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लालदुहोमा ने शुरू किया बाना काइह 3.0, रोज़गार के नए उपायों की घोषणामिजोरम
18 सित॰ 2026, 6:40 pm (13 दिन पहले)· 2

लालदुहोमा ने शुरू किया बाना काइह 3.0, रोज़गार के नए उपायों की घोषणा

लालदुहोमा ने शुक्रवार को आइज़ॉल में बाना काइह यानी हैंडहोल्डिंग 3.0 के तीसरे चरण की शुरुआत की. सरकार ने खेती, ऋण सहायता, प्रोसेसिंग और राज्य के बाहर रोज़गार से जुड़ी नई पहलें प्रस्तावित कीं.

मिज़ोरम में रोज़गार और आजीविका के नए अवसर बनाने की दिशा में सरकार ने अपनी हैंडहोल्डिंग पहल को आगे बढ़ाया है. मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने शुक्रवार को आइज़ॉल स्थित इरिगेशन एंड वॉटर रिसोर्सेज कॉन्फ्रेंस हॉल में बाना काइह, यानी हैंडहोल्डिंग 3.0, के तीसरे चरण की शुरुआत की. इस चरण के तहत सरकार ने राज्य में लोगों को काम और आय के अतिरिक्त साधन देने वाले नए कदम प्रस्तावित किए हैं.

योजना का व्यापक दायरा

बाना काइह को केवल ऋण योजना या कृषि उपज खरीद कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा रहा है. लालदुहोमा ने कहा कि इसके तहत सरकार के विकास कार्यक्रमों का एक व्यापक समूह चलाया जा रहा है. कृषि उपज खरीद, ऋण घटक और मुख्यमंत्री स्पेशल पैकेज इसके बेहतर जाने जाने वाले हिस्से हैं, लेकिन योजना इन तक सीमित नहीं है.

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बुनियादी ढांचे और आजीविका से जुड़े प्रोजेक्टों में लुआंगमुअल में हल्दी प्रोसेसिंग उद्योग तथा सैरांग में अदरक प्रोसेसिंग इकाई शामिल हैं. मुख्यमंत्री इनोवेशन चैलेंज और मिज़ोरम हैंडहोल्डिंग वेंचर कैपिटल फंड भी इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा हैं. इन कार्यक्रमों से खेती उत्पादन, प्रोसेसिंग और वित्त सहायता को एक पहल के तहत रखा गया है.

सोलर ड्रायर और स्लाइसिंग मशीनों की खरीद भी योजना में शामिल है. गेहूं और मकई की अनुबंध खेती को भी कवर किया गया है, जबकि थेनज़ॉल में एनिमल हस्बेंड्री एंड वेटरिनरी फार्म के लिए सूखने के शेड और चारा निर्माण सुविधाएं प्रस्तावित हैं. यह दायरा दिखाता है कि उपकरण और फसल के बाद की सुविधाएं भी आजीविका योजना का हिस्सा मानी जा रही हैं.

लंबित वायदे और ऋण चुकौती

लालदुहोमा ने कहा कि सरकार के कई लंबे समय से चले आ रहे वायदे हैंडहोल्डिंग पहल के जरिए धीरे-धीरे पूरे किए जा रहे हैं. इनमें खेती उपज की खरीद, 100% ब्याज सब्सिडी के माध्यम से बिना ब्याज ऋण और सरकारी बैंक गारंटी देना शामिल है. मुख्यमंत्री ने इन सुविधाओं को योजना के तहत अमल में आ रहे विकास संकल्पों से जोड़ा.

मुख्यमंत्री ने साझेदार बैंकों के सहयोग की सराहना की और लाभार्थियों की ऋण चुकौती में हुई प्रगति को रेकॉर्ड किया. उन्होंने कहा कि हैंडहोल्डिंग योजना नैतिक सुधार की प्रक्रिया में भी योगदान दे रही है.

युवाओं और प्रोग्रेस पार्टनर्स के लिए प्रस्ताव

मिज़ोरम के बाहर रोज़गार तलाशने वाले युवाओं की मदद के लिए सरकार हैंडहोल्डिंग योजना के तहत फॉरिन प्लेसमेंट लोन लाने पर विचार कर रही है. यह सुविधा अभी विचाराधीन है.

तीसरे चरण में प्रोग्रेस पार्टनर्स के लिए एक पुनर्वास योजना भी प्रस्तावित की गई है. इसका दायरा उन साझेदारों को शामिल करेगा जिनकी परियोजनाएं उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण असफल हो गईं.

जैविक खेती और मजबूत निगरानी

कृषि के मामले में लालदुहोमा ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया. सरकार मिज़ोरम के बाहर से आने वाले रसायनिक उर्वरकों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करेगी. साथ ही, स्थानीय स्तर पर बने जैविक उर्वरकों का उत्पादन और उपयोग बढ़ाने की योजना है, जिससे जैविक उत्पादन को स्थानीय inputs से सहायता मिल सके.

परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिक मजबूत निगरानी की मांग की. उन्होंने कहा कि पर्याप्त फॉलो-अप न होने से राज्य में कई प्रोजेक्ट असफल हुए हैं, इसलिए कामों की नियमित देखरेख जरूरी है. यही चिंता तीसरे चरण में करीबी निगरानी की मांग का आधार है.

लाभार्थियों से अनुरोध किया गया कि वे कार्यान्वयन विभागों और साझेदार बैंकों से सहयोग करें और राशियों का सही उपयोग सुनिश्चित करें. धन का सही उपयोग योजना के आजीविका लक्ष्यों को पूरा करने से सीधे जुड़ा है.

लालदुहोमा ने हैंडहोल्डिंग योजना को विकसित भारत 2047 की दृष्टि का हिस्सा बताया. उन्होंने टीम मिज़ोरम से अपील की कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और नए आजीविका अवसर पैदा करने के लिए सभी मिलकर प्रयास करें.

सवाल-जवाब

बाना काइह 3.0 का तीसरा चरण कब और कहां शुरू किया गया?
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने शुक्रवार को आइज़ॉल के इरिगेशन एंड वॉटर रिसोर्सेज कॉन्फ्रेंस हॉल में तीसरा चरण शुरू किया.
हैंडहोल्डिंग पहल किन जाने-माने हिस्सों तक सीमित नहीं है?
कृषि उपज खरीद, ऋण घटक और मुख्यमंत्री स्पेशल पैकेज इसके जाने-माने हिस्से हैं. लालदुहोमा ने कहा कि योजना सरकार के विकास कार्यक्रमों के एक व्यापक समूह को कवर करती है.
लुआंगमुअल और सैरांग में कौन सी सुविधाएं शामिल हैं?
लुआंगमुअल में हल्दी प्रोसेसिंग उद्योग और सैरांग में अदरक प्रोसेसिंग इकाई शामिल है. मुख्यमंत्री इनोवेशन चैलेंज और मिज़ोरम हैंडहोल्डिंग वेंचर कैपिटल फंड भी योजना का हिस्सा हैं.
100% ब्याज सब्सिडी से लाभार्थियों को क्या मिलेगा?
100% ब्याज सब्सिडी के माध्यम से बिना ब्याज ऋण देने की व्यवस्था की जा रही है. खेती उपज खरीद और सरकारी बैंक गारंटी भी लंबित वायदों में शामिल हैं.
मिज़ोरम से बाहर रोज़गार चाहने वाले युवाओं के लिए क्या प्रस्ताव है?
सरकार हैंडहोल्डिंग योजना के तहत फॉरिन प्लेसमेंट लोन लाने पर विचार कर रही है. यह अभी विचाराधीन है.
प्रोग्रेस पार्टनर्स के लिए कौन सी योजना प्रस्तावित है?
तीसरे चरण में प्रोग्रेस पार्टनर्स के लिए पुनर्वास योजना प्रस्तावित है. यह उन लोगों को कवर करेगी जिनकी परियोजनाएं उनके नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों में असफल हुईं.
खेती में सरकार किस दिशा में कदम बढ़ा रही है?
सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहती है. मिज़ोरम के बाहर से आने वाले रसायनिक उर्वरकों पर निर्भरता धीरे-धीरे घटेगी और स्थानीय जैविक उर्वरकों का उत्पादन व उपयोग बढ़ेगा.
परियोजनाओं की निगरानी पर जोर क्यों दिया जा रहा है?
लालदुहोमा ने कहा कि पर्याप्त फॉलो-अप न होने से राज्य में कई परियोजनाएं असफल हुईं. इसलिए मजबूत निगरानी और फंड के सही उपयोग पर जोर दिया गया है.
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टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·12 दिन पहले

मिज़ोरम सरकार की 'बाना काइह 3.0' पहल महज़ कृषि ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयों, अनुबंध खेती और विदेशी रोज़गार के लिए ऋण जैसे उपायों के ज़रिए आजीविका के ढांचे को व्यापक बना रही है। हालांकि यह एक सामाजिक-आर्थिक कदम है, लेकिन इस तरह की नीतियां पूर्वोत्तर राज्यों के युवाओं के बीच पॉप कल्चर और जीवनशैली में भी बदलाव लाती हैं, क्योंकि आर्थिक आत्मनिर्भरता से क्षेत्रीय आकांक्षाएं और आधुनिक मीडिया की पहुंच तेज़ी से बढ़ती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 दिन पहले

लालदुहोमा सरकार की 'बाना काइह 3.0' पहल महज़ एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में आर्थिक आत्मनिर्भरता और राजनैतिक स्थिरता का एक नया मॉडल पेश कर रही है। अनुबंध खेती, प्रोसेसिंग यूनिट्स और विदेशी रोज़गार ऋण जैसे बहुआयामी प्रावधानों को जोड़कर मुख्यमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि मिज़ोरम का आर्थिक ढांचा अब पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर औद्योगिक और वैश्विक बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हो रहा है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·12 दिन पहले

मिज़ोरम सरकार की यह पहल सिर्फ़ वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत जैविक खेती पर जोर देना और रसायन मुक्त कृषि की ओर बढ़ना दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता का संकेत देता है। यदि विदेशी प्लेसमेंट ऋण और अनुबंध खेती जैसी योजनाएं ज़मीन पर पूरी तरह उतरती हैं, तो यह पूर्वोत्तर के राज्यों में पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोज़गार सृजन का एक प्रभावी मॉडल बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 दिन पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था के एक वरिष्ठ रिपोर्टर के रूप में, मैं इस आर्थिक योजना के सुरक्षा और वित्तीय अनुशासन वाले पहलू को महत्वपूर्ण मानता हूँ। बिना ब्याज के ऋण, सरकारी बैंक गारंटी और नैतिक सुधार का ज़िक्र यह दर्शाता है कि सरकार वित्तीय अपराधों और ऋण चूक के जोखिम को कम करने के लिए प्रशासनिक निगरानी को कितना कड़ा कर रही है। यदि ऋण चुकौती में पारदर्शिता बनी रही, तो यह राज्य के वित्तीय अपराध सूचकांक को भी नियंत्रित रखने में मदद करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·12 दिन पहले

लालदुहोमा सरकार द्वारा शुरू की गई 'बाना काइह 3.0' और 'मिज़ोरम हैंडहोल्डिंग वेंचर कैपिटल फंड' जैसी पहलें पूर्वोत्तर के इस राज्य में उद्यमशीलता और कृषि-प्रसंस्करण को नया वित्तीय बल देंगी। हल्दी और अदरक प्रसंस्करण इकाइयों तथा अनुबंध खेती के समावेश से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, जिससे स्थानीय आजीविका में सुधार के साथ कॉर्पोरेट निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी बढ़ावा मिलने की पूरी संभावना है।

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