योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष और प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि दी। अपनी पोस्ट में उन्होंने डॉ. मुखर्जी के बलिदान को भारत की एकता और अखंडता के लिए दी गई सर्वोच्च आहुति बताया और उनके प्रति गहरी कृतज्ञता जताई।
वह ऐतिहासिक उद्घोष जो आज भी प्रासंगिक है
योगी आदित्यनाथ ने डॉ. मुखर्जी को उस ऐतिहासिक उद्घोष के प्रणेता के रूप में याद किया जिसने पूरे देश को राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान, नहीं चलेंगे' यह नारा डॉ. मुखर्जी की राजनीतिक पहचान की आधारशिला था और भारत की संवैधानिक अखंडता के लिए उनकी अडिग आवाज का प्रतीक बन गया।
राष्ट्र की एकता के लिए सर्वोच्च बलिदान
योगी आदित्यनाथ ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत की एकता और अखंडता के लिए डॉ. मुखर्जी का सर्वोच्च बलिदान प्रत्येक देशवासी के हृदय में सदैव राष्ट्रवाद की भावना को जीवित रखेगा। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को प्रखर राष्ट्रवादी बताते हुए उन्हें विनम्रतापूर्वक नमन किया और उनके योगदान को अमर बताया।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए उन्हें अपनी-अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कुछ लोगों ने इस मौके का उपयोग अपनी स्थानीय समस्याएं उठाने के लिए भी किया।




















