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सोनभद्र डीएम की नन्ही बेटी को चढ़ी पिता के दफ्तर जाने की जिद, आईएफएस मां ने साझा की खास तस्वीरराजस्थान
20 सित॰ 2026, 10:36 am (5 दिन पहले)· 0

सोनभद्र डीएम की नन्ही बेटी को चढ़ी पिता के दफ्तर जाने की जिद, आईएफएस मां ने साझा की खास तस्वीर

सोनभद्र के डीएम चर्चित गौड़ की नन्ही बेटी जब पिता के कार्यालय जाने के लिए अड़ गई, तो आईएफएस अधिकारी आरुषि मिश्रा ने कलेक्ट्रेट के नेमप्लेट के पास ली गई एक मनमोहक तस्वीर साझा कर दी।

प्रशासनिक सेवाओं की व्यस्त दिनचर्या, निरंतर चलने वाली बैठकों और नीतिगत निर्णयों की भागदौड़ के बीच कई बार ऐसे व्यक्तिगत और आत्मीय पल सामने आते हैं जो जनमानस का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के जिलाधिकारी और उनके प्रशासनिक परिवार से जुड़ा एक ऐसा ही सुखद वाकया इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के युवा आईएएस अधिकारी चर्चित गौड़ की जीवनसंगिनी और भारतीय वन सेवा की अधिकारी आरुषि मिश्रा ने अपनी छोटी बेटी का एक बेहद स्नेहिल पल कैमरे में कैद कर लोगों के सामने रखा है, जो सीधे तौर पर परिवार और काम के सामंजस्य को दर्शाता है।

पिता की कर्मस्थली देखने की बाल जिद और मां का खूबसूरत जवाब

सोनभद्र के कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त एक रोचक स्थिति बनी जब इस प्रशासनिक दंपती की नन्ही बेटी अपने पिता की कार्यस्थली देखने की जिद पर अड़ गई। परिजनों द्वारा काफी समझाने के बावजूद जब बच्ची अपनी बात से पीछे नहीं हटी, तो आखिरकार मां को उसकी मासूम मांग के आगे झुकना पड़ा। आईएफएस अधिकारी आरुषि मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह अपनी बेटी को बाहों में थामे हुए कलेक्ट्रेट के आधिकारिक नेमप्लेट बोर्ड के समक्ष खड़ी दिखाई दे रही हैं। इस बोर्ड पर वर्ष 2015 से लेकर वर्ष 2026 तक सोनभद्र में पदस्थ रहे जिला कलेक्टरों के नाम क्रमानुसार दर्ज हैं।

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इस आधिकारिक सूची के अंतिम छोर पर चर्चित गौड़ का नाम अंकित है, जो 25 अप्रैल 2026 से सोनभद्र के जिला कलेक्टर के तौर पर जिले की बागडोर संभाल रहे हैं। इस तस्वीर के साथ आरुषि ने यह उल्लेख किया कि तमाम जतन करने के बाद भी जब किसी नन्हे बच्चे पर सिर्फ पिता के दफ्तर जाने का जुनून सवार हो जाए, तो अभिभावकों को अंततः उसकी खुशी के आगे समर्पण करना ही पड़ता है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के शीर्ष पर बैठे दंपती की यह सहज मानवीय अभिव्यक्ति आम नागरिकों को भी खूब पसंद आ रही है।

कोटा के कोचिंग क्लास से शुरू हुआ था दोनों का सफर

इस प्रशासनिक दंपती की यात्रा किसी फिल्मी पटकथा की भांति बेहद प्रेरणादायक और रोचक है। मूल रूप से राजस्थान के प्रसिद्ध शैक्षणिक केंद्र कोटा से ताल्लुक रखने वाले चर्चित गौड़ और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की निवासी आरुषि मिश्रा की पहली मुलाकात उसी दौर में हुई थी जब दोनों अपने करियर की बुनियाद रख रहे थे। कोटा में जब आरुषि जेईई मेन की तैयारी में पसीना बहा रही थीं, उसी समय चर्चित भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अध्ययनरत थे। यह प्रारंभिक परिचय समय के साथ एक मजबूत सहचर्य में बदल गया।

इंजीनियरिंग के उच्च अध्ययन के लिए दोनों ने देश के शीर्ष संस्थानों का रुख किया। चर्चित ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में दाखिला लिया, जबकि आरुषि ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से अपना बीटेक पूरा किया। अध्ययन के इन व्यस्त वर्षों के दौरान दोनों का संपर्क और आपसी विश्वास निरंतर प्रगाढ़ होता चला गया। वर्षों की इस अटूट समझ और स्नेह ने अंततः एक नए रिश्ते का रूप लिया और वर्ष 2021 में दोनों ने औपचारिक रूप से दांपत्य सूत्र में बंधने का फैसला किया।

सिविल सेवा में शीर्ष मुकाम और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन

इंजीनियरिंग के प्रतिष्ठित संस्थानों से उपाधि हासिल करने के बाद दोनों मेधावी युवाओं ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। वर्ष 2015 में आईआईटी से स्नातक होने के बाद चर्चित गौड़ ने अपने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और देश भर में 96वीं रैंक हासिल करके उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी बन गए। कम उम्र में बड़े नीतिगत फैसलों और कुशल प्रशासनिक कार्यशैली के लिए चर्चित को विशेष तौर पर पहचाना गया, जिसके चलते उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के जिला कलेक्टर के रूप में भी खासी ख्याति मिली।

दूसरी ओर, आरुषि मिश्रा ने भी अपनी अद्वितीय प्रतिभा का परिचय देते हुए वर्ष 2019 की भारतीय वन सेवा परीक्षा में पूरे देश में दूसरा स्थान हासिल किया। प्रशासनिक करियर के दौरान आरुषि आगरा में नेशनल चंबल सेंचुरी की डायरेक्टर और डीएफओ की महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। वहीं उनके पति चर्चित गौड़ आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। कड़े परिश्रम, उच्च शिक्षा और शीर्ष प्रशासनिक पदों तक पहुंचे इस दंपती की यह पारिवारिक झलक अब प्रशासनिक महकमे में एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।

सवाल-जवाब

सोनभद्र के डीएम चर्चित गौड़ की बेटी की कौन सी तस्वीर वायरल हो रही है?
उनकी पत्नी आईएफएस आरुषि मिश्रा ने अपनी बेटी को गोद में लिए सोनभद्र कलेक्ट्रेट के नेमप्लेट बोर्ड के पास की एक तस्वीर साझा की है, जहां पिता के नाम के आगे वे दोनों खड़ी हैं।
चर्चित गौड़ ने सोनभद्र के जिला कलेक्टर का पदभार कब संभाला?
चर्चित गौड़ 25 अप्रैल 2026 से सोनभद्र के जिला कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
चर्चित गौड़ और आरुषि मिश्रा की पहली मुलाकात कहां हुई थी?
दोनों की पहली मुलाकात राजस्थान के कोटा में हुई थी जब आरुषि जेईई मेन और चर्चित भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।
दोनों अधिकारियों ने अपनी उच्च शिक्षा किन संस्थानों से पूरी की?
चर्चित गौड़ ने आईआईटी दिल्ली से और आरुषि मिश्रा ने आईआईटी रुड़की से बीटेक की डिग्री हासिल की है।
यूपीएससी परीक्षा में इन दोनों की क्या रैंक रही थी?
चर्चित गौड़ ने 2015 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 96वीं रैंक हासिल की थी, जबकि आरुषि मिश्रा ने 2019 की भारतीय वन सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया दूसरी रैंक प्राप्त की थी।
आरुषि मिश्रा पूर्व में किन महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं?
आरुषि मिश्रा आगरा में नेशनल चंबल सेंचुरी की डायरेक्टर और डीएफओ के पद पर कार्य कर चुकी हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·4 दिन पहले

वैश्विक शासन और प्रशासनिक संस्कृति के दृष्टिकोण से देखें तो शीर्ष सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती रहता है। ऐसे मानवीय और सहज पलों का सार्वजनिक होना नौकरशाही और आम नागरिकों के बीच की दूरी को कम करता है। आधुनिक लोक सेवा में यह प्रवृत्ति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सत्ता का मानवीय चेहरा सामने आता है और शासन प्रणाली के प्रति जनता का विश्वास और आत्मीयता बढ़ती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

प्रशासनिक शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों की यह मानवीय झलक शासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज के डिजिटल दौर में, नौकरशाही का यह अनौपचारिक और संवेदनशील पक्ष जनसामान्य में प्रशासनिक तंत्र के प्रति विश्वास और जुड़ाव को मजबूत करता है। जब उच्च स्तर पर कार्यरत अधिकारी कार्य-जीवन संतुलन को सहजता से साझा करते हैं, तो यह लोक सेवा की एक मानवीय और सुलभ छवि का निर्माण करता है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अर्जुन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना महत्वपूर्ण है कि आधुनिक प्रशासनिक नेतृत्व किस प्रकार संस्थागत संवाद की परिभाषा बदल रहा है। आज का युवा अधिकारी वर्ग सोशल मीडिया का उपयोग केवल नीतिगत सूचनाओं के प्रसार के लिए नहीं, बल्कि सहज प्रामाणिकता प्रदर्शित करने के लिए भी कर रहा है। बिना किसी औपचारिक पीआर अभियान के, ऐसे आत्मीय क्षण नागरिकों के साथ एक मजबूत सामाजिक विश्वास और संवाद का निर्माण करते हैं। कार्य-जीवन संतुलन की यह सहज स्वीकार्यता सार्वजनिक संस्थानों के प्रति जनमानस के दृष्टिकोण को अधिक सुलभ और आधुनिक बनाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

प्रशासनिक प्रमुख और जिला मजिस्ट्रेट का पद सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था, जनसुरक्षा और आपराधिक नियंत्रण की समीक्षा से जुड़ा होता है। 24 घंटे की तनावपूर्ण पुलिस समन्वय और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारियों के बीच अधिकारियों का यह मानवीय पहलू प्रशासनिक छवि को आम जनता के करीब लाता है। हालांकि, सोनभद्र जैसे संवेदनशील जिले में, जहां सुरक्षा और कानून प्रवर्तन चुनौतियां अहम हैं, जनसामान्य का भरोसा अंततः इस बात पर निर्भर करता है कि कलेक्टरेट का यह शीर्ष नेतृत्व अपराध नियंत्रण और न्याय प्रणाली को कितनी तत्परता से संचालित करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

करण की बात बिल्कुल सही है। सोनभद्र जैसे सीमावर्ती, औद्योगिक और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध जिले में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ भूमि विवादों और जन कल्याणकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन की दोहरी चुनौती होती है। ऐसे पारिवारिक और संवेदनशील पल निश्चित रूप से आम नागरिकों और शीर्ष अफसरों के बीच की दूरी को मिटाकर नौकरशाही का एक मानवीय चेहरा पेश करते हैं। हालांकि, ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव से साफ है कि ज़मीन पर जनता का स्थायी भरोसा कलेक्ट्रेट में नियमित जनसुनवाई, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और नीतिगत फैसलों के ज़मीनी असर से ही बनता है। इस मानवीय जुड़ाव को अगर मजबूत फील्ड गवर्नेंस का समर्थन मिलता है, तो यह जिले में प्रशासनिक साख को नई ऊंचाई देगा।

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