अयोध्या में स्थित राम मंदिर के दानपात्रों से जुड़ी चोरी की घटना की जांच अब एक बेहद अहम और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले के मुख्य आरोपित रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव से 39 घंटे की रिमांड के दौरान गहन और लंबी पूछताछ की है. इस कड़ी पूछताछ के नतीजे जांच एजेंसियों के लिए कई बड़े सुराग लेकर आए हैं. जांच के दौरान न सिर्फ इस पूरी चोरी की कार्यप्रणाली का पर्दाफाश हुआ है, बल्कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं. पूछताछ में आरोपितों ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, प्रमुख सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव सहित कई अहम लोगों का जिक्र किया है. फिलहाल, पुलिस अधिकारी टिन्नू और मनीष द्वारा किए गए इन सभी सनसनीखेज दावों की सत्यता परखने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि अगर रिमांड के दौरान बताई गई ये बातें सबूतों की कसौटी पर खरी उतरती हैं, तो इस पूरे घोटाले में आरोपितों की फेहरिस्त काफी लंबी हो सकती है और कई नए चेहरे बेनकाब हो सकते हैं.
प्रभाव का इस्तेमाल और संगठित गिरोह की तरह काम
जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि दानपात्र से पैसे उड़ाने का यह कृत्य कोई अचानक की गई घटना नहीं थी, बल्कि यह लंबे समय से चल रहा एक सुविचारित खेल था. रिमांड में मिले तथ्यों ने इस बात की पूरी तरह से पुष्टि कर दी है कि यह चोरी एक सुनियोजित और बेहद संगठित गिरोह की शक्ल में संचालित की जा रही थी. पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि टिन्नू इस पूरे रैकेट का सरगना था और चोरी किए गए पैसों का बंटवारा वह अपने रसूख और प्रभाव के आधार पर ही करता था. वह पूरी रकम में से हमेशा सबसे बड़ा हिस्सा अपने पास रखता था. अपने इस लालच को जायज ठहराने के लिए वह बाकी साथियों से कहता था कि उसे यह मोटी रकम ऊपर बैठे लोगों तक पहुंचानी होती है. उसके प्रभाव और रसूख को देखते हुए बाकी सभी आरोपी उसके सामने खामोश रहते थे और बिना कोई सवाल किए उसकी हर बात मान लिया करते थे.
गबन पर नजर रखने के लिए भतीजे की तैनाती
इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली में तब बदलाव आया, जब टिन्नू को अपने ही साथियों पर शक होने लगा. उसे लगने लगा था कि काउंटिंग रूम में बैठे अन्य लोग उसके साथ बेईमानी कर रहे हैं. उसे संदेह था कि वे लोग दानपात्रों से ज्यादा पैसा निकाल रहे हैं और उसे कम रकम की जानकारी देकर अपना हिस्सा बढ़ा रहे हैं. इस धोखेबाजी से बचने और चोरी के पूरे नेटवर्क पर अपना नियंत्रण मजबूत करने के लिए टिन्नू ने तुरंत एक नई चाल चली. उसने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अपने भतीजे मनीष यादव को राम मंदिर में एक गणना कर्मचारी के तौर पर नियुक्त करवा दिया.
मंदिर के अंदर मनीष की जिम्मेदारी सिर्फ श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की गिनती करना नहीं था. असल में वह चोरी से प्राप्त होने वाली पूरी धनराशि का एक तरह से एकाउंटेंट बन गया था. वह इस बात का पूरा बहीखाता और हिसाब-किताब रखता था कि कौन सा व्यक्ति दानपात्र से कितना पैसा निकाल रहा है, किस सदस्य को कितना हिस्सा दिया जाना है, और हर दिन कितनी रकम मंदिर से बाहर निकाली जा रही है. इन सभी बारीकियों पर मनीष की पैनी नजर रहती थी. इस तैनाती के बाद, यह चोरी पहले से कहीं ज्यादा प्लानिंग और एक पेशेवर नेटवर्क की तरह अंजाम दी जाने लगी.
पुलिस के दबाव में टूट गया मुख्य आरोपित
रिमांड के 39 घंटों में पुलिस ने टिन्नू से चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के काम करने के तरीके तथा अलग-अलग मामलों में उनकी भूमिकाओं को लेकर सीधे और तीखे सवाल किए. पूछताछ की शुरुआत में टिन्नू ने पुलिस को चकमा देने की पूरी कोशिश की. वह लगातार हर सवाल का गोलमोल जवाब देता रहा, बात को घुमाता रहा और एक ही सवाल का अलग-अलग समय पर अलग-अलग उत्तर देकर जांच को भटकाने का प्रयास करता रहा. लेकिन पुलिस अधिकारियों ने जल्द ही उसकी इस रणनीति को भांप लिया.
जांच अधिकारियों ने हार नहीं मानी और घंटों तक एक ही विषय पर घुमा-फिराकर अलग-अलग अंदाज में सवाल दागे. जब पुलिस ने टिन्नू के सभी जवाबों का मिलान किया, तो उनमें भारी विरोधाभास देखने को मिला. इसके बाद, पुलिस ने जब इन बदलते बयानों और खामियों को सबूतों के साथ उसके सामने रखा, तो वह भारी दबाव में आ गया. आखिरकार वह टूट गया और उसने मंदिर के वर्किंग सिस्टम और तीनों सदस्यों को लेकर ऐसी कई बातें उजागर कर दीं, जो जांच के लिहाज से बेहद अहम हैं. पुलिस अब इन सभी बयानों का कड़ाई से सत्यापन कर रही है, ताकि इस संगठित अपराध की पूरी तह तक पहुंचा जा सके.



















