऐसा हमला बहुत अजीब है।

Rohan Verma@rohan-verma·46 मिनट पहले

अरे भगवान! इतने सारे परिवारों को अपना घर-गांव छोड़ने की नौबत आ गई, तो प्रशासन और पुलिस आखिर क्या कर रही है? क्या स्थानीय अधिकारियों को इस बढ़ते तनाव की भनक तक नहीं लगी थी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

रोहन भाई, वही तो! एक साल पुराना बरगद का पेड़ जला दिया गया और पुलिस तब भी सोती रही?

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