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उत्तराखंड में नेताओं के फोन हैक होने का आरोप, विधायक सुमित हृदयेश ने गैरसैंण में आत्मदाह की चेतावनी दीउत्तराखंड
15 अक्तू॰ 2026, 7:12 am (2 घंटे पहले)· 0

उत्तराखंड में नेताओं के फोन हैक होने का आरोप, विधायक सुमित हृदयेश ने गैरसैंण में आत्मदाह की चेतावनी दी

हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने राजनेताओं के फोन हैकिंग का बड़ा आरोप लगाते हुए 27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की बात कही है।

उत्तराखंड की राजनीति में नेताओं और उनके परिजनों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया है कि राज्य में एक संगठित हैकिंग सिंडिकेट सक्रिय है, जो जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों के निजी फोन में सेंधमारी कर रहा है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई न होने से आहत होकर उन्होंने आगामी 27 अक्टूबर से गैरसैंण में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने का कड़ा ऐलान किया है।

अंतरराष्ट्रीय हैकरों के जरिए बातचीत ट्रैक करने का आरोप

विधायक सुमित हृदयेश ने दावा किया कि इस गिरोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैकर्स की सहायता ली जा रही है। उनका कहना है कि इस निगरानी तंत्र का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि प्रमुख राजनीतिक हस्तियां किससे, कब और क्या बातचीत कर रही हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह शामिल हैं, का विशेष रूप से उल्लेख किया। हृदयेश के अनुसार, यदि चुनावी रणनीतिकारों और वरिष्ठ नेताओं की गोपनीय बातचीत लीक हो जाती है, तो विरोधी दल चुनावों के दौरान उसके आधार पर रणनीतिक चालें चल सकते हैं।

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जांच के बहाने फोन देने और धोखे का दावा

पूरे घटनाक्रम का विवरण देते हुए कांग्रेस विधायक ने बताया कि जब उन्हें अपने मोबाइल फोन में कुछ संदिग्ध लगा, तो उन्होंने तकनीकी जांच के लिए उसे दो व्यक्तियों को सौंपा था। शुरुआती दौर में उन दोनों व्यक्तियों ने फोन में किसी भी तरह की हैकिंग या निगरानी से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में सामने आया कि वे दोनों व्यक्ति खुद इस गुप्त निगरानी और हैकिंग के नेटवर्क में शामिल थे। इस खुलासे के बाद विधायक ने पिछले साल 24 अप्रैल को दोनों आरोपियों के खिलाफ नामजद लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया।

परिवार की सुरक्षा और निजता पर खड़े किए सवाल

सुमित हृदयेश ने अपनी पत्नी और 15 वर्षीय बेटी की व्यक्तिगत सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह सिंडिकेट बिना किसी कानूनी डर के खुलेआम संचालित हो रहा है। अपने विरोध प्रदर्शन के निर्णय को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वह केवल औपचारिकता या सांकेतिक प्रयास नहीं करेंगे, बल्कि सीधे आत्मदाह करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका यह कदम किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए है, क्योंकि यदि नागरिकों और प्रतिनिधियों की निजता ही समाप्त हो जाए तो व्यवस्था में कुछ नहीं बचता।

राज्य सरकार की संलिप्तता से इनकार और जान का जोखिम

प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि क्या इस जासूसी के पीछे राज्य सरकार का हाथ है, तो उन्होंने सरकार को सीधे जिम्मेदार मानने से इनकार किया। हृदयेश ने स्पष्ट किया कि वह ऐसा नहीं मानते कि राज्य प्रशासन इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल है। उन्होंने यह भी साझा किया कि मुख्यमंत्री के साथ उनके निजी संबंध अच्छे हैं और वह उन्हें एक सज्जन व्यक्ति मानते हैं। उन्होंने इस मामले में शामिल व्यक्तियों के नामों को सार्वजनिक करने से बचते हुए कहा कि यह जांच का विषय है और पुलिस यदि निष्पक्ष जांच करेगी तो सब सच सामने आ जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इस संवेदनशील मुद्दे को खुले मंच पर उठाने के कारण उनके जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

हरीश रावत ने दी संयम बरतने की सलाह

विधायक के इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भी सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले व्यक्तियों के समक्ष संगठित नेटवर्क किस प्रकार के असहज हालात पैदा कर सकते हैं, यह मामला उसका स्पष्ट उदाहरण है। रावत ने विधायक को ढांढस बंधाते हुए विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, अदम्य साहस और संयम बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस कठिन परिस्थिति में पूरी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

सवाल-जवाब

विधायक सुमित हृदयेश ने क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय हैकरों की मदद से एक गिरोह राजनेताओं और उनके परिवारों के फोन हैक कर उनकी निजी बातचीत ट्रैक कर रहा है।
सुमित हृदयेश ने आत्मदाह की चेतावनी कब और कहां के लिए दी है?
उन्होंने 27 अक्टूबर से गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की घोषणा की है।
विधायक ने पुलिस में शिकायत कब दर्ज कराई थी?
उन्होंने पिछले साल 24 अप्रैल को दो नामजद व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
क्या विधायक ने इस मामले में राज्य सरकार पर आरोप लगाया है?
नहीं, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्य सरकार को इसमें संलिप्त नहीं मानते और मुख्यमंत्री के साथ उनके अच्छे संबंध हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
हरीश रावत ने मामले को बेहद चिंताजनक बताते हुए सुमित हृदयेश को धैर्य और संयम बनाए रखने की सलाह दी और उनके साथ खड़े रहने की बात कही।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·47 मिनट पहले

आत्मदाह की बात करना थोड़ा अजीब लग रहा है। पुलिस कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत का रुख भी किया जा सकता था, पर ऐसे सीधे जान देने की धमकी देना बात को किसी और ही दिशा में ले जाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·47 मिनट पहले

अर्जुन जी, अदालत का रास्ता तो सही है, पर जब पुलिस ही न सुने और परिवार की सुरक्षा दांव पर हो, तो इंसान का धैर्य टूट जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

फोन हैकिंग का मामला गंभीर है और विधायक का ऐसे आत्मदाह की चेतावनी देना और डराता है। पुलिस को तुरंत एक्शन लेना चाहिए था, अब बात इतनी बढ़ गई है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मेरा फोन क्लोन हुआ था, तब पुलिस थाने के चक्कर काट-काटकर मेरा भी दम निकल गया था, कोई सुनवाई नहीं होती।

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