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नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी में विरोधियों की अर्जी रद्द, राजस्थान के नगरीय चुनाव में 3 प्रत्याशी बिना वोटिंग जीतेराजस्थान
2 सित॰ 2026, 12:39 pm (23 दिन पहले)· 2

नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी में विरोधियों की अर्जी रद्द, राजस्थान के नगरीय चुनाव में 3 प्रत्याशी बिना वोटिंग जीते

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 में मतदान से पहले ही 3 पार्षदों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। बीकानेर, डूंगरपुर और बूंदी जिलों में विपक्षी प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने से भाजपा के 2 और कांग्रेस के 1 उम्मीदवार की जीत की राह साफ हुई।

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 की मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही राजनीतिक बिसात पर पहला बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की आधिकारिक जांच और स्क्रूटनी के दौरान प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों की अर्जियां निरस्त होने के कारण भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों का जीत का खाता खुल गया है। राज्य के विभिन्न निकायों के तीन अलग-अलग वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद केवल एक-एक प्रत्याशी ही मैदान में बचा है, जिसके चलते उनका निर्विरोध चुना जाना पूरी तरह तय हो चुका है। इन निर्विरोध निर्वाचित होने वाले प्रत्याशियों में दो उम्मीदवार भाजपा के हैं जबकि एक प्रत्याशी कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखता है। यद्यपि निर्वाचन आयोग की ओर से इन सीटों पर विजय की औपचारिक घोषणा किया जाना अभी बाकी है, लेकिन किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में न होने से इनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है।

बीकानेर और डूंगरपुर में भाजपा ने बनाई बढ़त

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीकानेर नगर निगम के अंतर्गत आने वाले वार्ड नंबर 69 में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार लीला गहलोत के सामने अब कोई चुनौती नहीं बची है। इस वार्ड से कांग्रेस की प्रत्याशी ममता का नामांकन पत्र सिंबल की तकनीकी खामी के कारण खारिज कर दिया गया। दरअसल, ममता ने पार्टी का आधिकारिक सिंबल मिलने से पूर्व ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी अर्थात आरएलपी से अपना पर्चा दाखिल कर दिया था। बाद में कांग्रेस ने तो उन्हें अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिया, लेकिन आरएलपी की ओर से उन्हें सिंबल जारी नहीं किया गया। चुनाव अधिकारियों की जांच में अधिकृत फॉर्म और सिंबल का अभाव पाए जाने पर ममता का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया गया। इस वजह से चुनाव मैदान में एकमात्र प्रत्याशी लीला गहलोत ही शेष रह गईं और उनका बिना किसी मुकाबले के पार्षद चुना जाना तय हो गया।

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इसी तरह डूंगरपुर नगर परिषद के चुनाव में भी भाजपा ने मतदान की तारीख से पहले ही अपनी पहली सीट पक्की कर ली है। डूंगरपुर नगर परिषद के सभी 40 वार्डों के लिए कुल 196 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। रिटर्निंग अधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में जब इन सभी पर्चों की गहन जांच की गई, तो वार्ड नंबर 23 से कांग्रेस उम्मीदवार गणेश कटारा का पर्चा निरस्त हो गया। गणेश कटारा के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की वजह से उनका आवेदन पत्र अयोग्य ठहराया गया। गणेश कटारा की उम्मीदवारी रद्द होते ही इस वार्ड से भाजपा के प्रत्याशी मनन कलासुआ इकलौते उम्मीदवार बच गए। मनन कलासुआ भाजपा के पूर्व एवं निवर्तमान सभापति अमृत कलासुआ के पुत्र हैं। प्रतिद्वंद्वी के हटने के बाद मनन कलासुआ का भी निर्विरोध निर्वाचन निश्चित हो गया है।

बूंदी जिले के हिंडौली में कांग्रेस की निर्विरोध जीत

दूसरी तरफ, बूंदी जिले की हिंडौली नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी ने भी चुनाव से पहले ही खाता खोल लिया है। हिंडौली नगर पालिका के वार्ड नंबर 20 में मुकाबला मुख्य रूप से दो प्रत्याशियों के बीच ही माना जा रहा था। यहाँ कांग्रेस की तरफ से हनुमान व्यास और भारतीय जनता पार्टी की ओर से जितेंद्र सिंह ने अपने-अपने पर्चे दाखिल किए थे। नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान भाजपा उम्मीदवार जितेंद्र सिंह का पर्चा कतिपय त्रुटियों के कारण रद्द घोषित कर दिया गया। मैदान में सिर्फ दो प्रत्याशी होने के कारण भाजपा उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज होते ही कांग्रेस के हनुमान व्यास अकेले उम्मीदवार के रूप में मैदान में रह गए। इसके बाद वार्ड 20 से हनुमान व्यास का भी निर्विरोध पार्षद बनना तय हो चुका है। हालांकि, बीकानेर, डूंगरपुर और हिंडौली तीनों ही स्थानों पर चुनाव आयोग द्वारा जीत का अंतिम प्रमाण पत्र और आधिकारिक घोषणा जारी होना शेष है।

राज्य भर में हजारों पर्चे निरस्त, कांग्रेस ने उठाए सवाल

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 के दौरान पूरे प्रदेश में नामांकन पत्रों की जांच के बाद व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राज्यभर के विभिन्न निकायों में हजारों आवेदकों के पर्चे नियमानुसार जांच में कमियां पाए जाने के कारण खारिज कर दिए गए हैं। पर्चे निरस्त होने वाले उम्मीदवारों में भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय आवेदक भी शामिल हैं। जिन वार्डों में नामांकन रद्द होने के बाद भी दो या दो से अधिक वैध प्रत्याशी मैदान में बचे हैं, वहाँ निर्धारित तिथि पर नियमानुसार मतदान आयोजित कराया जाएगा।

इस बीच, नामांकन पत्रों के बड़े पैमाने पर निरस्त होने को लेकर राज्य में सियासी घमासान भी छिड़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कई निकायों में प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर धांधली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं का दावा है कि भीलवाड़ा सहित राज्य के कई नगरीय निकायों में उनके अधिकृत प्रत्याशियों तक समय पर पार्टी के सिंबल ही नहीं पहुंच पाए, जिसकी वजह से रिटर्निंग अधिकारियों ने उनके फॉर्म खारिज कर दिए। समय रहते सिंबल न मिलने और पर्चे निरस्त होने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में प्रदर्शन करते हुए जमकर बवाल काटा है और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।

सवाल-जवाब

राजस्थान निकाय चुनाव में कौन-कौन से उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं?
बीकानेर वार्ड 69 से भाजपा की लीला गहलोत, डूंगरपुर वार्ड 23 से भाजपा के मनन कलासुआ और बूंदी जिले के हिंडौली वार्ड 20 से कांग्रेस के हनुमान व्यास निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
बीकानेर के वार्ड 69 में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा क्यों निरस्त हुआ?
कांग्रेस उम्मीदवार ममता ने आधिकारिक सिंबल से पहले आरएलपी से नामांकन किया था। बाद में आधिकारिक सिंबल जमा न होने के कारण उनका पर्चा खारिज कर दिया गया।
डूंगरपुर में भाजपा प्रत्याशी मनन कलासुआ की जीत का रास्ता कैसे साफ हुआ?
डूंगरपुर वार्ड 23 से कांग्रेस उम्मीदवार गणेश कटारा का नामांकन आपराधिक मामले दर्ज होने की वजह से रद्द कर दिया गया, जिससे भाजपा प्रत्याशी अकेले मैदान में बचे।
बूंदी की हिंडौली नगर पालिका में कांग्रेस को जीत कैसे मिली?
हिंडौली वार्ड 20 से भाजपा उम्मीदवार जितेंद्र सिंह का नामांकन पत्र त्रुटियों के कारण निरस्त हो गया, जिससे कांग्रेस के हनुमान व्यास इकलौते प्रत्याशी रह गए।
क्या इन तीनों प्रत्याशियों की जीत की आधिकारिक घोषणा हो चुकी है?
नहीं, तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो चुका है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जीत की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है।
कांग्रेस ने पर्चे निरस्त होने पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भीलवाड़ा सहित कई निकायों में प्रशासनिक स्तर पर धांधली हुई और उम्मीदवारों तक समय पर पार्टी सिंबल नहीं पहुंचने दिए गए।
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