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गुजरात सीरियल धमाके मामले में शीर्ष अदालत ने मृत्युदंड के अमल पर दिया स्थगन आदेश, दोषी की अपील पर मांगा जवाबगुजरात
1 अक्तू॰ 2026, 11:38 am (28 दिन पहले)· 0

गुजरात सीरियल धमाके मामले में शीर्ष अदालत ने मृत्युदंड के अमल पर दिया स्थगन आदेश, दोषी की अपील पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में मृत्युदंड पाए मुजरिम अहमद बावा की याचिका स्वीकार करते हुए उसकी फांसी पर फिलहाल रोक लगा दी है।

वर्ष 2008 के चर्चित अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में देश की शीर्ष अदालत ने एक अहम कानूनी मोड़ लाते हुए मृत्युदंड प्राप्त मुजरिम अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी की तामील पर अंतरिम रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुजरिम की विशेष याचिका पर औपचारिक नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को पहले गुजरात उच्च न्यायालय ने कानूनी मुहर लगाते हुए बरकरार रखा था, जिसके विरुद्ध अब मुजरिम ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

साजिश के आरोपों पर दी गई कानूनी चुनौती

अदालत में हुई बहस के दौरान दोषी के कानूनी पैरोकारों ने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि उनके मुवक्किल को केवल साजिश रचने के आरोपों के आधार पर ही इस गंभीर मामले में मुजरिम करार दे दिया गया है। बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क था कि मामले में दोषसिद्धि के पर्याप्त कानूनी आधारों का अभाव है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने इन शुरुआती दलीलों को रिकॉर्ड पर लेने के उपरांत कानूनी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा करने का निर्णय लिया और तब तक के लिए सजा-ए-मौत के अमल को स्थगित करने का निर्देश दिया।

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तीन न्यायाधीशों की पीठ ने लिया अनुवाद से जुड़े दस्तावेजों का जायजा

इस संवेदनशील याचिका की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने संपन्न की, जिसमें जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान भाषा और कानूनी दस्तावेजों की उपलब्धता का प्रश्न भी गंभीरता से उठा। बचाव पक्ष ने अदालत को अवगत कराया कि ट्रायल कोर्ट की मूल कार्यवाही और कई आवश्यक दस्तावेज क्षेत्रीय भाषा में संकलित हैं, जिसके चलते पूरी कानूनी फाइल को समझने में समय लग रहा है।

इसी तकनीकी कठिनाई को देखते हुए गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले और निचली अदालत के संबंधित साक्ष्यों के विधिवत अनुवाद उपलब्ध कराने की मांग के साथ एक औपचारिक अर्जी भी दायर की गई है। शीर्ष अदालत अब इन सभी अनुवादित कानूनी दस्तावेजों और याचिका में रेखांकित तर्कों के आधार पर आगामी तारीखों में विस्तृत सुनवाई आगे बढ़ाएगी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में फांसी की सजा पर रोक लगाई है?
अदालत ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में दोषी अहमद बावा की फांसी की तामील पर रोक लगाई है।
याचिकाकर्ता अहमद बावा ने अदालत में क्या दलील दी?
बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि मुजरिम को पूरी तरह साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया है, जिसकी विस्तृत कानूनी समीक्षा जरूरी है।
इस मामले की सुनवाई कौन सी पीठ कर रही है?
याचिका पर सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की तीन सदस्यीय विशेष पीठ कर रही है।
सुनवाई के दौरान दस्तावेजों के संबंध में क्या समस्या सामने आई?
अदालत को बताया गया कि निचली अदालत के कई दस्तावेज स्थानीय भाषा में हैं, जिसके चलते गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले और अन्य कागजातों के अनुवाद की मांग की गई है।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·26 दिन पहले

अदालत ने फांसी पर रोक तो लगा दी है, पर मुझे समझ नहीं आता कि इतने साल बाद कागजातों के अनुवाद की बात क्यों उठ रही है। क्या वकील पहले इन सब की तैयारी नहीं करते?

Ravikash Gupta@ravikash·26 दिन पहले

अहमद बावा की फांसी पर रोक लग गई है, अब अनुवाद के बाद ही अगली सुनवाई होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

रविकेश, दस्तावेज का अनुवाद होने में ही अब काफी वक्त लग जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में फांसी पर रोक तो लग गई, लेकिन क्या अब इसके चलते बाकी दोषियों की याचिकाओं पर भी असर पड़ेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

रोहन, बेंच में जस्टिस विक्रम नाथ के साथ जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे, तो बाकी मामलों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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