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जयपुर के शास्त्री नगर में लोहे के पिंजरे और कचरे के ढेर के बीच चल रहा सरकारी स्कूल, नशेड़ियों के साए में 86 मासूमों का भविष्यराजस्थान
24 अग॰ 2026, 3:04 pm (32 दिन पहले)· 2

जयपुर के शास्त्री नगर में लोहे के पिंजरे और कचरे के ढेर के बीच चल रहा सरकारी स्कूल, नशेड़ियों के साए में 86 मासूमों का भविष्य

जयपुर के शास्त्री नगर स्थित भौमिया बस्ती में एक सरकारी प्राथमिक स्कूल बिना भवन के लोहे के पिंजरे जैसे शेड में संचालित हो रहा है। कचरे के डंपिंग यार्ड और नशेड़ियों के बीच पढ़ रहे 86 बच्चों और दो शिक्षकों की स्थिति बेहद दयनीय है।

जयपुर की राजधानी से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक और डरावनी तस्वीर सामने आई है। शास्त्री नगर के भौमिया बस्ती इलाके में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय अपनी खुद की इमारत न होने के कारण लोहे के एक पिंजरेनुमा शेड के भीतर संचालित होने को मजबूर है। सरकारी दस्तावेजों के रिकॉर्ड में इस विद्यालय के नाम पर कोई भवन दर्ज ही नहीं है। स्थानीय स्तर पर जनसहयोग के जरिए बच्चों को धूप और बरसात के मौसम से बचाने के लिए किसी तरह लोहे का एक पिंजरा और ऊपर शेड जरूर तैयार करा दिया गया था, लेकिन इसके भीतर बुनियादी सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है और स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।

कचरे के डंपिंग यार्ड और बिजली संकट के बीच पढ़ाई

यह पिंजरेनुमा विद्यालय चारों तरफ से कचरे के बड़े और विशाल डंपिंग यार्ड से घिरा हुआ है। स्कूल की सीमा के ठीक बाहर पसरा हुआ कचरा और उससे लगातार उठने वाली भयंकर असहनीय बदबू मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ कर रही है। बरसात के दिनों में यह स्थिति और भी ज्यादा भयानक और दुर्गंधयुक्त हो जाती है। अपना कोई स्थायी भवन न होने के कारण इस स्कूल को आज तक बिजली का आधिकारिक कनेक्शन तक नसीब नहीं हो सका है। हालांकि बच्चों को राहत देने के लिए शेड के अंदर छत से पंखे जरूर लटकाए गए हैं, लेकिन बिजली की आपूर्ति न होने के कारण वे केवल एक शो पीस बनकर रह गए हैं। गर्मी और घुटन से बचने के लिए भी शेड की जालियों को टीन की चद्दरों से पूरी तरह ढका नहीं जा सकता है, ताकि किसी तरह थोड़ी बहुत हवा अंदर आ सके और बच्चे सांस ले सकें।

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खुलेआम नशे का कारोबार और खौफनाक माहौल

इस स्कूल के आसपास का पूरा वातावरण पढ़ाई-लिखाई के माहौल से कोसों दूर और बेहद खौफनाक है। विद्यालय परिसर के ठीक बाहर सरेआम स्मैक बेचने और नशे के इंजेक्शन लगाने का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जमीन पर नशे में इस्तेमाल किए गए खतरनाक सिरिंज और इंजेक्शन खुलेआम बिखरे पड़े रहते हैं जो बच्चों के लिए बड़ा खतरा हैं। मीडिया के वहां पहुंचने पर कई संदिग्ध नशेड़ी मौके से भागते नजर आए, जहां एक बेबस मां अपने ही बेटे को नशे के दलदल में धंसता देख लाचार खड़ी दिखाई दी। ऐसे खौफनाक और असुरक्षित माहौल में कुल 86 मासूम बच्चों का बचपन और उनका उज्ज्वल भविष्य गहरे संकट में पड़ गया है।

दो शिक्षकों के कंधों पर 86 बच्चों की जिम्मेदारी

इस विद्यालय में नामांकित कुल 86 विद्यार्थियों को पढ़ाने और संभालने का जिम्मा केवल दो शिक्षकों के कंधों पर है। इन दोनों शिक्षकों को एक तरफ अपनी एक आंख ब्लैकबोर्ड पर रखनी होती है तो दूसरी आंख स्कूल के बाहर मंडराते खतरनाक नशेड़ियों और कचरे के ढेर पर रखनी पड़ती है। डंपिंग यार्ड की सड़ांध, बिजली के बिना चिलचिलाती गर्मी और बाहर खुलेआम घूमते नशेड़ियों के बीच अपनी कक्षाएं चलाना किसी नरक की यात्रा से कम नहीं है।

पूरे राजस्थान में बिना भवन के चल रहे सैकड़ों स्कूल

यह गंभीर समस्या केवल शास्त्री नगर के इस एक विशिष्ट स्कूल तक ही सीमित नहीं है। अकेले जयपुर जिले में ऐसे 38 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं जिनका अपना कोई भवन मौजूद नहीं है। अगर पूरे राजस्थान राज्य के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 611 सरकारी स्कूल बिना किसी इमारत के किसी तरह चलाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त राज्यभर में 3,000 से अधिक स्कूल भवन ऐसे हैं जो अपनी जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं और राज्य के तीन चौथाई से ज्यादा स्कूलों को तुरंत मरम्मत और रेनोवेशन की सख्त जरूरत है।

सवाल-जवाब

जयपुर में यह स्कूल कहां स्थित है?
यह सरकारी प्राथमिक विद्यालय जयपुर के शास्त्री नगर स्थित भौमिया बस्ती में स्थित है।
स्कूल के पास अपनी इमारत क्यों नहीं है?
सरकारी दस्तावेजों में इस स्कूल के नाम पर कोई भवन दर्ज नहीं है और इसे जनसहयोग से बने लोहे के शेड में चलाया जा रहा है।
इस स्कूल में कुल कितने बच्चे पढ़ते हैं?
इस विद्यालय में कुल 86 मासूम बच्चे नामांकित हैं।
बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी किसके पास है?
इन 86 बच्चों को पढ़ाने की पूरी जिम्मेदारी केवल दो शिक्षकों पर है।
राजस्थान में बिना भवन के कितने सरकारी स्कूल चल रहे हैं?
पूरे राजस्थान राज्य में 611 सरकारी स्कूल बिना इमारत के संचालित हो रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 दिन पहले

यह खबर शिक्षा और बाल सुरक्षा के बीच खड़े गंभीर कानूनी और प्रशासनिक संकट को उजागर करती है। स्कूल के बाहर खुलेआम नशीले पदार्थों की बिक्री और सिरिंज का मिलना पोक्सो या किशोर न्याय अधिनियम से जुड़े गंभीर सुरक्षा पहलुओं पर सवाल खड़े करता है। बिना भवन के सरकारी स्कूलों का संचालन बच्चों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है, जिस पर बाल अधिकार आयोग और न्यायपालिका को स्वतः संज्ञान लेकर सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

यह प्रशासनिक विफलता केवल बुनियादी ढांचे की कमी नहीं, बल्कि राज्य में शिक्षा नीति के खोखलेपन का प्रमाण है। जब 611 से अधिक स्कूल बिना भवन के चल रहे हों, तो यह स्पष्ट है कि बजट आवंटन और जमीनी क्रियान्वयन के बीच भारी खाई है। यदि इस मामले में शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संकट अन्य बस्तियों तक भी फैलेगा, जिससे बच्चों का भविष्य और अधिक अंधकारमय हो जाएगा।

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