सोमवार सुबह वायु गुणवत्ता के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण लाहौर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर दर्ज किया गया। सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच दर्ज वैश्विक आंकड़ों में शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 530 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि वातावरण में अति सूक्ष्म कणों यानी पीएम2.5 की सघनता 343 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर आंकी गई। इस सूची में 226 एक्यूआई के साथ काहिरा दूसरे स्थान पर रहा। लाहौर के साथ-साथ पंजाब प्रांत के कई अन्य बड़े शहर भी अत्यधिक प्रदूषण की चपेट में पाए गए, जिससे पूरे इलाके में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पंजाब प्रांत के कई शहरों में दमघोंटू स्थिति
लाहौर के शीर्ष पर रहने के अलावा पंजाब के अन्य शहरी केंद्रों में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब रही। गुजरांवाला में एक्यूआई 475 दर्ज किया गया, जबकि फैसलाबाद में यह स्तर 435 रहा। इसके बाद मुल्तान 280 और सियालकोट 241 के एक्यूआई पर दर्ज किए गए। इसी प्रांत का बहावलपुर शहर 180 के एक्यूआई के साथ सातवें स्थान पर रहा। पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अवशेष और पराली जलाने की गतिविधियों में आई तेज वृद्धि को इस मौसमी गिरावट का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, जिससे वातावरण में धुंध और जहरीले तत्वों का फैलाव बढ़ता जा रहा है।
स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर प्रदूषण की गहरी चोट
पाकिस्तान वायु गुणवत्ता पहल की राष्ट्रीय रिपोर्ट 'अनवेलिंग पाकिस्तान एयर पॉल्यूशन: अ नेशनल लैंडस्केप रिपोर्ट ऑन हेल्थ रिस्क्स, सोर्सेज, एंड सॉल्यूशंस' देश में वायु प्रदूषण के बहुक्षेत्रीय उत्सर्जन और स्वास्थ्य खतरों की विस्तृत पड़ताल करती है। इस अध्ययन के अनुसार, देश भर में वायु प्रदूषण के कारण जीवन प्रत्याशा औसतन 3.9 वर्ष घट जाती है। इसके अलावा हर साल लगभग 1,28,000 लोग जहरीली हवा से जुड़ी दिक्कतों के चलते असमय जान गंवाते हैं। प्रदूषण का यह संकट स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी पर 6.5 प्रतिशत का भारी आर्थिक बोझ भी डालता है।
लाहौर में डब्ल्यूएचओ के मानकों का गंभीर उल्लंघन
इस अध्ययन में कराची, इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और पेशावर जैसे बड़े शहरों के प्रदूषण पैटर्न की समीक्षा की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर में पीएम2.5 का वार्षिक औसत स्तर 110 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से भी अधिक बना हुआ है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन के 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर के वार्षिक दिशानिर्देश से 22 गुना से भी ज्यादा है। ऐसे अत्यंत दूषित वातावरण में लंबे समय तक सांस लेने के कारण लाहौर के निवासियों की अनुमानित उम्र में सात साल तक की गिरावट आने का खतरा पैदा हो गया है। इस मूल्यांकन में कार्बन डाइऑक्साइड, पीएम2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड को शामिल करके चार प्रमुख शहरी एयरशेड का विश्लेषण किया गया है।
वाहनों का धुआं और औद्योगिक इकाइयां मुख्य जिम्मेदार
अध्ययन में चिन्हित उत्सर्जन स्रोतों के मुताबिक लाहौर में पीएम2.5 के प्राथमिक उत्सर्जन का सबसे प्रमुख स्रोत सड़क परिवहन है। परिवहन क्षेत्र के बाद औद्योगिक इकाइयों की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि ईंट भट्टों का योगदान 17 प्रतिशत पाया गया। ये सभी स्रोत मिलकर शहर की हवा में धूल और रासायनिक कणों का भारी जमाव करते हैं। सर्दियों के आगमन के साथ मौसम संबंधी स्थितियां इन जहरीले कणों को वातावरण की निचली सतह में रोक लेती हैं, जिससे स्थिति और विकराल रूप ले लेती है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि सुनियोजित उपायों को लागू करके कुल उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है।



















