1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सामरिक तनाव एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। भारत द्वारा जल समझौते को निलंबित किए जाने के बाद से इस्लामाबाद में हलचल तेज है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिए हैं कि उनका देश भारत के फैसले के खिलाफ केवल चुप बैठकर इंतजार नहीं करेगा, बल्कि शीर्ष स्तर पर विभिन्न विकल्पों और कठोर रणनीतियों पर विचार कर रहा है।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान और पाकिस्तान की रणनीति
एक साक्षात्कार के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के प्रति कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सिंधु जल समझौते को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों का इस्लामाबाद लगातार गहराई से आकलन कर रहा है। भारत द्वारा उठाए गए कानूनी और प्रशासनिक कदमों के जवाब में पाकिस्तान अपने सभी संभावित विकल्पों पर विचार में जुटा हुआ है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान केवल कानूनी या कूटनीतिक समाधान का इंतजार करेगा या किसी अन्य ठोस रास्ते पर विचार कर सकता है, तो आसिफ ने कहा कि यदि हालात अधिक बिगड़ते हैं और जवाबी कार्रवाई आवश्यक होती है, तो सरकार के सर्वोच्च स्तर पर इस विषय पर चर्चा की जाएगी। हालांकि उन्होंने किसी प्रत्यक्ष सैन्य कदम का स्पष्ट ऐलान नहीं किया, लेकिन उनके वक्तव्य से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस्लामाबाद मौजूदा व्यवस्था से इतर भी रणनीति बना सकता है।
ख्वाजा आसिफ ने जोर देकर कहा कि सरकार स्थिति के हर पहलू का निरंतर विश्लेषण कर रही है। जहां भी पाकिस्तान को अपना रुख अधिक कड़ा करने की आवश्यकता महसूस होगी, वहां शीर्ष नेतृत्व बैठकर आगे के कदमों का निर्णय करेगा। इन बयानों से जाहिर होता है कि पाकिस्तान केवल मौजूदा अंतरराष्ट्रीय अभियानों तक सीमित नहीं रहना चाहता।
पहलगाम आतंकी हमला और भारत का ऐतिहासिक फैसला
दोनों देशों के बीच जल संधि को लेकर उपजा यह विवाद 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भयानक आतंकवादी हमले से जुड़ा हुआ है। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। इस आतंकवादी घटना के विरोध में और सीमा पार आतंकवाद पर नकेल कसने के उद्देश्य से भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
भारत ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से जारी आतंकवाद को पूर्ण और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक संधि का निलंबन प्रभावी रहेगा। भारत का कहना है कि आतंकवाद और बातचीत या समझौते एक साथ नहीं चल सकते। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भारत के इस एकतरफा कदम को खारिज करते हुए तर्क दिया था कि 1960 की संधि के प्रावधानों के तहत कोई भी पक्ष इसे एकतरफा निलंबित नहीं कर सकता।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का फैसला और भारत का रुख
भारत के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंचों का रुख किया। 31 अगस्त 2026 को नीदरलैंड्स के हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि अभी भी कानूनी रूप से प्रभावी है और इसे एकतरफा स्थगित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने जम्मू-कश्मीर में निर्माणाधीन रातले जलविद्युत परियोजना को लेकर भी अंतरिम निर्देश जारी किए।
हालांकि भारत ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया है। भारत शुरू से ही इस अदालत की कार्यवाही को अवैध मानते हुए खारिज करता रहा है। भारत सरकार का कहना है कि संधि को लेकर उसका रुख यथावत और अडिग है। इसके विपरीत, पाकिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय फैसले के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है और आरोप लगा रहा है कि भारत जल संसाधनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
















