केंद्र सरकार का फैसला: मेहता को फिर सौंपी जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने तुषार मेहता को भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में अगले तीन साल के लिए बरकरार रखने का निर्णय किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति यानी एसीसी ने इस प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी दे दी है।
नया कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से शुरू होगा या फिर अगले आधिकारिक आदेश तक लागू रहेगा, जो भी पहले हो। इस तरह मेहता देश के दूसरे सर्वोच्च विधि अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं जारी रखेंगे।
2018 से शुरू हुई यात्रा का तीसरा पड़ाव
तुषार मेहता को पहली बार अक्टूबर 2018 में सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में काम कर चुके थे। इसके बाद 1 जुलाई 2020 से उनका तीन साल का नया कार्यकाल शुरू किया गया और 2023 में एक बार फिर उन्हें इसी पद पर बनाए रखा गया।
इस तीसरी पुनर्नियुक्ति के साथ नए कार्यकाल की शुरुआत होते-होते मेहता इस पद पर करीब आठ साल पूरे कर चुके होंगे। नए कार्यकाल के अंत तक उनकी कुल सेवा 11 साल तक पहुंच जाएगी, जो उन्हें देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सॉलिसिटर जनरल रहने वाले विधि अधिकारियों में से एक बना देगी।
सर्वोच्च न्यायालय से उच्च न्यायालयों तक सरकार की पैरवी
सॉलिसिटर जनरल के रूप में तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय और देशभर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में केंद्र सरकार का पक्ष रखा है। इनमें संविधान से जुड़े जटिल सवाल, नीतिगत विवाद और संवेदनशील आपराधिक मुकदमे सभी शामिल रहे हैं।
पांच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों की भी हुई पुनर्नियुक्ति
एसीसी ने इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के लिए पांच अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलों (एएसजी) को भी तीन साल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी है।
- विक्रमजीत बनर्जी और केएम नटराज की नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी।
- एसवी राजू, एन वेंकटरामन और ऐश्वर्या भाटी की नियुक्ति 30 जून 2026 से लागू होगी।













