प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर बताया कि वे 8 सितंबर को गुजरात और महाराष्ट्र के तीन शहरों के दौरे पर रहेंगे और वहां कई बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात देंगे।
वडोदरा, नवसारी और मुंबई में कार्यक्रम
नरेंद्र मोदी के मुताबिक, कल यानी 8 सितंबर को वे वडोदरा, नवसारी और मुंबई में अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इन तीनों शहरों में विकास से जुड़े कई काम या तो जनता को सौंपे जाएंगे या फिर उनका शिलान्यास किया जाएगा। यह पोस्ट दौरे से एक दिन पहले की गई, जिसमें कार्यक्रम की सिर्फ मोटी रूपरेखा बताई गई, प्रोजेक्ट्स की पूरी सूची या जानकारी नहीं दी गई।
35 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स
इस दौरे की सबसे बड़ी बात 35,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स हैं। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन होगा यानी वे बनकर तैयार हैं और अब आम लोगों के इस्तेमाल के लिए खोले जाएंगे, जबकि बाकी का शिलान्यास होगा यानी वहां निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू होगा। पोस्ट में यह नहीं बताया गया कि कौन सा प्रोजेक्ट किस सेक्टर से जुड़ा है, लेकिन इतनी बड़ी रकम से साफ है कि एक ही दिन में गुजरात और मुंबई में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा काम शुरू या पूरा हो रहा है। एक ही दिन में कई शहरों को जोड़ने वाला ऐसा दौरा आमतौर पर इसलिए रखा जाता है ताकि तैयार हो चुके प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और नए प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास, दोनों काम एक साथ निपटाए जा सकें।
वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन हिस्से
इस दौरे की एक खास बात वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन अहम हिस्सों को राष्ट्र को समर्पित करना भी है। यह फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बनाई गई अलग रेल लाइन है, ताकि सामान ढोने वाली ट्रेनें आम यात्री ट्रेनों वाली पटरियों पर बोझ न बढ़ाएं और माल की ढुलाई तेज़ी से हो सके। इसके नए हिस्सों के तैयार होने से पश्चिमी भारत में औद्योगिक इलाकों और बंदरगाहों के बीच माल ढुलाई और मजबूत होने की उम्मीद है। किसी रेल लाइन को औपचारिक रूप से समर्पित करने का मतलब है कि अब उस हिस्से पर मालगाड़ियां बिना किसी और मंजूरी के इस्तेमाल के लिए तैयार हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ यूज़र्स ने फ्रेट कॉरिडोर के इस हिस्से को लॉजिस्टिक्स और उद्योग के लिए अच्छा कदम बताया, तो वहीं कई लोगों ने सवाल भी उठाए। कुछ ने हाल में हुई एक दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस पर अब तक कुछ नहीं कहा गया और सरकार नए उद्घाटनों में जुट गई, कुछ ने आम यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा से जुड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स की मांग की, और कुछ ने 35,000 करोड़ रुपये के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए। कुल मिलाकर प्रतिक्रियाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे खर्च की तारीफ भी दिखी और पारदर्शिता व दूसरे मुद्दों पर जल्द कार्रवाई की मांग भी।

























