अखिलेश यादव (@yadavakhilesh) ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की मुहिम में अपना पूरा समर्थन जताया है। पोस्ट सीधे छात्रों और उनके अभिभावकों को संबोधित करते हुए लिखी गई थी।
छात्रों और अभिभावकों को सीधा संदेश
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट की शुरुआत "प्रिय छात्रों और अभिभावकगण" कहकर की और भरोसा दिलाया कि जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए युवाओं और उनके परिवारों ने जो मुहिम छेड़ रखी है, उसमें वे और उनकी टीम पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं। छात्रों और परिवारों को सीधे संबोधित करके उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है।
भाजपा सरकार पर सीधा हमला
पोस्ट में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा, "बदले की भावना में जल रही भाजपा सरकार जौहर यूनिवर्सिटी को अपनी संकीर्ण राजनीति का शिकार बनाने की कोशिश न करे।" इस एक पंक्ति में उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे प्रतिशोध की राजनीति करार दिया। उन्होंने यूनिवर्सिटी को लेकर लिए गए किसी फैसले को "दुर्भावनापूर्ण" और "पक्षपाती" भी बताया, हालांकि उस फैसले का पूरा ब्योरा उनकी पोस्ट में आगे स्पष्ट नहीं हो पाया।
राजनीतिक निशाना बनाए जाने का आरोप
अखिलेश यादव के शब्दों से साफ है कि उनका आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ हो रही कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक वजह नहीं बल्कि सियासी बदले की भावना काम कर रही है। इसे भाजपा सरकार की "संकीर्ण राजनीति" करार देकर उन्होंने संकेत दिया कि यह मामला अब सिर्फ एक शिक्षण संस्थान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि व्यापक राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन चुका है।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने छात्रों के भविष्य की चिंता जताते हुए सरकार से यूनिवर्सिटी को बंद करने के बजाय उसकी व्यवस्था सुधारने की मांग की, तो कुछ ने यह सवाल भी उठाया कि इस विवाद का हल अदालत और तय नियमों के दायरे में ही निकलना चाहिए, न कि भावनात्मक राजनीति के जरिए। वहीं कई यूजर्स ने सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए।


























