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विदेश से 92 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालयदिल्ली
24 अक्तू॰ 2026, 11:00 pm (5 दिन पहले)· 3

विदेश से 92 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय

डिजिटल मीडिया संस्थान न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच रद्द करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

डिजिटल समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक (NewsClick) और उसके संस्थापक तथा मुख्य संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से जुड़े संदिग्ध विदेशी फंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है. केंद्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज आपराधिक प्राथमिकी (एफआईआर) और उससे जुड़ी ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की कार्यवाही को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया था. वित्तीय जांच एजेंसी का दावा है कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत बेहद महत्वपूर्ण सबूतों और मुख्य तर्कों का गहराई से मूल्यांकन नहीं किया है.

हाईकोर्ट के राहत भरे फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील

प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के रुख पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. जांच एजेंसी ने सर्वोच्च अदालत से गुहार लगाई है कि उच्च न्यायालय के फैसले पर तुरंत रोक लगाई जाए और निरस्त की गई जांच प्रक्रिया को फिर से बहाल करने की अनुमति दी जाए. ईडी का मानना है कि हाईकोर्ट ने रिट याचिका पर फैसला सुनाते समय मामले के तथ्यों और कानूनी बारीकियों का ऐसा समय पूर्व मूल्यांकन कर दिया, जिससे एजेंसी के पास उपलब्ध वृहद साक्ष्यों की पूरी तरह अनदेखी हो गई. केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, हाईकोर्ट का यह दृष्टिकोण गंभीर आर्थिक अपराधों की निष्पक्ष जांच के स्थापित मानकों के अनुकूल नहीं है.

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एफआईआर का दायरा और 2020 की कानूनी कार्रवाई

इस पूरे विवाद की कानूनी शुरुआत दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा 26 अगस्त 2020 को दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी. यह मामला न्यूज़क्लिक का संचालन करने वाली मूल कंपनी पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दर्ज किया गया था. पुलिस ने अपनी जांच में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप लगाए थे. इन धाराओं के आधार पर ही बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी समानांतर मनी लॉन्ड्रिंग जांच (ईसीआईआर) शुरू की थी, ताकि विदेश से आई रकम की वास्तविक प्रकृति और उसके इस्तेमाल की मंशा को उजागर किया जा सके.

विदेशी निवेश, शेयर दर और चीनी जुड़ाव के आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2018 के दौरान पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को अमेरिका स्थित एक विदेशी संस्था से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में ₹9.60 करोड़ (जिन्हें विभिन्न दस्तावेजों में 9.59 करोड़ रुपये भी दर्शाया गया है) प्राप्त हुए थे. इस विदेशी फंड के बदले कंपनी ने अपने शेयर अत्यधिक ऊंची दर यानी 11,500 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से जारी किए थे. ईडी ने आरोप लगाया है कि इतनी अधिक कीमत पर शेयर जारी करने की प्रक्रिया सामान्य व्यावसायिक गणित से मेल नहीं खाती. एजेंसी का कहना है कि यह पूरा लेन-देन अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और इसके जरिए देश में विचार-प्रचार और राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था.

प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष: सबूत और कानूनी दलीलें

सर्वोच्च अदालत के समक्ष अपनी याचिका में ईडी ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के समक्ष दिए गए बयानों, इलेक्ट्रॉनिक ईमेल संदेशों और वित्तीय हस्तांतरण के कागजात से विदेशी फंडिंग के पीछे की व्यापक साजिश उजागर होती है. ईडी ने यह प्रमुख कानूनी दलील दी कि धोखाधड़ी के किसी भी मामले की जांच केवल इसलिए बंद नहीं की जा सकती कि कथित निवेशक ने स्वयं नुकसान या ठगी की शिकायत दर्ज नहीं कराई है. एजेंसी के अनुसार, जब सरकारी या सार्वजनिक प्राधिकरणों के सामने तथ्यों का गलत विवरण प्रस्तुत किया जाता है और नियमों को दरकिनार कर विदेशी पूंजी लाई जाती है, तो यह कानून का गंभीर उल्लंघन है जिसकी जांच होनी आवश्यक है.

92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम और साकेत संपत्ति का विवाद

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अलावा, जांच एजेंसियों का ध्यान न्यूज़क्लिक को मिली करीब 92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी धनराशि पर भी है. ईडी का आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि को सेवाओं के निर्यात (एक्सपोर्ट ऑफ सर्विसेज) के बदले भुगतान के रूप में दिखाया गया था. हालांकि, जांच के दौरान यह पाया गया कि जिन सेवाओं का दावा किया जा रहा था, उनके वास्तविक अस्तित्व और उससे संबंधित दस्तावेजों पर गंभीर सवाल हैं. इतना ही नहीं, वित्तीय जांच एजेंसी का दावा है कि इस कथित विदेशी धन के एक हिस्से का इस्तेमाल प्रबीर पुरकायस्थ द्वारा दिल्ली के साकेत क्षेत्र में स्थित एक रिहायशी फ्लैट खरीदने में किया गया. इसी आधार पर ईडी ने करीब 4.93 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई भी की थी.

दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणियां और निरस्तीकरण का आधार

दूसरी तरफ, 29 मई 2026 को इस मामले पर निर्णय सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने न्यूज़क्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था. उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में रेखांकित किया था कि यदि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को उनके पूर्ण रूप में सही मान भी लिया जाए, तब भी आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी या धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के मूलभूत कानूनी मापदंड पूरा नहीं होते हैं. हाईकोर्ट के इसी निष्कर्ष के बाद ईओडब्ल्यू की मूल एफआईआर और उससे जुड़ी ईडी की पूरी मनी लॉन्ड्रिंग जांच निरस्त कर दी गई थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

सवाल-जवाब

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या अर्जी दी है?
ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करने की मांग की है जिसने न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक के खिलाफ एफआईआर और मनी लॉन्ड्रिंग जांच को खारिज कर दिया था.
न्यूज़क्लिक के खिलाफ मुख्य आरोप क्या हैं?
संस्थान पर 9.59 करोड़ रुपये के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और 92 करोड़ रुपये की अतिरिक्त विदेशी रकम प्राप्त करने तथा नियमों के उल्लंघन का आरोप है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामला क्यों खारिज किया था?
हाईकोर्ट ने पाया कि उपलब्ध दस्तावेजों और आरोपों से भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात के आवश्यक कानूनी तत्व सिद्ध नहीं होते.
इस मामले में नेविल रॉय सिंघम की क्या भूमिका बताई गई है?
जांच एजेंसियों का दावा है कि न्यूज़क्लिक को मिला विदेशी फंड अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम से जुड़ी संस्थाओं के नेटवर्क से आया था.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·5 दिन पहले

शेयरों के दाम तय करने में गणित और बाजार का खेल अजीब है, जब तक पूरी पारदर्शिता न हो, संदेह तो रहेगा ही।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

हाई कोर्ट के फैसले के बाद ईडी का सुप्रीम कोर्ट जाना कोई हैरानी की बात नहीं है, पर क्या वाकई इस विदेशी फंडिंग में इतनी बड़ी गड़बड़ी थी जितनी बताई जा रही है?

Rohan Gupta@rohan-gupta·5 दिन पहले

अर्जुन भाई, विदेशी फंडिंग और शेयर के दाम वाला चक्कर देखकर मुझे वो पुराना स्टार्टअप याद आ गया जहाँ मैं पहले काम करता था, वहाँ भी एक विदेशी क्लाइंट के साथ पैसों के लेन-देन को लेकर महीनों तक सीए और वकीलों के चक्कर काटने पड़े थे।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

जब मैं दिल्ली में उन दिनों ग्राउंड पर था, तब विदेशी फंड और शेयर की इन गड़बड़ियों को लेकर बड़ी चर्चाएं थीं। अब सुप्रीम कोर्ट जाने से साफ है कि मामला अभी लंबा चलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

रोहन भाई, ग्राउंड पर जो चर्चाएं थीं, वो अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में पहुंच गई हैं। मामला वाकई गंभीर है और इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाला।

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