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साबरमती रेलवे स्टेशन से रविवार को हरी झंडी दिखाएंगे अमित शाह, जानिए देश की पहली एलएनजी ट्रेन की खूबियांगुजरात
26 सित॰ 2026, 9:15 pm (32 दिन पहले)· 0

साबरमती रेलवे स्टेशन से रविवार को हरी झंडी दिखाएंगे अमित शाह, जानिए देश की पहली एलएनजी ट्रेन की खूबियां

गुजरात के साबरमती स्टेशन से देश की पहली एलएनजी संचालित ट्रेन का शुभारंभ हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस दोहरे ईंधन वाली ट्रेन को रवाना करेंगे, जो रेलवे के खर्च और ईंधन खपत में बड़ी कटौती करेगी।

भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क को पर्यावरण-अनुकूल और वित्तीय रूप से अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में एक नई शुरुआत करने जा रहा है। रविवार को गुजरात स्थित साबरमती रेलवे स्टेशन पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह देश की पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से संचालित होने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह कदम भारतीय रेल की पारंपरिक डीजल ईंधन पर भारी निर्भरता को खत्म करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बड़े पैमाने पर अपनाने के राष्ट्रीय प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ड्राइविंग पावर कार में अत्याधुनिक ड्यूल-फ्यूल प्रणाली

इस परियोजना की सबसे प्रमुख उपलब्धि ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार (DPC) में एलएनजी आधारित ईंधन तंत्र को सफलतापूर्वक स्थापित करना है। भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी यात्री ट्रेन के इंजन को इस तरह के दोहरे ईंधन मोड के साथ तैयार किया गया है। यह नई तकनीक इंजन को एलएनजी और डीजल दोनों का उपयोग करने की सुविधा देती है। यदि मार्ग में एलएनजी की उपलब्धता समाप्त होती है या किसी अन्य कारण से ईंधन बदलने की आवश्यकता पड़ती है, तो यह प्रणाली बिना ट्रेन को रोके या बिना किसी तकनीकी व्यवधान के डीजल पर स्विच हो सकती है।

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1400 HP क्षमता वाले इंजनों पर 2,000 किलोमीटर का कड़ा परीक्षण

इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए 1400 HP क्षमता वाले दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) को चुना गया था, जिन्हें पूरी तरह एलएनजी ड्यूल-फ्यूल सिस्टम में अपग्रेड किया गया। इस तकनीक को औपचारिक सेवा में शामिल करने से पहले रेलवे इंजीनियरों ने कड़ा फील्ड ट्रायल आयोजित किया। पटरियों पर दोनों परिवर्तित DPC के साथ 2,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक परीक्षण किया गया। इस विस्तृत परीक्षण के दौरान ईंधन आपूर्ति की निरंतरता, इंजन का तापमान, खिंचाव क्षमता और विपरीत परिस्थितियों में परिचालन विश्वसनीयता का बारीकी से मूल्यांकन किया गया, जिसमें प्रणाली ने शत-प्रतिशत सफलता दर्ज की।

ईंधन की बचत और वार्षिक 25 लाख रुपये की लागत में कमी

रेलवे परिचालन में डीजल की जगह एलएनजी का उपयोग आर्थिक रूप से अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है। बाजार में एलएनजी की कीमत डीजल की तुलना में काफी कम है, जिसके चलते ट्रेनों का परिचालन खर्च उल्लेखनीय रूप से घट जाएगा। परीक्षण के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि प्रति वर्ष प्रत्येक परिवर्तित DPC पर लगभग 25 लाख रुपये के परिचालन व्यय की सीधी बचत होगी। यदि भविष्य में इस तकनीक को पूरे देश की अन्य डीजल ट्रेनों में लागू किया जाता है, तो इससे रेलवे का वार्षिक बजट काफी हल्का होगा और साथ ही भारत के विदेशी मुद्रा कोष पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

2,200 लीटर का विशेष टैंक और 1600 किलोमीटर की दूरी

इंजन के स्वीकृत डिजाइन के अनुसार, प्रत्येक DPC के भीतर विशेष सुरक्षा मानकों वाला 2,200 लीटर क्षमता का एलएनजी टैंक स्थापित किया गया है। इस विशाल टैंक में एक बार में लगभग 850 से 900 किलोग्राम इस्तेमाल योग्य एलएनजी सुरक्षित रूप से भरी जा सकती है। जब टैंक को पूरी क्षमता के साथ भरा जाता है, तो ट्रेन बिना दोबारा ईंधन लिए लगभग 1600 किलोमीटर तक लगातार फर्राटा भर सकती है। लंबी दूरी तक बिना रुके चलने की यह क्षमता रेलवे को बार-बार डिपो जाकर ईंधन भरने की जरूरत से मुक्ति दिलाएगी, जिससे ट्रेन संचालन की समयबद्धता और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

प्रदर्शन और इंजन क्षमता में पूरी स्थिरता

इंजीनियरों ने इस ड्यूल-फ्यूल प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया है कि पारंपरिक डीजल इंजनों की हॉर्सपावर, गति और खींचने की शक्ति में कोई समझौता न करना पड़े। नई तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद ट्रेन का पिकअप और रफ्तार में कोई गिरावट नहीं आई है। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह एलएनजी आधारित ड्यूल-फ्यूल तकनीक आने वाले समय में देश के रेल नेटवर्क को अधिक टिकाऊ, लागत-कुशल और प्रदूषण-मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

सवाल-जवाब

देश की पहली एलएनजी ट्रेन को हरी झंडी कौन और कहां से दिखाएगा?
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रविवार को गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन का शुभारंभ करेंगे।
एलएनजी ट्रेन का इंजन किस तकनीक पर काम करता है?
यह ट्रेन ड्यूल-फ्यूल तकनीक पर चलती है, जिससे इंजन को एलएनजी और डीजल दोनों ईधंनों से संचालित किया जा सकता है।
ट्रेन में एलएनजी टैंक की क्षमता कितनी है और यह कितनी दूरी तय कर सकती है?
प्रत्येक DPC में 2,200 लीटर क्षमता का टैंक है जिसमें 850 से 900 किलो एलएनजी आती है, जो लगभग 1600 किलोमीटर की यात्रा के लिए पर्याप्त है।
इस नई तकनीक से रेलवे को हर साल कितनी बचत होगी?
परीक्षण आंकड़ों के आधार पर प्रति ड्राइविंग पावर कार (DPC) प्रति वर्ष लगभग 25 लाख रुपये की बचत का अनुमान लगाया गया है।
इस ट्रेन का कितना फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है?
इस तकनीक को हरी झंडी मिलने से पहले 1400 HP क्षमता वाले दो DPC पर 2,000 किलोमीटर से अधिक का सफल मैदानी परीक्षण किया जा चुका है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·32 दिन पहले

हर साल एक इंजन पर पच्चीस लाख रुपये की बचत का आँकड़ा सचमुच बहुत बड़ा है। अगर यह तकनीक पूरे देश में लागू हो गई, तो रेलवे के घाटे को पाटने में वाकई बहुत मदद मिलेगी।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·32 दिन पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी। जिस तरह हमारी फिल्मों के बजट में वीएफएक्स और ग्रीन स्क्रीन पर बेहिसाब खर्च होता है, अगर वैसे ही रेलवे भी इस ग्रीन एनर्जी पर ध्यान दे तो काफी बचत हो सकती है!

Rohan Verma@rohan-verma·32 दिन पहले

डीजल के खर्च से परेशान रेलवे के लिए एलएनजी का यह विकल्प बहुत काम आएगा। अगर उत्तर प्रदेश के व्यस्त रूटों पर भी ऐसी ट्रेनें चल जाएं, तो प्रदूषण और लागत दोनों कम होंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·32 दिन पहले

रोहन, बचत वाली बात तो ठीक है, पर 25 लाख की यह बचत क्या तब बचेगी जब शुरुआत में टैंक और इंजनों को बदलने में इतना खर्चा आ गया होगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 दिन पहले

डीजल से एलएनजी पर स्विच करने वाली ये तकनीक अच्छी तो लग रही है, पर पटरियों पर बिना रुके डीजल पर स्विच होना सुनने में जितना आसान लग रहा है, असल में उतना ही पेचीदा साबित हो सकता है।

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