जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर पाकिस्तान की ओर से शुरू किए गए तथाकथित 'यौम-ए-इस्तेहसाल' और उसके उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री की टिप्पणियों पर भारत ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तान के इन सभी दावों और आयोजनों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने साफ कहा कि पाकिस्तान द्वारा की जा रही यह पूरी गतिविधि महज एक राजनीतिक दिखावा है, जिसका मकसद केवल दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार फैलाना और स्थापित तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत का स्पष्ट और अडिग रुख
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की संप्रभुता को रेखांकित करते हुए दोहराया कि जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह क्षेत्र अतीत में भारत का हिस्सा था, वर्तमान में है और भविष्य में भी हमेशा रहेगा। प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि 5 अगस्त 2019 को संसद द्वारा किए गए ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला हैं। भारत के आंतरिक प्रशासनिक और संवैधानिक निर्णयों पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने का पाकिस्तान के पास न तो कोई कानूनी अधिकार है और न ही कोई वैध आधार है।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्षेत्र में आया बड़ा बदलाव
भारत सरकार ने अपने आधिकारिक पक्ष में इस बात पर विशेष जोर दिया कि 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के इलाकों में बड़े पैमाने पर सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। विशेष दर्जा खत्म होने के बाद इन केंद्र शासित प्रदेशों में सामाजिक और आर्थिक विकास की नई लहर आई है। इसके साथ ही क्षेत्र में सुशासन को बढ़ावा मिला है और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान की गई है। सरकार के प्रयासों से विभिन्न जनकल्याणकारी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी विकास परियोजनाओं में तेजी आई है, जिससे शासन की पहुंच आम नागरिकों तक अधिक सुगम और पारदर्शी हुई है।
पीओजेके में मानवाधिकार हनन और पाकिस्तान के पाखंड का पर्दाफाश
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह अपनी वैश्विक छवि को सुधारने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत बयान जारी कर रहा है। पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपने देश में लगातार गिरते मानवाधिकार रिकॉर्ड और राज्य द्वारा आतंकवाद को दिए जा रहे संरक्षण से भटकाना है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया इस बात की गवाह है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निवासियों के बुनियादी और मौलिक अधिकारों का किस तरह से हनन किया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में हाल के हफ्तों के दौरान घटी घटनाओं का विशेष उल्लेख किया। भारत ने आरोप लगाया कि वहां अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे निहत्थे नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक और घातक बल प्रयोग किया गया। इसके अलावा वहां लक्षित हत्याएं की गईं और आम जनता पर कई तरह के कठोर प्रतिबंध थोपे गए। निर्दोष नागरिकों पर की गई इस हिंसक कार्रवाई ने मानवाधिकारों को लेकर पाकिस्तान के दोहरे रवैये और पाखंड को पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया है।
आतंकवाद पर कार्रवाई और कब्जे वाले इलाके खाली करने की दोटूक नसीहत
भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट सलाह दी है कि वह भारत के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर निरर्थक बयानबाजी और दुष्प्रचार अभियान चलाने के स्थान पर अपने नियंत्रण वाले इलाकों में हो रहे अत्याचारों को रोके। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को सबसे पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में निर्दोष लोगों के खिलाफ जारी हिंसा और रक्तपात को तुरंत बंद करना चाहिए। इसके साथ ही पाकिस्तान को अपनी सीमा के भीतर और अपनी धरती से संचालित होने वाले तमाम आतंकवादी नेटवर्क और उनके ठिकानों के खिलाफ ऐसी ठोस, विश्वसनीय, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय कार्रवाई करनी चाहिए जिसे बदला न जा सके।
विदेश मंत्रालय ने अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि पाकिस्तान को भारत के उन तमाम भू-भागों से अपना अवैध और जबरन कब्जा तुरंत हटाना चाहिए, जिन पर उसने गैर-कानूनी तरीके से कब्जा कर रखा है। भारत ने यह निष्कर्ष निकाला कि आज का अंतरराष्ट्रीय समुदाय बेहद जागरूक है और वह पाकिस्तान के इस तरह के सुनियोजित कूटनीतिक ड्रामे, झूठे बयानों और दुष्प्रचार से किसी भी सूरत में गुमराह होने वाला नहीं है। 5 अगस्त 2019 के फैसले के बाद से भारत का रुख इस मुद्दे पर पूरी तरह अडिग और स्पष्ट बना हुआ है।



















