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महराजगंज में 12 साल पहले बनी सीमावर्ती मंडी हुई बदहाल, स्थानीय व्यापार के बजाय आवारा पशुओं का बना बसेराभारत
21 अग॰ 2026, 6:52 am (32 दिन पहले)· 2

महराजगंज में 12 साल पहले बनी सीमावर्ती मंडी हुई बदहाल, स्थानीय व्यापार के बजाय आवारा पशुओं का बना बसेरा

महराजगंज जिले के ठूठीबारी क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के पास 12 वर्ष पूर्व निर्मित व्यापारिक मंडी आज तक चालू नहीं हो सकी है। करोड़ों रुपये की लागत से बना यह परिसर अब देखरेख के अभाव में बदहाल होकर मवेशियों का ठिकाना बन गया है।

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में भारत और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे ठूठीबारी क्षेत्र के नेटुअहिया गांव में बनी एक विशाल व्यापारिक मंडी प्रशासनिक उपेक्षा की मिसाल बन चुकी है। करीब 12 साल पहले इस मंडी परिसर का निर्माण इस उम्मीद के साथ किया गया था कि सीमावर्ती इलाके में कारोबार को नई दिशा मिलेगी। हालांकि, निर्माण कार्य पूरा होने के एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यहां व्यापारिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं। जिस जगह पर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने थे, वहां आज पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।

करोड़ों की लागत और भव्य उम्मीदें

जब इस मंडी परियोजना की नींव रखी गई थी, तब सीमावर्ती गांव नेटुअहिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खासा उत्साह देखा गया था। स्थानीय निवासियों और किसानों को उम्मीद थी कि इस परिसर के शुरू होने से उन्हें अपनी फसल और अन्य दैनिक सामान खरीदने या बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लोगों की योजना थी कि यह मंडी ठूठीबारी और गरौड़ा बाजार की तर्ज पर एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित होगी। भारत और नेपाल की सीमा के ठीक पास स्थित होने के कारण नेपाल से आने वाले खरीदारों और सीमावर्ती ग्रामीणों के जरिए यहां बड़े पैमाने पर कारोबार बढ़ने की मजबूत संभावनाएं मौजूद थीं।

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रखरखाव के अभाव में जर्जर हुआ ढांचा

लंबे समय तक इस्तेमाल में न आने और प्रशासनिक अनदेखी के कारण करोड़ों रुपये की यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। देखरेख न होने से मंडी भवन की दीवारें कई जगहों से दरक गई हैं और दुकानों के शटर टूटकर खराब हो रहे हैं। परिसर की सुरक्षा के लिए बनाई गई बाउंड्रीवाल भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सुरक्षा और संरक्षण की व्यवस्था न होने की वजह से मंडी परिसर में लगे कई कीमती उपकरण और निर्माण सामग्री चोरी हो चुके हैं। जिस परिसर को क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनना था, वह आज उपेक्षा की भेंट चढ़ चुका है।

रोजगार के टूटे सपने और वर्तमान स्थिति

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा जनता के पैसे से बनाई गई इस परियोजना का मूल उद्देश्य पूरी तरह निष्फल हो गया है। यदि समय पर इस परिसर में नियमित बाजार का संचालन शुरू कर दिया जाता, तो क्षेत्र के छोटे व्यापारियों, किसानों और शिक्षित युवाओं को अपनी उपज और उत्पादों का सही मूल्य मिलता और रोजगार के साधन बनते। वर्तमान में इस खाली और बदहाल परिसर का उपयोग केवल स्थानीय पशुपालक अपने मवेशियों को घुमाने और बांधने के लिए कर रहे हैं। टूटती दीवारें, उखड़े शटर और पसरा सन्नाटा इस अधूरे विकास और ग्रामीणों के टूटे सपनों की कहानी बयां कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

यह मंडी महराजगंज जिले के किस स्थान पर स्थित है?
यह मंडी महराजगंज जिले के ठूठीबारी क्षेत्र में स्थित भारत-नेपाल सीमा से लगे नेटुअहिया गांव में बनी है।
इस मंडी परिसर का निर्माण कब हुआ था?
इस व्यापारिक मंडी परिसर का निर्माण लगभग 12 साल पहले किया गया था।
वर्तमान समय में इस मंडी परिसर की क्या स्थिति है?
प्रशासनिक उपेक्षा के कारण मंडी चालू नहीं हो पाई है और इसकी दीवारें तथा शटर जर्जर हो चुके हैं, जिसका उपयोग अब मवेशी घुमाने के लिए हो रहा है।
स्थानीय लोगों को इस परियोजना से क्या उम्मीदें थीं?
स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि इस मंडी से सीमावर्ती इलाके में रोजगार के अवसर बनेंगे और किसानों व व्यापारियों को एक बड़ा व्यापारिक केंद्र मिलेगा।
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