हैदराबाद में हुसैन सागर झील के किनारे फैला टैंक बंड मार्ग शहर की सबसे चहल-पहल वाली जगहों में शामिल है, जहां से हर रोज अनगिनत मुसाफिर गुजरते हैं। इस रास्ते से गुजरने वाले तमाम राहगीरों का ध्यान किनारे पर स्थापित एक विशाल हरे सैन्य लड़ाकू वाहन पर बरबस ही चला जाता है। कई लोग पहली नजर में इसे सड़क के सौंदर्य को बढ़ाने वाली सामान्य सजावट मान बैठते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यह भारी-भरकम वाहन 1971 के भारत-पाकिस्तान संग्राम में भारतीय सैनिकों के अदम्य पराक्रम और देश की शानदार जीत का सजीव साक्ष्य है।
पाकिस्तानी सेना से छीना गया अमेरिकी निर्मित M47 पैटन टैंक
इस लड़ाकू वाहन पर अंकित ब्योरे के मुताबिक, यह कोई साधारण सैन्य नमूना नहीं है, बल्कि दुश्मन देश पाकिस्तान की सेना का अमेरिकी निर्मित M47 पैटन टैंक है। दिसंबर 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध के समय पंजाब और जम्मू की सीमावर्ती पट्टी पर लड़ी गई बसंतर की लड़ाई इतिहास की सबसे भयानक और निर्णायक बख्तरबंद मुठभेड़ों में गिनी जाती है। उस भीषण संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी बख्तरबंद टुकड़ियों ने जोरदार हमले किए थे, लेकिन भारतीय जांबाजों ने उनके हर मंसूबे को मिट्टी में मिला दिया।
बाइसन डिवीज़न का अदम्य साहस और दुश्मन के बख्तरबंद का खात्मा
इस ऐतिहासिक रण में भारतीय सेना की 54वीं इन्फैंट्री डिवीज़न, जिसे लोकप्रिय तौर पर बाइसन डिवीज़न भी पुकारा जाता है, उसने असाधारण बहादुरी की मिसाल पेश की थी। बाइसन डिवीज़न के जवानों ने विरोधी सेना के हमलों को पूरी तरह बेअसर करते हुए उनके दर्जनों टैंकों को नेस्तनाबूद कर दिया। इसके साथ ही कई पाकिस्तानी टैंकों पर भारतीय सैनिकों ने अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था। जंग की समाप्ति के पश्चात, कब्जे में लिए गए इसी पाकिस्तानी लड़ाकू वाहन को गौरवशाली युद्ध स्मृति चिन्ह के तौर पर सुरक्षित रख लिया गया।
हैदराबाद और सिकंदराबाद की जनता को ऐतिहासिक समर्पण
54वीं इन्फैंट्री डिवीज़न की नींव अक्टूबर 1966 में हैदराबाद और सिकंदराबाद के जुड़वां शहरों में ही रखी गई थी। इसी गहरे जुड़ाव के चलते डिवीज़न के तत्कालीन कमांडर मेजर जनरल डब्ल्यू.ए.जी. पिंटो तथा उनके साथी सैनिकों ने स्थानीय नागरिकों के प्रेम, सहयोग और सम्मान के प्रति कृतज्ञता जताने का फैसला किया। इसी भावना के तहत 26 नवंबर 1973 को यह टैंक औपचारिक रूप से हैदराबाद व सिकंदराबाद की जनता को समर्पित कर दिया गया।
बिना परवाह किए आगे बढ़ो का अमर संदेश
टैंक के आधार चबूतरे पर स्थापित पट्टिका पर बाइसन डिवीज़न का आधिकारिक ध्येय वाक्य 'बैश ऑन रिगार्डलेस' दर्ज है, जिसका अर्थ होता है किसी भी बाधा की परवाह किए बिना निरंतर आगे बढ़ना। दशकों बाद भी शांत झील के किनारे अडिग खड़ा यह टैंक युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को भारतीय सेना के त्याग, असीम पराक्रम और 1971 की शानदार विजय की याद दिलाता है।

















