तमिलनाडु स्थित ऐतिहासिक मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में एक बेहद संवेदनशील प्रशासनिक चूक सामने आई, जब एक शीर्ष संवैधानिक पद पर आसीन हस्ती की मौजूदगी में पूरा परिसर अचानक अंधेरे में डूब गया. मदुरै में हुए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा बंदोबस्त और मंदिर के बुनियादी तंत्र की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले को अत्यधिक गंभीरता से लेते हुए विद्युत प्रबंधन की देखरेख करने वाले कनिष्ठ अभियंता के विरुद्ध तत्काल निलंबन की सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है.
प्रेस से संवाद के बीच छाया अंधेरा
यह घटनाक्रम 30 अक्टूबर का है, जब उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर पूजा-अर्चना के उद्देश्य से मदुरै के मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर पहुंचे थे. दोनों विशिष्ट अतिथियों ने मंदिर के भीतर दर्शन किए. दर्शन संपन्न होने के पश्चात, जब उपराष्ट्रपति परिसर के ईस्ट चिथिराई स्ट्रीट हिस्से में मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद साध रहे थे, उसी वक्त अप्रत्याशित रूप से विद्युत प्रवाह ठप हो गया. यह व्यवधान लगभग दो मिनट तक बना रहा, जिसके चलते चारों ओर अंधेरा छा गया. एक उच्च स्तरीय वीवीआईपी दौरे के दौरान हुए इस व्यवधान ने प्रशासनिक मशीनरी को सकते में डाल दिया.
अनुशासनात्मक कार्रवाई और जवाबदेही तय
व्यवस्था में हुई इस भारी चूक के बाद कनिष्ठ विद्युत अभियंता एस जानकीरमन पर कार्रवाई की गाज गिरी है. उनका निलंबन 31 अक्टूबर की तारीख से प्रभावी माना गया है. उनके विरुद्ध यह विभागीय कदम हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ धर्मादा अधिनियम, 1959 की धारा 56 (1) के प्रावधानों के अंतर्गत उठाया गया है. इस संबंध में जारी आधिकारिक आदेश पर मंदिर न्यासी मंडल की अध्यक्ष आर रुक्मणी के हस्ताक्षर दर्ज हैं.
प्रशासन की ओर से जारी किए गए नोटिस में यह रेखांकित किया गया है कि इतने महत्वपूर्ण वीवीआईपी प्रवास पर हुई इस गड़बड़ी से मंदिर प्रबंधन और राज्य सरकार दोनों की सार्वजनिक साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. नोटिस के जरिए एस जानकीरमन को यह हिदायत दी गई है कि वे अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में 15 दिनों की अवधि में लिखित स्पष्टीकरण पेश करें. तय समयसीमा में संतोषजनक उत्तर न मिलने की स्थिति में मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आगे का प्रशासनिक फैसला लिया जाएगा. आदेश में यह राहत भी दी गई है कि अभियंता चाहें तो 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारियों के समक्ष इस कार्रवाई के खिलाफ अपील दाखिल कर सकते हैं.
राजनीतिक बयानबाजी और देवी के संकेत की बात
बिजली जाने की इस घटना पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने चुटीली टिप्पणी करते हुए तमिलनाडु के बिजली तंत्र पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा,
"देवी जानबूझकर देश को तमिलनाडु में बिजली कटौती की असल स्थिति दिखा रही थीं."दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक ने भी इस प्रकरण को लेकर राज्य प्रशासन पर निशाना साधा. अन्नाद्रमुक ने ध्यान दिलाया कि महज एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी जब मंदिर आए थे, तब भी वहां विद्युत आपूर्ति बाधित हुई थी. लगातार दो दिनों में दो बड़े नेताओं के सामने बिजली जाने से बिजली प्रबंधन पर सवालों की बौछार शुरू हो गई.
सरकार का पक्ष: ग्रिड नहीं, जनरेटर में आई थी तकनीकी बाधा
विवाद गहराने पर तमिलनाडु के बिजली मंत्री आर निर्मल कुमार ने स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया. उन्होंने बताया कि यह रुकावट मुख्य ग्रिड के फेल होने से नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे एक तकनीकी खराबी जिम्मेदार थी. मंत्री के मुताबिक, वीआईपी आगमन को ध्यान में रखकर मंदिर की विद्युत लाइन को पहले से ही वैकल्पिक जनरेटर प्रणाली से जोड़ा जा रहा था. आपूर्ति को जनरेटर पर स्थानांतरित करने के इसी तकनीकी फेरबदल के दौरान गड़बड़ी पैदा हुई, जिसके कारण बिजली कुछ देर के लिए गुल हो गई.


















