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फरीदाबाद में बारिश से बिछी धान की फसल, गेहूं के बाद भारी नुकसान झेलने को मजबूर हुए किसानहरियाणा
15 सित॰ 2026, 6:48 pm (7 दिन पहले)· 0

फरीदाबाद में बारिश से बिछी धान की फसल, गेहूं के बाद भारी नुकसान झेलने को मजबूर हुए किसान

हरियाणा के फरीदाबाद में लगातार हो रही बेमौसम बारिश के कारण धान की तैयार फसल खेतों में बिछ गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बेमौसम और लगातार हो रही बारिश ने अन्नदाताओं के सामने गहरा संकट खड़ा कर दिया है। खेतों में कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी धान की फसल पानी के प्रहार से पूरी तरह बर्बाद हो रही है। इस साल गेहूं की फसल में भारी नुकसान उठाने के बाद, अब धान के भी चौपट होने से किसानों की आर्थिक कमर टूट चुकी है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी पानी में डूब गई है।

गेहूं के बाद अब धान की फसल पर कुदरत का दोहरा प्रहार

फरीदाबाद के किसानों को इस साल मौसम की दोहरी मार झेलनी पड़ी है। इससे पहले जब गेहूं की फसल पककर तैयार होने वाली थी, तब अचानक हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया था। उस समय किसानों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। अब ठीक वैसा ही संकट धान की फसल पर भी मंडरा रहा है। पकने के आखिरी चरण में पहुंच चुकी धान की फसल तेज हवा और भारी पानी के दबाव के कारण खेतों में बिछ गई है, जिससे फसलों के सड़ने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

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डीग गांव के पट्टाधारक किसानों की बढ़ी मुश्किलें

डीग गांव के किसान कुंवरपाल के खेतों में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। कुंवरपाल ने यह जमीन पट्टे यानी किराए पर लेकर खेती की थी, जिससे उन पर कर्ज और खर्च का दोहरा दबाव है। पट्टे पर खेती करने वाले किसानों को फसल हो या न हो, जमीन मालिक को तय किराया देना ही पड़ता है। उनके खेत में खड़ी एक एकड़ धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिससे उन्हें करीब 50 फीसदी का सीधा नुकसान हुआ है। गेहूं के सीजन में लाखों की चोट खाने के बाद, अब किराए की जमीन पर धान की बर्बादी ने उनके सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा कर दिया है।

लागत की मार और पानी में सड़ती धान की फसल

एक अन्य स्थानीय किसान रामबाबू ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि खेतों में पानी जमा होने से फसल सड़ने लगी है। दरअसल, लगभग 15 दिन पहले भी इलाके में मूसलाधार बारिश हुई थी, जिससे खेतों में भारी जलभराव हो गया था। उसके बाद से लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ दिया है। खेतों से पानी की निकासी न होने के कारण फसल का एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबे रहने से सड़ चुका है और अब इस स्थिति में फसल को संभालना पूरी तरह नामुमकिन हो गया है।

रामबाबू के अनुसार, उन्होंने इस बार अपने खेतों में धान की प्रसिद्ध 1509 वैरायटी लगाई थी। एक एकड़ खेत में धान की फसल तैयार करने में बीज, खाद, जुताई, कीटनाशक और सिंचाई मिलाकर लगभग 33,000 रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है। इस भारी लागत के बावजूद उनकी करीब आधी फसल बर्बाद हो चुकी है और एक एकड़ की फसल पूरी तरह अनुपयोगी हो गई है। खेती में लगातार बढ़ रही इनपुट लागत और मौसम के बदलते अनिश्चित मिजाज ने किसानों के लिए जीवनयापन करना बेहद कठिन बना दिया है।

सवाल-जवाब

हाल ही में फरीदाबाद में किस फसल को भारी नुकसान पहुंचा है?
लगातार हो रही भारी बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
इससे पहले इस साल किसानों को किस फसल में नुकसान उठाना पड़ा था?
इससे पहले गेहूं की फसल पकने के समय हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ था।
प्रभावित किसानों ने इस सीजन में धान की कौन सी वैरायटी बोई थी?
किसानों ने इस सीजन में खेतों में धान की प्रसिद्ध 1509 वैरायटी लगाई थी।
एक एकड़ धान की फसल तैयार करने में कितनी लागत आती है?
एक एकड़ धान की फसल को तैयार करने में लगभग 33,000 रुपये का खर्च आता है।
खेतों में धान की फसल सड़ने का मुख्य कारण क्या है?
करीब 15 दिन पहले हुई बारिश के बाद खेतों में पानी जमा हो गया था, और लगातार बारिश के कारण जल निकासी न होने से फसल सड़ गई।
किसानों के अनुसार फसल को लगभग कितने प्रतिशत नुकसान हुआ है?
किसान कुंवरपाल और रामबाबू के अनुसार उनकी फसल को लगभग 50 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ है और एक-एक एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·5 दिन पहले

मौसम की मार और अनिश्चितता ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा वित्तीय संकट बन रही है। गेहूं के बाद अब धान की बर्बादी ने किसानों के नकदी प्रवाह को पूरी तरह ठप कर दिया है। प्रति एकड़ 33,000 रुपये की भारी लागत और पट्टे की देनदारियों के चलते विशेष रूप से किराए पर खेती करने वाले किसानों के लिए कर्ज का चक्र और गहराएगा। इस प्रकार के कृषि नुकसान का सीधा असर त्योहारी सीजन में ग्रामीण खपत, क्रय शक्ति और स्थानीय खाद्य आपूर्ति पर पड़ना तय है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

गेहूं के बाद धान की फसल का बर्बाद होना केवल मौसमी संकट नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान की क्रय शक्ति पर गहरा आघात है। प्रति एकड़ ₹33,000 जैसी भारी लागत और पट्टे के किराए के दोहरे बोझ के बीच फसल का 50% तक नष्ट होना किसानों को गंभीर कर्ज जाल में धकेल सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनिश्चित होता मौसम अब कृषि आय के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन चुका है। ऐसे में समय पर सरकारी मुआवजे और पारदर्शी क्षति आकलन के बिना ग्रामीण बाज़ार में मांग और वित्तीय स्थिरता को बहाल करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

रविकाश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, लगातार दो सत्रों में फसल का यह नुकसान महज एक मौसमी आपदा नहीं, बल्कि एक बड़ी नीतिगत और प्रशासनिक चुनौती है। जब बदलता मौसम ग्रामीण आजीविका पर सीधा प्रहार करता है, तो केवल पारंपरिक राहत उपाय नाकाफी सिद्ध होते हैं। शासन को फसल बीमा दावों के त्वरित भुगतान, पारदर्शी क्षति आकलन और जल निकासी जैसी बुनियादी ढांचागत समस्याओं के हल पर तत्काल ध्यान देना होगा। राजनीतिक-आर्थिक दृष्टिकोण से, यदि लोक नीति ऐसे जलवायु संकटों से निपटने में विफल रहती है, तो यह कृषि संकट ग्रामीण अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

बेमौसम बारिश से फरीदाबाद में धान की फसल का बिछना और जलभराव से सड़ना किसानों पर कुदरत की दोहरी मार है। गेहूं के बाद धान की बर्बादी ने पट्टाधारक और छोटे किसानों की कमर तोड़ दी है, जिससे उनपर कर्ज का भारी बोझ बढ़ गया है और अब उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

इस आपदा का एक गंभीर पहलू यह भी है कि जलभराव और फसल के सड़ने से ग्रामीण इलाकों में आर्थिक तंगी गहराएगी, जिसका सीधा असर स्थानीय बाजार की क्रय शक्ति और कर्ज अदायगी पर पड़ेगा। यदि समय पर गिरदावरी कर उचित मुआवजा और राहत नहीं पहुंचाई गई, तो किसानों में असंतोष बढ़ेगा और वे साहूकारों के कर्ज के दुष्चक्र में और अधिक फंसते चले जाएंगे।

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