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राम मंदिर दान घोटाला: संत परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की भूमिका की जांच क्यों मांगीउत्तर प्रदेश
16 जून 2026, 3:49 pm (43 दिन पहले)· 1

राम मंदिर दान घोटाला: संत परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव की भूमिका की जांच क्यों मांगी

अयोध्या राम मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों के चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए SIT बनी है, वहीं तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर ने इसे सोची-समझी साजिश बताते हुए राहुल गांधी और अखिलेश यादव की भूमिका जांचने की मांग की है।

अयोध्या का राम मंदिर इस बार जिस वजह से चर्चा में है, वह देश के लिए असहज करने वाली है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे पर ही कुछ लोगों की नीयत खराब हो गई और अब यह सामने आ रहा है कि मंदिर के दान में बड़ी गड़बड़ी हुई है। मामला उजागर होते ही धार्मिक और राजनीतिक दोनों खेमों में बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर दी है, जिसके बाद संत समाज भी खुलकर सामने आ गया है।

आखिर हुआ क्या है

रामलला के गर्भगृह और दर्शन पथ के पास रखे दानपात्रों से जो नकदी निकाली जाती है, उसे राम जन्मभूमि परिसर के भीतर बने एक 'गोपनीय कक्ष' में पहुंचाया जाता है। सुरक्षा की वजह से इस कमरे का ठीक-ठीक स्थान बेहद गोपनीय रखा जाता है और बाहरी किसी भी व्यक्ति का यहां आना पूरी तरह प्रतिबंधित है। चढ़ावे की गिनती के लिए इस कक्ष में कुल 50 कर्मचारी मौजूद रहते थे। इसी व्यवस्था के बीच हुई चोरी ने सबको हैरान कर दिया है।

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शुरुआती अनुमान चौंकाने वाले हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह चोरी 200 करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है। नोटों की गिनती से जुड़े करीब 50 कर्मचारी इस समय शक के दायरे में हैं। जांच एजेंसियों और पुलिस ने अब तक 5 कर्मचारियों से करीब 2 करोड़ रुपये की नकदी, एक कार और 3 आईफोन बरामद किए हैं।

संत ने उठाई बड़ी साजिश की आशंका

अयोध्या के तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने इस पूरे प्रकरण के पीछे एक बड़ी साजिश की संभावना जताई है। उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इस मामले में इन दोनों नेताओं की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों को बहकाकर या दबाव में लाकर इस तरह की घटना को अंजाम दिलाने की कोशिश की गई, ताकि बाद में राम मंदिर के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।

परमहंस आचार्य ने इसे एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र करार दिया। उनके मुताबिक इसका मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर ट्रस्ट को बदनाम करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामले की जांच अभी चल ही रही है, तब कुछ राजनीतिक नेताओं के बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के दर्शन तक नहीं किए, उन्हें इस घटना की इतनी बारीक जानकारी आखिर कहां से और कैसे मिल गई, यह भी जांच का विषय होना चाहिए।

निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग

संत ने प्रदेश सरकार और जांच एजेंसियों से अपील की कि SIT पूरी तरह निष्पक्ष और हर पहलू को छूने वाली जांच करे। उन्होंने कहा कि अगर पड़ताल में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता उजागर होती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि मामले से जुड़े तमाम संभावित पहलुओं और लगाए गए आरोपों की गहराई से छानबीन हो, ताकि सच्चाई आम जनता के सामने आ सके।

हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अब तक इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम तस्वीर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी। ऐसे में सभी पक्षों के दावों और आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही तय हो सकेगी।

सवाल-जवाब

राम मंदिर दान चोरी कितने रुपये की बताई जा रही है?
शुरुआती अनुमानों के मुताबिक यह चोरी 200 करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है, हालांकि अंतिम आंकड़ा जांच के बाद ही साफ होगा।
अब तक जांच में क्या बरामद हुआ है?
पुलिस और जांच एजेंसियों ने 5 कर्मचारियों से करीब 2 करोड़ रुपये नकद, एक कार और 3 आईफोन बरामद किए हैं।
परमहंस आचार्य ने किन नेताओं पर आरोप लगाए हैं?
उन्होंने सपा मुखिया अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भूमिका की जांच की मांग की है और इसे एक सोची-समझी साजिश बताया है।
मामले की जांच कौन कर रहा है?
प्रदेश सरकार ने जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की है और जांच अभी जारी है।
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