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2027 से पहले यूपी के गांव-गांव में उतरा संघ, आंध्र के एक ट्रस्ट से मिला जीत का फॉर्मूलाराजनीति
7 सित॰ 2026, 8:48 pm (49 दिन पहले)· 3

2027 से पहले यूपी के गांव-गांव में उतरा संघ, आंध्र के एक ट्रस्ट से मिला जीत का फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सीएम योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार सत्ता दिलाने के लिए मैदान संभाल लिया है, और आंध्र प्रदेश के एक ट्रस्ट के मॉडल से मिली सीख अब गांव-गांव में उतारी जा रही है।

2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभी डेढ़ साल दूर है, लेकिन जमीन पर तैयारी अभी से तेज हो चुकी है। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से हजारों किलोमीटर दूर आंध्र प्रदेश पहुंचे, जहां उन्होंने ऐसे एक कार्यक्रम में शिरकत की जिसका असर सीधे यूपी की आगामी सियासी लड़ाई पर पड़ सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी को अपनी उत्तर प्रदेश रणनीति पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया था, और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार सत्ता में लाने के 'मिशन 2027' की कमान परदे के पीछे से संघ ने खुद संभाल ली है।

नेल्लोर में क्यों जुटे दिग्गज, और इसका यूपी से क्या नाता?

आंध्र प्रदेश के नेल्लोर शहर में 'स्वर्ण भारत ट्रस्ट' के 25 साल पूरे होने पर रजत जयंती समारोह आयोजित हुआ। इस ट्रस्ट की नींव पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रखी थी, और पिछले ढाई दशक से यह संस्था गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, हुनर सिखाने के कार्यक्रमों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। समारोह में देश के कई जाने-माने विचारक और सामाजिक-राजनीतिक चेहरे मौजूद रहे। मंच से यह बात उभरकर सामने आई कि जब तक गांव की अर्थव्यवस्था, किसान, महिलाएं और नौजवान अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे, तब तक व्यापक राष्ट्रवाद की नींव पुख्ता नहीं हो सकती। यही सोच अब यूपी में संघ की रणनीति का आधार बन रही है।

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गांव-गांव में उतारा जा रहा 'स्वर्ण भारत मॉडल'

संघ और भाजपा अब यूपी के दूर-दराज गांवों में इसी 'स्वर्ण भारत मॉडल' की तर्ज पर सेवा कार्य फैला रहे हैं। वजह साफ है, 2024 के आम चुनाव में जातिगत गोलबंदी के चलते भाजपा को गांवों और दलित बहुल इलाकों में तगड़ा झटका लगा था। उसी कमी को पाटने के लिए अब संघ का सेवा विभाग हर गांव में कौशल केंद्र, स्वयं सहायता समूह और स्वास्थ्य शिविर खड़े कर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

बूथ स्तर पर संघ की सूक्ष्म रणनीति

योगी आदित्यनाथ को 2027 में तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए संघ ने अपनी चिर-परिचित बूथ स्तर की बारीक निगरानी वाली कार्यशैली फिर से सक्रिय कर दी है। स्वयंसेवकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे जातियों में बंटाव रोकने के लिए 'राष्ट्रवाद बनाम जातिवाद' की सोच को जमीन पर मजबूत करें। हर जिले के कार्यकर्ताओं से साफ कहा गया है कि वे विवाद खड़ा करने वाले बयानों से दूर रहें और सरकारी योजनाओं का फायदा उठा चुके आम लोगों से सीधा जुड़ाव बनाएं।

लखनऊ में मंथन, योजनाओं की सीधी डिलीवरी

इसी कड़ी में लखनऊ में समन्वय बैठकों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं, जिनमें कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनी जा रही हैं और विधायकों के काम करने के तरीके को बेहतर बनाने पर चर्चा हो रही है। साथ ही योगी सरकार की स्वरोजगार से जुड़ी योजनाएं, जैसे टैबलेट बांटने की योजना और रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना, संघ के सामाजिक नेटवर्क के जरिए सीधे पात्र युवाओं और महिलाओं तक पहुंचाई जा रही हैं।

विकास, सुशासन और सनातन पहचान का दांव

हाल की जनसभाओं में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बड़ी रणनीति की झलक दिखानी शुरू कर दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि 2027 का चुनाव विकास, सुशासन, सख्त कानून-व्यवस्था और सनातन पहचान के मुद्दों पर लड़ा जाएगा। सरकार की नजर राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के सहारे गांव के युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर टिकी है।

कुल मिलाकर 2027 का यूपी चुनाव सिर्फ दलों की आपसी टक्कर भर नहीं रहने वाला। यह संघ के सामाजिक सेवा वाले मॉडल और विपक्ष की जातिगत गोलबंदी की सियासत के बीच एक बड़ी टक्कर बनता दिख रहा है। स्वर्ण भारत ट्रस्ट जैसे गैर-राजनीतिक सेवा मॉडलों से सीख लेकर संघ यूपी के हर गांव में अपनी वैचारिक और सामाजिक जड़ें इतनी गहरी करना चाहता है कि 2027 में योगी आदित्यनाथ की राह आसान हो जाए।

सवाल-जवाब

सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ आंध्र प्रदेश क्यों गए?
वे नेल्लोर में 'स्वर्ण भारत ट्रस्ट' की रजत जयंती समारोह में शामिल हुए, जिसका संदेश यूपी की 2027 चुनावी रणनीति से जुड़ा है।
'स्वर्ण भारत ट्रस्ट' किसने शुरू किया था?
इसे पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने स्थापित किया था और यह पिछले 25 सालों से ग्रामीण इलाकों में काम कर रहा है।
संघ अब यूपी में क्या रणनीति अपना रहा है?
संघ गांव-गांव में कौशल केंद्र, स्वयं सहायता समूह और स्वास्थ्य शिविर लगाकर 'स्वर्ण भारत मॉडल' की तर्ज पर सेवा कार्य बढ़ा रहा है।
यह रणनीति क्यों अपनाई जा रही है?
2024 के लोकसभा चुनाव में जातिगत गोलबंदी के चलते भाजपा को ग्रामीण और दलित बहुल इलाकों में नुकसान हुआ था, उसी की भरपाई के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
लखनऊ में किन नेताओं के बीच बैठकें हो रही हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री और संघ के शीर्ष पदाधिकारी लगातार समन्वय बैठकें कर रहे हैं।
कौन-सी सरकारी योजनाएं संघ के नेटवर्क से पहुंचाई जा रही हैं?
टैबलेट वितरण योजना और रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना जैसी स्वरोजगार योजनाएं संघ के सामाजिक नेटवर्क के जरिए युवाओं और महिलाओं तक पहुंचाई जा रही हैं।
योगी आदित्यनाथ ने 2027 चुनाव को लेकर क्या संकेत दिए हैं?
उन्होंने कहा है कि यह चुनाव विकास, सुशासन, कानून-व्यवस्था और सनातन पहचान के मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·49 दिन पहले

वर्ष 2024 के आम चुनावों में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और दलित बहुल क्षेत्रों में हुए नुकसान से सबक लेते हुए, संघ और भाजपा ने 2027 की तैयारी के लिए सूक्ष्म स्तर पर रणनीति बदल दी है। आंध्र प्रदेश के स्वर्ण भारत ट्रस्ट के मॉडल के आधार पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कौशल विकास और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए जमीनी पकड़ मजबूत करने की यह कवायद यह दर्शाती है कि इस बार चुनाव सिर्फ राजनीतिक भाषणों पर नहीं, बल्कि सेवा कार्यों और बूथ-स्तरीय सामाजिक अभियानों के भरोसे लड़ा जाएगा। जातिगत गोलबंदी की काट के लिए राष्ट्रवाद के एजेंडे को गाँव-गाँव तक पहुँचाना और समन्वय बैठकों के जरिए असंतोष दूर करना आगामी राजनीतिक दिशा को तय करेगा।

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