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मणिपुर में लगातार हिंसा और शांति बहाली में नाकामी के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, बर्तन और हॉर्न बजाकर किया अनोखा प्रदर्शनमणिपुर
24 अक्तू॰ 2026, 9:51 am (3 दिन पहले)· 2

मणिपुर में लगातार हिंसा और शांति बहाली में नाकामी के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, बर्तन और हॉर्न बजाकर किया अनोखा प्रदर्शन

मणिपुर के पांच घाटी जिलों में हजारों लोगों ने शुक्रवार शाम को सरकार की नाकामी और जारी हिंसा के विरोध में अनोखा 'साउंड प्रोटेस्ट' किया।

मणिपुर में जारी हिंसा और राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने में सरकार की कथित विफलता के खिलाफ लोगों का गुस्सा शुक्रवार शाम को अनोखे तरीके से फूटा। राज्य के पांच घाटी जिलों में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक जोरदार 'साउंड प्रोटेस्ट' यानी ध्वनि प्रदर्शन का आयोजन किया। इस दौरान आम नागरिकों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए कड़ाके की ठंड और तनाव के बीच कड़ा रुख अपनाया।

बर्तन, हथौड़े और हॉर्न से गूंजी इंफाल की सड़कें

इंफाल के कई इलाकों में स्थानीय लोगों ने शाम 7.30 बजे से रात 8 बजे के बीच जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने थालियों और अन्य बर्तनों को आपस में पीटा, बिजली के खंभों पर हथौड़े चलाए और अपने वाहनों के हॉर्न लगातार बजाए। इस अनोखे विरोध प्रदर्शन में कुछ प्रदर्शनकारी ढोल-नगाड़े लेकर भी सड़कों पर उतर आए और उन्हें जोर-जोर से बजाया। नागरिकों का कहना था कि नेता उनकी लगातार की जा रही अपीलों और मांगों को नजरअंदाज कर रहे हैं, इसलिए उन्हें अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए इस तरह के प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा।

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कंगला किले की ओर मार्च और पुलिस बैरिकेडिंग

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मणिपुर के पूर्ववर्ती साम्राज्य के ऐतिहासिक राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र कहे जाने वाले कंगला की ओर मार्च करने लगे। यह ऐतिहासिक स्थल राजभवन और मुख्यमंत्री सचिवालय से मात्र कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित है। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पैलेस कंपाउंड, मोइरांगखोम और केइसमपात जंक्शनों पर भारी बैरिकेडिंग की और कई समूहों को बीच रास्ते में ही रोक दिया। इसके बावजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारी मार्च करते हुए कंगला के मुख्य द्वार तक पहुंचने में कामयाब रहे, हालांकि उन्हें किले के परिसर के भीतर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।

आंसू गैस के गोले दागे गए और सुरक्षा कड़ी की गई

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने राजभवन के पास जमा हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले छोड़े। रात 8 बजे के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करते हुए कई स्थानों पर अतिरिक्त बैरिकेड्स भी लगाए गए। गनीमत यह रही कि इस पूरे प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या किसी के हताहत होने की कोई सूचना सामने नहीं आई।

फेडरेशन ऑफ हाओमी ने किया था आह्वान

यह पूरा प्रदर्शन फेडरेशन ऑफ हाओमी नामक एक स्थानीय नागरिक समाज संगठन के आह्वान पर आयोजित किया गया था। इस संगठन ने राज्य के लोगों से अपील की थी कि वे लगातार जारी जातीय संघर्ष और शांति स्थापित करने में सरकार की असमर्थता के विरोध में शाम 7.30 बजे से रात 8 बजे के बीच तेज आवाज करके अपना रोष व्यक्त करें।

सवाल-जवाब

मणिपुर में साउंड प्रोटेस्ट क्यों किया गया?
यह प्रदर्शन लगातार हो रही हिंसा, जातीय संघर्ष और सरकार द्वारा शांति बहाल करने में कथित विफलता के विरोध में किया गया था।
यह अनोखा प्रदर्शन कब आयोजित किया गया था?
यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार शाम को 7.30 बजे से 8 बजे के बीच आयोजित किया गया था।
किस संगठन ने इस प्रदर्शन का आह्वान किया था?
इस प्रदर्शन का आह्वान फेडरेशन ऑफ हाओमी नामक नागरिक समाज संगठन ने किया था।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने क्या किया?
लोगों ने बर्तन पीटे, बिजली के खंभों पर हथौड़े चलाए, वाहनों के हॉर्न बजाए और सड़कों पर ढोल पीटे।
क्या प्रदर्शन के दौरान कोई हिंसा या चोट की खबर आई?
नहीं, इस प्रदर्शन के दौरान किसी के हताहत होने या हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·3 दिन पहले

मणिपुर के इन हालात को देखकर अपने पुराने दिनों की याद आ गई जब रिपोर्टिंग के दौरान जनता का ऐसा ही आक्रोश सड़कों पर फूटता था। उम्मीद है सरकार अब जागेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

बर्तन बजाने और हॉर्न पीटने से सरकार की नींद सच में खुलेगी, इसमें मुझे थोड़ा शक है। नेताओं को इन आवाजों से फर्क पड़ता तो अब तक हालात सुधर चुके होते।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·3 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात ठीक है, पर जब सब रास्ते बंद हों तो लोग और क्या करें? क्या सरकार सच में इन आवाजों से भी पूरी तरह बेखबर रह जाएगी?

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

मणिपुर के हालात देखकर सचमुच बहुत दुख होता है। सरकार और प्रशासन कब जागेंगे? महीनों से लोग इतने डर और तनाव में जी रहे हैं, और किसी को फर्क ही नहीं पड़ रहा। जनता को अपनी बात मनवाने के लिए सड़कों पर उतरकर बर्तन और हॉर्न बजाने पड़ रहे हैं, इससे बड़ी लाचारी और क्या होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

रोहन भाई, कंगला किले और सीएम हाउस से बस चंद कदमों की दूरी पर ऐसा प्रदर्शन होना वाकई सरकार की नींद उड़ाने के लिए काफी है।

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