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पूर्णिया के पूरण देवी मंदिर तालाब में ब्रह्म मुहूर्त के स्नान और पूजा से निसंतान दंपतियों को मिलती है संतान सुख की आसहिमाचल प्रदेश
11 सित॰ 2026, 9:58 pm (10 दिन पहले)· 0

पूर्णिया के पूरण देवी मंदिर तालाब में ब्रह्म मुहूर्त के स्नान और पूजा से निसंतान दंपतियों को मिलती है संतान सुख की आस

बिहार के पूर्णिया में स्थित माता पूरण देवी मंदिर के प्राचीन तालाब को लेकर धार्मिक मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में नियमपूर्वक स्नान और पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।

भारत में संतान की लालसा रखने वाले दंपति चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह लेने से लेकर आधुनिक विज्ञान की विभिन्न तकनीकों का सहारा लेते हैं। इसके बावजूद, देश की बहुसंख्यक आबादी में ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और आध्यात्मिक उपायों की गहरी परंपरा आज भी बनी हुई है। देश भर के विभिन्न हिस्सों में अनेक ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जिनसे जुड़े चमत्कारों और जनविश्वास की कहानियां पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक बिहार के पूर्णिया जिले में स्थित माता पूरण देवी का सुप्रसिद्ध मंदिर है, जहां का एक प्राचीन तालाब श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।

प्राचीन तालाब से जुड़ी अनूठी धार्मिक मान्यताएं

पूर्णिया शहर का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाने वाला माता पूरण देवी मंदिर केवल अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला या पौराणिक महत्व के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि मंदिर परिसर के भीतर स्थित एक पावन तालाब भी इसकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण है। स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आने वाले भक्तों के अनुसार, इस पवित्र सरोवर में स्नान करने से निसंतान दंपतियों की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है। पौराणिक कथाओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में महादेवी स्थान छोड़ने से पूर्व नियमित रूप से इसी सरोवर में स्नान किया करती थीं। यही वजह है कि आज भी इस जलकुंड को अत्यधिक पवित्र और दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है।

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ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और पूजन का विशेष विधान

मंदिर के पुजारी मनोज कुमार मिश्र ने इस परिसर की महत्ता और पूजा-अर्चना की विशेष प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संतान सुख की कामना रखने वाली महिलाओं और जोड़ों को इस तालाब में स्नान करने के दौरान कुछ विशिष्ट धार्मिक नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। पुजारी मनोज कुमार मिश्र के अनुसार, श्रद्धालु दंपति को सूर्योदय से पूर्व यानी सुबह के ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर परिसर पहुंचना होता है।

सरोवर में विधि-विधान से पवित्र स्नान करने के उपरांत श्रद्धालुओं को अपने पुराने वस्त्र वहीं सरोवर के किनारे ही छोड़ देने की परंपरा है। इसके बाद नए वस्त्र धारण करके भक्त माता पूरण देवी की प्रतिमा के समक्ष उपस्थित होते हैं और भक्ति भाव से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं। पुजारी का कहना है कि पूर्ण निष्ठा और नियमों के साथ की गई इस प्रार्थना के बाद माता रानी निसंतान जोड़ों की सूनी गोद भर देती हैं और आने वाले एक वर्ष के भीतर ही उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

सवाल-जवाब

पूरण देवी मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर बिहार के पूर्णिया शहर में स्थित है और इसे शहर का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है।
मंदिर के तालाब से जुड़ी मुख्य धार्मिक मान्यता क्या है?
मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में इस पवित्र तालाब में स्नान करने और पूजा करने से निसंतान दंपतियों की संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होती है।
तालाब में स्नान करते समय श्रद्धालुओं को किन नियमों का पालन करना होता है?
श्रद्धालुओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना होता है, अपने पुराने वस्त्र तालाब किनारे छोड़ने होते हैं और फिर नए वस्त्र पहनकर माता पूरण देवी की पूजा करनी होती है।
इस मान्यता के अनुसार कितने समय में मनोकामना पूरी होने का विश्वास व्यक्त किया जाता है?
मंदिर परंपरा और स्थानीय विश्वास के अनुसार, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद एक वर्ष के भीतर निसंतान दंपति की मनोकामना पूरी हो जाती है।
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