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यमुनानगर के पंजेटो गांव में कोहराम: रूस-यूक्रेन युद्ध में मर्चेंट नेवी कर्मचारी गुरप्रीत सिंह की मौत, परिवार ने की मदद की गुहारहरियाणा
22 जुल॰ 2026, 4:02 pm (62 दिन पहले)· 0

यमुनानगर के पंजेटो गांव में कोहराम: रूस-यूक्रेन युद्ध में मर्चेंट नेवी कर्मचारी गुरप्रीत सिंह की मौत, परिवार ने की मदद की गुहार

हरियाणा के यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव के रहने वाले मर्चेंट नेवी कर्मचारी गुरप्रीत सिंह की युद्धग्रस्त क्षेत्र में हुए एक मिसाइल हमले में दर्दनाक मौत हो गई है। परिवार के इकलौते सहारे के छिन जाने के बाद परिजनों ने केंद्र सरकार से शव वापसी और मुआवजे की गुहार लगाई है।

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध का असर अब भारत के छोटे गांवों तक पहुंचने लगा है। इसी खूनी संघर्ष की चपेट में आकर हरियाणा के एक होनहार युवक ने अपनी जान गंवा दी है। बीती 20 जुलाई को युद्धग्रस्त इलाके में एक भारतीय जहाज पर हुए अचानक मिसाइल हमले में चार भारतीय नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई। इन मृतकों में यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव के रहने वाले गुरप्रीत सिंह भी शामिल हैं। गुरप्रीत अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और परिवार की पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। इस मार्मिक घटना ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में निर्दोष कामगारों को कितनी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। रोजगार की तलाश में सात समंदर पार गए एक होनहार युवक की मौत से हर कोई सन्न है।

परिवार का इकलौता सहारा छिना

गुरप्रीत सिंह का जीवन भारी जिम्मेदारियों और संघर्षों से भरा था और वे अपने परिवार को एक बेहतर भविष्य देने की जद्दोजहद में लगे हुए थे। परिवार वालों के मुताबिक, गुरप्रीत ने महज डेढ़ महीने पहले ही मर्चेंट नेवी में अपनी नई नौकरी ज्वाइन की थी। नौकरी के सिलसिले में वे विदेश गए थे, ताकि अच्छी कमाई करके घर के आर्थिक हालात को सुधार सकें। उनके पिता कीर्तन सिंह तीन साल पहले एक भयानक हादसे का शिकार हो गए थे, जिसके कारण वे पूरी तरह से दिव्यांग हो गए। पिता के काम करने में अक्षम होने के बाद से ही घर का पूरा खर्च और जिम्मेदारियां अकेले गुरप्रीत के कंधों पर आ गई थीं। गुरप्रीत की शादी को अभी मुश्किल से डेढ़ साल ही बीता था और उनका एक छह महीने का छोटा सा बेटा भी है। अब इस मासूम बच्चे के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है। घर में अब गुरप्रीत की युवा पत्नी, छोटा बच्चा, बुजुर्ग मां और दिव्यांग पिता बिल्कुल बेसहारा छूट गए हैं।

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पंजेटो गांव में पसरा मातम

जैसे ही गुरप्रीत की मौत की मनहूस खबर उनके पैतृक गांव पंजेटो पहुंची, वहां मातम का सन्नाटा पसर गया। परिवार के घर में कोहराम मच गया और चारों तरफ चीख-पुकार सुनाई देने लगी। बेटे के हमेशा के लिए चले जाने की खबर सुनकर बुजुर्ग मां और युवा पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार बेसुध हो रही हैं। गांव का हर वह शख्स, जो गुरप्रीत को जानता था, उसकी आंखें नम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गुरप्रीत बहुत ही होनहार और जिम्मेदार युवक था, जिसने बहुत कम उम्र में अपने परिवार की बागडोर संभाल ली थी। एक पिता जिसने अपने जवान बेटे को एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए विदेश भेजा था, अब उसकी मौत की खबर सुनकर पूरी तरह से टूट चुका है। पूरा गांव इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

केंद्र सरकार से शव वापसी और मुआवजे की मांग

इस अपूरणीय क्षति के बाद, अब गुरप्रीत के बेबस पिता कीर्तन सिंह ने भारत की केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उनकी सबसे पहली और प्रमुख मांग यही है कि उनके बेटे गुरप्रीत का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से भारत वापस लाया जाए, ताकि पूरा परिवार और गांव वाले पूरे हिंदू रीति-रिवाज और सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कर सकें। इसके साथ ही, परिवार के सामने रोजी-रोटी का जो भयंकर संकट खड़ा हो गया है, उसे देखते हुए पिता ने सरकार से मांग की है कि उन्हें एक उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए। भविष्य में परिवार का भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सरकार से यह भी अपील की है कि पीड़ित परिवार के किसी एक सदस्य को तुरंत सरकारी नौकरी प्रदान की जाए। अब पूरे यमुनानगर जिले और पंजेटो गांव के लोगों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि इस दुख की अत्यंत कठिन घड़ी में इस पीड़ित परिवार को कितनी जल्दी और किस तरह की सहायता मुहैया कराई जाती है।

सवाल-जवाब

गुरप्रीत सिंह की मौत कैसे हुई?
बीती 20 जुलाई को युद्धग्रस्त क्षेत्र में एक भारतीय जहाज पर हुए मिसाइल हमले में गुरप्रीत सिंह की मौत हो गई।
गुरप्रीत सिंह हरियाणा में कहां के रहने वाले थे?
वे हरियाणा के यमुनानगर जिले के पंजेटो गांव के निवासी थे।
गुरप्रीत सिंह क्या काम करते थे?
वे मर्चेंट नेवी में काम करते थे और लगभग डेढ़ महीने पहले ही अपनी नई नौकरी के लिए विदेश गए थे।
पीड़ित परिवार ने सरकार से क्या मांग की है?
परिवार ने गुरप्रीत का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने, उचित आर्थिक मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
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