भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश की हवाई रक्षा क्षमताओं और भावी सामरिक प्राथमिकताओं को लेकर एक अहम रणनीतिक रुख सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए परियोजना में किसी भी प्रकार का विलंब देखने को मिलता है, तो उससे पैदा होने वाले संचालन संबंधी शून्य को भरने के लिए भारतीय वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के विदेशी फाइटर जेट्स के विकल्पों का गंभीरता से मूल्यांकन करना होगा। उनका कहना है कि जब सीमा पार पड़ोसी और प्रतिद्वंद्वी देश अपनी वायु सेनाओं में उन्नत पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात कर रहे हों, तब भारत किसी भी सूरत में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को कमजोर नहीं पड़ने दे सकता।
विदेशी लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव और खरीद पर अंतिम निर्णय
रूस की ओर से सुखोई-57 और चेकमेट जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों की संभावित पेशकश से संबंधित सवालों पर बात करते हुए एयर चीफ मार्शल ने वस्तुस्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि मॉस्को की तरफ से इस संबंध में लगातार प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं, परंतु अब तक न तो वायुसेना और न ही केंद्र सरकार ने किसी विशिष्ट विदेशी प्लेटफॉर्म के चयन पर कोई अंतिम मुहर लगाई है। किसी भी विदेशी लड़ाकू जेट को बेड़े में शामिल करने की अंतिम मंजूरी रक्षा मंत्रालय और सरकार के समग्र रणनीतिक मूल्यांकन के आधार पर ही तय होगी। वायुसेना का मुख्य ध्यान हर परिस्थिति में अपनी स्क्वाड्रन संख्या और हवाई सीमा पर सामरिक बढ़त को पूरी तरह बरकरार रखने पर केंद्रित है।
फ्लाईदुबई प्रकरण में पायलट के साहस की सराहना
एक अन्य संदर्भ में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने फ्लाईदुबई की घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया, लेकिन साथ ही उस स्थिति में भारतीय पायलट द्वारा दिखाई गई तत्परता और मानसिक दृढ़ता की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पायलट ने जिस असाधारण सूझबूझ, शारीरिक क्षमता और मानसिक संतुलन का परिचय दिया, उस पर प्रत्येक भारतीय नागरिक को गर्व होना चाहिए। यह घटना भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी प्रदान करती है, हालांकि भारतीय वायुसेना के आंतरिक माहौल में इस प्रकार की घटनाओं की आशंका फिलहाल नजर नहीं आती।
सशस्त्र बलों की कार्यप्रणाली और आंतरिक निगरानी तंत्र
सशस्त्र बलों के आंतरिक वातावरण पर विस्तार से चर्चा करते हुए वायुसेना प्रमुख ने रेखांकित किया कि रक्षा सेवाओं के जवान और अधिकारी वर्षों तक एक साथ सेवा करते हैं, जिससे उनके बीच आपसी तालमेल और गहरी पहचान बन जाती है। इस नजदीकी जुड़ाव का लाभ यह है कि यदि कोई सहकर्मी अपने स्वाभाविक आचरण से विचलित होता है या किसी अनुचित दिशा में कदम बढ़ाता है, तो उसकी तुरंत पहचान हो जाती है। समय रहते असामान्य बदलावों को भांप लेने की इसी मजबूत व्यवस्था के चलते गलत प्रभाव में आने वाले या अनुचित मार्ग पर जाने वाले कर्मियों को वक्त रहते चिन्हित कर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।





















