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बहावलपुर का आतंकी अड्डा भले संवर गया हो, लेकिन भारत का खौफ सीने से नहीं निकलेगाराजनीति
25 अग॰ 2026, 4:19 pm (4 घंटे पहले)· 2

बहावलपुर का आतंकी अड्डा भले संवर गया हो, लेकिन भारत का खौफ सीने से नहीं निकलेगा

पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुए जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर हेडक्वार्टर को दोबारा तैयार कर लिया है, लेकिन भारतीय हमलों से वहां के हुक्मरानों के मन में बैठा खौफ कभी खत्म नहीं हो सकता।

ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में नेस्तनाबूद हुए आतंकी ठिकाने को पाकिस्तान ने भले ही फिर से संवार लिया हो, लेकिन इससे जमीनी हकीकत नहीं बदलने वाली। सीमापार से सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर हेडक्वार्टर अब दोबारा बनकर तैयार हो चुका है। शुभानअल्लाह मरकज के नाम से फिदायीन तैयार करने वाले इस खूंखार अड्डे पर भारतीय वायुसेना ने सात मई, 2025 की रात को बड़ा हमला किया था। राफेल विमानों पर तैनात स्काल्प मिसाइलों ने इस मरकज को इस तरह छलनी कर दिया था कि आठ मई को हर तरफ तबाही के निशान सुर्खियों में छाए हुए थे।

मरकज की मरम्मत और पुरानी तबाही की दास्तां

भले ही मौलाना मसूद अजहर के करीबियों ने मरकज की इमारतों के सुराखों को भर दिया हो और इसे दोबारा चमका लिया हो, लेकिन उस कार्रवाई का अंजाम पाकिस्तान को हमेशा याद रहेगा। मुनीर की मदद से खड़ी की गई इस नई इमारत के बावजूद इतिहास नहीं बदला जा सकता। उस भीषण हमले में बहावलपुर आतंकी मॉड्यूल के करीब 100 आतंकी मारे गए थे और जहन्नुम पहुंच गए थे। इतना ही नहीं, खुद मौलाना मसूद अजहर के 10 से ज्यादा रिश्तेदार भी इस स्ट्राइक का शिकार बने थे।

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बदल चुकी है भारत की आतंकवाद विरोधी नीति

पाकिस्तान और वहां के हुक्मरानों को यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि अगर पहलगाम जैसी हिमाकत दोबारा हुई, तो यही अंजाम फिर दोहराया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति को पूरी तरह से नया आयाम दे दिया है। इस एयरस्ट्राइक ने दक्षिण एशिया के भू-सामरिक संतुलन यानी जियो-स्ट्रेटेजिक बैलेंस को हमेशा के लिए उलट कर रख दिया है। आज मलबे को छिपाने या इमारतों पर नया ढांचा खड़ा करने से पाकिस्तान की असलियत नहीं छिप सकती। भारतीय वायुसेना के मिराज और राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने सरहद पार घुसकर जो सटीक हवाई हमले किए थे, उन्होंने आतंकवाद की जड़ों को हिलाकर रख दिया था।

छद्म युद्ध के भ्रम और रक्षा प्रणाली की पोल

बहावलपुर के आतंकी गढ़ की छतों पर किए गए वे वार सिर्फ कंक्रीट पर नहीं थे, बल्कि पाकिस्तान के उस भ्रम पर करारा प्रहार थे जिसके सहारे वह दशकों से छद्म युद्ध को सुरक्षित मानकर पालता आ रहा था। आज जैश चाहे जितनी नई इमारतें खड़ी कर ले, लेकिन दुनिया और पाकिस्तानी सैन्य तंत्र यह अच्छी तरह जानता है कि भारतीय मिसाइलों की अचूक मार ने उनकी रक्षा प्रणाली और हवाई क्षेत्र के खोखलेपन को बेनकाब कर दिया है। परमाणु हथियारों की आड़ में सुरक्षित रहने का पाकिस्तान का घमंड एक ही झटके में चूर-चूर हो गया।

भय और बेबसी का प्रतीक बना नया ढांचा

पहलगाम की घटना के बाद भारत ने अपनी सामरिक प्रतिक्रिया के दायरे को हमेशा के लिए व्यापक बना दिया है। अब रुख साफ है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और हमले पूरी तरह सटीक व निर्णायक होंगे। अब स्टेट और नॉन-स्टेट एक्टर्स के बीच कोई फर्क नहीं समझा जाएगा। इमारतों की मरम्मत तो की जा सकती है, लेकिन पाकिस्तान के सीने में दफ्न भारत के उस खौफ को कभी ठीक नहीं किया जा सकता, जो भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना से वहां के आसमान और लोगों के दिलों में बैठ चुका है। बहावलपुर का नया ढांचा जैश-ए-मोहम्मद की मजबूती का नहीं, बल्कि उसके भीतर के डर और लाचारी का जीता-जागता सुबूत है, क्योंकि अगली गलती होने पर कार्रवाई और भी ज्यादा खौफनाक होगी और ऑपरेशन सिंदूर का सिलसिला जारी है।

सवाल-जवाब

ऑपरेशन सिंदूर के तहत किस आतंकी ठिकाने को निशाना बनाया गया था?
भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बहावलपुर में स्थित जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर (शुभानअल्लाह मरकज) को निशाना बनाया था।
यह हमला कब किया गया था?
यह भीषण हवाई हमला सात मई, 2025 की रात को किया गया था।
इस हमले में जैश को कितना नुकसान हुआ था?
इस हमले में बहावलपुर मॉड्यूल के लगभग 100 आतंकी मारे गए थे और मसूद अजहर के 10 से अधिक रिश्तेदार भी ढेर हुए थे।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस ठिकाने के साथ क्या किया है?
पाकिस्तानी मदद से जैश ने क्षतिग्रस्त इमारतों और मलबे की मरम्मत कर बहावलपुर स्थित इस मरकज को दोबारा खड़ा कर लिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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