ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद स्थापित किया गया। इस सभा में राजनाथ सिंह ने प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला। मध्य एशिया के इस प्रमुख देश में रहने वाले भारतीय नागरिक भारत की विदेश नीति और वैश्विक साझेदारी में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
दुशांबे में प्रवासी भारतीयों से संवाद
राजनाथ सिंह ने दुशांबे यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर साझा जानकारी में बताया कि उन्होंने ताजिकिस्तान की राजधानी में रहने वाले भारतीय नागरिकों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में व्यापार, शिक्षा और विभिन्न पेशों से जुड़े प्रवासी भारतीय शामिल हुए, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर भारत की साख को मजबूत किया है।
मध्य एशिया और भारत के रणनीतिक संबंध
दुशांबे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सम्मेलनों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। पूर्व में यहां एशिया में परस्पर बातचीत और विश्वास निर्माण उपायों के सम्मेलन (CICA) के 5वें शिखर सम्मेलन का आयोजन भी हो चुका है, जिसने क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक संवाद को बढ़ावा दिया था। ताजिक नेतृत्व भी समय-समय पर भारतीय उद्यमियों को स्थानीय आर्थिक और ढांचागत परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित करता रहा है।
अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव में प्रवासी समुदाय की भूमिका
उच्च स्तरीय यात्राओं के दौरान भारतीय नेतृत्व लगातार इस बात को रेखांकित करता रहा है कि विदेशों में बसा भारतीय समुदाय देश के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में एक प्रमुख भागीदार है। राष्ट्रपति कोविंद की ताजिकिस्तान यात्रा के दौरान भी प्रवासी भारतीयों को भारत के वैश्विक आउटरीच का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया था। दुशांबे में आयोजित यह ताजा संवाद उसी निरंतर कूटनीतिक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत यूरेशिया और मध्य एशियाई क्षेत्र में भारत अपनी साझेदारी को लगातार गहरा कर रहा है।



























