संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आमने-सामने की खुली बहस कराने की मांग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर देश के युवाओं को संबोधित करते हुए एक जनमत सर्वेक्षण शुरू किया और पूछा कि क्या वे दोनों नेताओं के बीच ऐसी बहस देखना चाहते हैं। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
राहुल गांधी ने वरिष्ठ मंत्रियों से की अपील
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी ने देश के युवाओं से सीधा सवाल करने के अलावा बीजेपी के शीर्ष नेताओं को भी शामिल किया। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री के शुभचिंतक हैं, इसलिए उन्हें इस बहस में शामिल होने के लिए मनाएं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि 24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रधानमंत्री की ओर से इस चुनौती का कोई सीधा जवाब नहीं आया है। इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री विदेशी मदद के बल पर पद पर पहुंचे हैं, जिसे लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया था।
गृह मंत्री और बीजेपी नेताओं का पलटवार
इस चुनौती के सामने आने के बाद सरकार और सत्ताधारी दल की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता की चुनौती का आक्रामक अंदाज में जवाब दिया। निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी से कहा कि वे बहस के लिए दिन और समय तय करें। उन्होंने यह पेशकश भी रखी कि वे इस बहस के लिए खुद कांग्रेस मुख्यालय आने को तैयार हैं।
युवाओं और राजनीतिक मंचों पर बढ़ता टकराव
विपक्ष के नेता पिछले कुछ समय से युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को ध्यान में रखते हुए कई अभियान चलाए हैं और सत्तापक्ष की नीतियों को युवा विरोधी करार दिया है। दूसरी तरफ भारतीय युवा कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि देश का युवा वर्ग राहुल गांधी को बदलाव की उम्मीद के रूप में देख रहा है। इसके उलट बीजेपी अध्यक्ष ने कांग्रेस के इन युवा सम्मेलनों की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि इनमें कितना वास्तविक आधार है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की इस पहल के बाद आम लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां विपक्ष के समर्थकों ने इस खुली बहस को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताते हुए सत्तापक्ष से चुनौती स्वीकार करने की मांग की, वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया कि संसदीय बहसों के बजाय टेलीविजन या सोशल मीडिया पर चर्चा की मांग क्यों की जा रही है।



























