राजस्थान के बारां जिले में पंचायती राज चुनाव प्रचार के बीच राजनीतिक गतिविधियां अचानक विवादों में घिर गई हैं। भगत सिंह सेना के प्रमुख नरेश मीणा नाहरगढ़ में आयोजित चुनावी जनसभा समाप्त होने के बाद भारी तादाद में स्थानीय किसानों और अपने समर्थकों का काफिला लेकर सीधे वन विभाग के रेंज कार्यालय पहुंच गए। यह पूरा विवाद एक स्थानीय काश्तकार की पानी की मोटर और पाइप को वनकर्मियों द्वारा जब्त किए जाने की घटना से भड़का, जिसके बाद सरकारी दफ्तर में जमकर हंगामा और टकराव देखने को मिला।
चुनावी सभा में उठा जब्ती का मुद्दा
नरेश मीणा अपने चुनावी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने और उनका प्रचार करने के सिलसिले में नाहरगढ़ इलाके में जनसभा करने पहुंचे थे। इस सार्वजनिक सभा के दौरान इलाके के कई किसानों ने मंच और सभा में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना था कि महकमा उन्हें बेवजह परेशान कर रहा है। इसी बीच एक काश्तकार ने खुलकर व्यथा सुनाई कि वन विभाग की टीम ने उसके खेत से सिंचाई के काम आने वाली पानी की मोटर तथा पाइप को कब्जे में लेकर जब्त कर लिया है। किसानों की यह शिकायत सुनते ही नरेश मीणा ने मंच से वन विभाग पर काश्तकारों को नाजायज तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए तीखा विरोध जताया।
रेंज कार्यालय में मारपीट और जब्ती छुड़ाने के आरोप
नाहरगढ़ में सभा खत्म होते ही नरेश मीणा किसानों और अपने भारी समर्थक समूह के साथ नाहरगढ़ स्थित वन विभाग के रेंज कार्यालय में दाखिल हो गए। वन विभाग द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, नरेश मीणा और उनके साथ आए लोगों ने कार्यालय परिसर में मौजूद विभागीय कर्मचारियों के साथ हाथापाई और मारपीट शुरू कर दी। दी गई शिकायत में विशेष तौर पर वनकर्मी प्रदीप समेत अन्य स्टाफ सदस्यों के साथ बदसलूकी और मारपीट किए जाने का ब्योरा दिया गया है। महकमे का आरोप है कि भीड़ ने कर्मचारियों पर हमला करने के साथ ही विभाग द्वारा विधिवत जब्त कर रखी गई पानी की मोटर और पाइप को भी जबरन अपने कब्जे में ले लिया और वहां से छुड़ाकर साथ ले गए।
पुलिस ने दर्ज किया सरकारी कार्य में बाधा का मुकदमा
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की औपचारिक शिकायत के आधार पर नाहरगढ़ थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कानूनी कदम उठाया है। पुलिस प्रशासन ने नरेश मीणा और उनके सहयोगियों के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, लोकसेवकों पर हमला व मारपीट करने और सरकारी अभिरक्षा से जब्त सामान बलपूर्वक छीनकर ले जाने जैसी गंभीर कानूनी धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। इलाके के पुलिस अधिकारी अब पूरे घटनाक्रम, मौके पर मौजूद गवाहों और परिस्थितियों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रहे हैं।
सात दिनों के भीतर सामने आया तीसरा कानूनी केस
कानूनी मोर्चे पर नरेश मीणा की परेशानियां लगातार गहराती दिख रही हैं क्योंकि पिछले महज सात दिनों की अवधि में उनके खिलाफ दर्ज होने वाला यह तीसरा आपराधिक मामला है। इससे पूर्व छबड़ा क्षेत्र में किसानों की खाद की मांग को लेकर भारी विवाद उत्पन्न हुआ था, जहां कृषि विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी की लिखित शिकायत पर नरेश मीणा के खिलाफ भीड़ को उकसाने, सरकारी काम में व्यवधान पैदा करने और धमकाने के आरोपों में केस कायम किया गया था। इसके अतिरिक्त, शिवदासपुरा टोल प्लाजा पर यातायात रोककर चक्काजाम करने के मामले में भी उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। एक ही हफ्ते में बैक-टू-बैक दर्ज हुए इन मुकदमों से प्रशासनिक शिकंजा कसता नजर आ रहा है।
पंचायती राज चुनाव पर सियासी असर
बारां जिले में चल रहे पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और अहम माना जा रहा है। नरेश मीणा इस बार बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह और बैनर तले चुनाव मैदान में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो उन्होंने बारां जिले की जिला परिषद की सभी 29 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि जिले की 10 पंचायत समितियों में भी उनके समर्थित प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में ताल ठोक रहे हैं। चुनाव प्रचार के चरम दौर में ताबड़तोड़ दर्ज हो रहे मुकदमों ने उनकी राजनीतिक मुहिम के सामने कानूनी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। अब पूरे जिले की निगाहें पुलिस महकमे की अगली कानूनी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।



















