सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के फैसलों के खिलाफ विपक्षी नेताओं द्वारा दाखिल संयुक्त याचिका पर बुधवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना बन गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मामला विचार के लिए आ सकता है। याचिकाकर्ताओं ने चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की जारी कवायद को तत्काल रोकने और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सख्त कदम उठाने की गुहार लगाई है।
रजिस्ट्री की चौदह आपत्तियों के बाद टालनी पड़ी थी शुरुआती सुनवाई
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के विभिन्न सहयोगी दलों के नेताओं ने सोमवार शाम देश की शीर्ष अदालत में यह अर्जी पेश की थी। कांग्रेस पार्टी की लीगल टीम द्वारा दाखिल इस याचिका को पहले मंगलवार के लिए तय माना जा रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने पड़ताल के दौरान इसमें चौदह अलग-अलग तकनीकी खामियां दर्ज कर दीं। रजिस्ट्री की आपत्तियों के कारण मंगलवार को इस पर आगे की कार्यवाही संभव नहीं हो सकी और प्रक्रिया के तहत आपत्तियों का निपटारा होने तक सुनवाई टाल दी गई थी।
अदालत की रजिस्ट्री द्वारा उठाई गई आपत्तियों में कई प्रशासनिक व दस्तावेजी कमियां शामिल थीं। इनमें प्रतिवादियों के आधिकारिक नामों में विसंगतियां, निजी पक्षकारों को प्रतिवादी बनाए जाने का उचित स्पष्टीकरण न होना, और संबंधित पुराने न्यायिक फैसलों की आधिकारिक प्रतियां संलग्न न करना शामिल था। इसके अलावा राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा बाकी नौ याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकालतनामा समय पर पेश नहीं हुआ था। साथ ही खरगे के पहचान पत्र की प्रति धुंधली होना, 220 रुपये की कोर्ट फीस कम जमा कराया जाना और दस्तावेजों की छपाई में कमियां सामने आई थीं। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि इन सभी त्रुटियों को दूर करने के बाद ही वाद सूची में इसे सूचीबद्ध किया जाए।
याचिका में ग्यारह विपक्षी नेता बने पक्षकार, आम आदमी पार्टी रही बाहर
इस संयुक्त याचिका को विपक्ष के ग्यारह प्रमुख नेताओं ने मिलकर दायर किया है। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव और शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत शामिल हैं। इनके अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के एम.ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में ध्यान देने योग्य पहलू यह है कि विपक्षी मोर्चे का हिस्सा होने के बावजूद आम आदमी पार्टी की ओर से कोई भी नेता इस याचिका में पक्षकार नहीं बना है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने मामले में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के साथ-साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी के रूप में नामित किया है।
एसआईआर पर रोक और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग
याचिका के मुख्य आधार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संचालन पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस विशेष प्रक्रिया के दौरान जमीनी स्तर पर व्यापक अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
विपक्षी नेताओं ने अदालत से मांग की है कि चुनावी तंत्र की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एसआईआर की पूरी प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का कड़ा अनुरोध भी शीर्ष अदालत के समक्ष रखा गया है।
























