मुर्शिदाबाद में बीजेपी कार्यकर्ताओं को डंडे से पीटने और हड्डियां तोड़ने की खुलेआम धमकी देने वाले हुमायूं कबीर सोमवार को अचानक बेहद शांत नजर आए। विधानसभा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जैसे ही उन पर सीधा निशाना साधा, उनका लहजा और भाषा दोनों पलटे। सदन से बाहर निकलते ही वे कहने लगे कि बीजेपी के खिलाफ उनका कोई बयान था ही नहीं।
26 जून को मुर्शिदाबाद में क्या हुआ था
26 जून को मुर्शिदाबाद में एक कार्यकर्ता सम्मेलन में हुमायूं कबीर ने अत्यंत भड़काऊ भाषण दिया था। उन्होंने बीजेपी को "सैटा भांगा" करने, यानी डंडे से पीटने और हड्डियां तोड़ने की खुली चेतावनी दी। साथ ही कहा कि जिस दिन उनकी सीमा पार होगी और दिमाग गर्म होगा, उस दिन वे एसपी या किसी बड़े अफसर की परवाह नहीं करेंगे। इसके अलावा वे मुर्शिदाबाद के शक्तिपुर इलाके में जाकर पुलिस को भी सीधे धमकी दे आए थे। इन्हीं आपत्तिजनक बयानों को लेकर सोमवार को विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ।
विधानसभा में सुवेंदु अधिकारी की कड़ी फटकार
सोमवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कमजोर नेतृत्व का फायदा उठाकर हुमायूं ने जो मन में आया, वह बोलते रहे। सुवेंदु ने साफ कहा कि इतनी बड़ी ताकत किसी ने हुमायूं को नहीं दी है।
इसके साथ ही सुवेंदु अधिकारी ने हुमायूं के दो एजेंडे भी सबके सामने रख दिए। पहला एजेंडा था कि भरतपुर, नौदा और रेजीनगर की सभी पंचायतों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करना, जो अब तक संभव नहीं हो पाया। दूसरा एजेंडा यह है कि हुमायूं दो सीटों से जीते थे और नियमों के तहत रेजीनगर से इस्तीफा देकर वहां उपचुनाव में अपने बेटे को जिताना चाहते हैं। सुवेंदु ने आरोप लगाया कि इन्हीं मकसदों के लिए हुमायूं भड़काऊ भाषण देकर मुस्लिम वोट एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने हुमायूं को खुली चेतावनी देते हुए कहा, "कान खोलकर सुन लीजिए, मैं आपको इस तरह की धमकियां देने और बेलगाम बातें करने की इजाजत नहीं दूंगा। इनफ इज इनफ, अब बहुत हो गया। अब सबक सिखाने का समय आ गया है।"
सुवेंदु की बात सुनते ही पलटे हुमायूं
विधानसभा से बाहर आते ही हुमायूं कबीर का सुर एकदम नरम हो गया। उन्होंने कहा कि बीजेपी के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से उनका कोई आक्रोश नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून अपना काम करेगा, वे कानून से ऊपर नहीं हैं और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है।
27 और 7 मामलों का दिया हवाला
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए हुमायूं कबीर ने पुराने मामलों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सीपीएम के 34 साल के शासनकाल में उन पर 27 मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन एक भी मामले में यह साबित नहीं हो पाया कि वे अपराधी हैं और सभी में उन्हें क्लीनचिट मिली। टीएमसी के शासन में भी उनके नाम पर 7 मामले दर्ज हुए और उनमें भी यह साबित नहीं किया जा सका कि हुमायूं कबीर कोई गुंडागर्दी करते हैं या किसी पर जुल्म ढाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा प्रशासन भी उनके खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं कर पाएगा।
बयान पर सफाई, बोले यह बीजेपी के खिलाफ नहीं था
अपने विवादित मुर्शिदाबाद भाषण पर सफाई देते हुए हुमायूं ने कहा कि जो गुंडे पहले ममता बनर्जी की छत्रछाया में उन पर हमला करते थे, उन्हें अब पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। उनके मुताबिक लोकतंत्र में यह स्थिति बेहद खतरनाक है। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने बस यही कहा था कि अगर थाने टीएमसी के गुंडों और मवालियों को पनाह देते रहेंगे तो टकराव तय है, और इस मामले में वे कोई समझौता नहीं करेंगे। हुमायूं ने स्पष्ट किया कि यह बयान व्यक्तिगत रूप से बीजेपी में किसी के खिलाफ या मौजूदा सत्ताधारी दल के खिलाफ नहीं था।













