पंजाब में आगामी चुनावी सरगर्मियों के बीच नशा उन्मूलन के मसले पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। राहुल गांधी का कहना है कि सूबे की जनता ने सत्ताधारी दल और मुख्यमंत्री पर बड़े भरोसे के साथ जनादेश सौंपा था, लेकिन नशा मुक्त पंजाब बनाने का दावा धरातल पर खरा नहीं उतर पाया है।
राहुल गांधी ने उठाए तीखे सवाल
सोशल मीडिया मंच पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने सत्ताधारी दल के पुराने चुनावी संकल्पों की याद दिलाई। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि जिस नशा मुक्ति के वादे पर सरकार बनी थी, वह किस इलाके में पूरी तरह लागू हो पाई है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि राज्य को एक ऐसे मुख्यमंत्री की जरूरत है जो जनता के दर्द को समझे, नशीले पदार्थों के फैलाव के खिलाफ मजबूती से मोर्चा संभाले और नौजवानों की आने वाली पीढ़ी को इस दलदल से बाहर निकाले। राहुल गांधी के अनुसार यह मसला सामान्य राजनीतिक नोकझोंक का नहीं, बल्कि राज्य की समूची युवा पीढ़ी के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
चुनावी तैयारियों के बीच नशा बना केंद्रीय मुद्दा
पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां तैयार करने में जुटे हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में ही अगला चुनाव लड़ने का ऐलान किया है और पार्टी की तरफ से जारी की गई पहली सूची में 40 मौजूदा विधायकों को दोबारा मैदान में उतारा गया है। इसमें खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान की धूरी सीट भी शामिल है, जहां से वे दोबारा किस्मत आजमाने जा रहे हैं। इसके अलावा कानूनी मामलों में बंद पार्टी विधायक संजीव अरोड़ा को भी टिकट देकर दोबारा चुनावी दौड़ में बनाए रखा गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पांच साल के कार्यकाल के बाद भी नशे की गंभीर समस्या वैसी की वैसी बनी हुई है, जबकि मान सरकार अपनी प्रशासनिक पहलों और व्यापारी वर्ग के लिए लाई गई ओटीएस स्कीम से 111.16 करोड़ रुपये की वसूली जैसी उपलब्धियों को सामने रख रही है।
विपक्ष के लगातार आरोप और सरकार की सफाई
नशे के मसले पर सरकार को पहले भी विभिन्न विवादों और विपक्षी हमलों का सामना करना पड़ा है। पूर्व में भी विरोधी दलों की ओर से प्रशासनिक गंभीरता और व्यक्तिगत आचरण को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, जिस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ प्रसारित की जाने वाली संदिग्ध वीडियो सामग्री में वे खुद मौजूद नहीं हैं और यह केवल उनकी छवि बिगाड़ने की साजिश है। मुख्यमंत्री का लगातार कहना रहा है कि उनके लिए राजनीति जनसेवा का साधन है जिसे वे पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं। वहीं पार्टी के भीतर भी मतभेदों की सुगबुगाहट सामने आई थी, जब सांसद राघव चड्ढा ने राज्य प्रशासन पर बदले की भावना से काम करने और खुद को अगला निशाना बनाए जाने की आशंका जताई थी।
पंजाब का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व
पंजाब दक्षिण एशिया का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध क्षेत्र है, जो पश्चिमोत्तर भारत और पूर्वी पाकिस्तान के भूभाग में फैला हुआ है। इसका नामकरण फारसी भाषा के दो शब्दों 'पंज' अर्थात पांच और 'आब' यानी पानी या जल से मिलकर हुआ है। यह भूभाग पांच प्रमुख नदियों झेलम, चेनाब, रावी, व्यास और सतलज के उपजाऊ मैदानों से पहचाना जाता है। प्राचीन काल में इसे सप्तसिंधु कहा जाता था, जहां सिंधु घाटी और वैदिक संस्कृति फली-फूली। भारत में प्रवेश करने वाले कई ऐतिहासिक अभियान इसी क्षेत्र से होकर गुजरे, जिससे इस राज्य का भारत के सामाजिक, रणनीतिक और राजनीतिक परिदृश्य में सदैव निर्णायक स्थान रहा है।
जनता की मिलीजुली प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के इस बयान के बाद डिजिटल मंचों पर आम नागरिकों और राजनीतिक समर्थकों की तरह-तरह की राय देखने को मिली। कुछ लोगों ने उनके तर्कों का समर्थन करते हुए राज्य में रोजगार, उद्योग और नशा मुक्ति के लिए ठोस रोडमैप की मांग दोहराई, जबकि अन्य लोगों ने पुरानी सरकारों के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए और अन्य राजनीतिक विकल्पों पर बहस छेड़ दी।


























