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बंगाल की सड़कों से हटेंगे मुगल और ब्रिटिश दौर के नाम, शुभेंदु अधिकारी ने समीक्षा के लिए बनाई कमेटीराजनीति
24 जून 2026, 8:45 am (81 दिन पहले)· 2

बंगाल की सड़कों से हटेंगे मुगल और ब्रिटिश दौर के नाम, शुभेंदु अधिकारी ने समीक्षा के लिए बनाई कमेटी

कोलकाता में अब किसी सड़क या इलाके का नाम मुगल, पठान या ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में नामों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का ऐलान किया।

कोलकाता की सड़कों और मोहल्लों के नामों को लेकर अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी में किसी भी सड़क या इलाके का नाम मुगलों, पठानों या ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेगा। मंगलवार को उन्होंने विधानसभा में यह घोषणा की और साथ ही नामों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का भी ऐलान कर दिया।

यह बात राज्यपाल के अभिभाषण पर चल रही चर्चा के दौरान सामने आई। बहस की असली जड़ कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके की एक सड़क थी, जिसका नाम हाल ही में बदला गया है।

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सुहरावर्दी एवेन्यू के नाम बदलने पर छिड़ी बहस

कोलकाता नगर निगम (KMC) ने पार्क सर्कस इलाके की सड़क सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया है। मंगलवार को विधानसभा में इसी फैसले और सड़क के असली नाम के पीछे के इतिहास को लेकर तीखी बहस हुई।

विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी ने नाम बदलने पर सवाल खड़े किए और कहा कि इतिहास के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उनका तर्क था कि सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं रखा गया था, जिन पर 1946 में कोलकाता (तब कलकत्ता) में कई लोगों की हत्या का आरोप लगाया जाता है। बनर्जी के मुताबिक यह सड़क दरअसल उनके दादा मौलाना ओबैदुल्ला सुहरावर्दी के नाम पर थी।

उन्होंने बताया कि इस सड़क का नाम 1932 में सर हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखा गया था, जो एक जाने-माने डॉक्टर थे और कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पहले मुस्लिम वाइस-चांसलर भी रहे।

मुख्यमंत्री ने दिया विपक्ष को जवाब

शुभेंदु अधिकारी ने रीताब्रत बनर्जी के दावों का जवाब देते हुए दो टूक कहा कि कोलकाता में अब कोई मुगल, पठान या अत्याचारी ब्रिटिश नाम नहीं रहेगा। उन्होंने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने के फैसले की तारीफ की और इसे एक ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने सड़कों और सार्वजनिक जगहों के नामों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि इस पैनल की अगुवाई स्वामी प्रदीपानंद महाराज करेंगे, जिन्हें लोग कार्तिक महाराज के नाम से भी जानते हैं। आम लोग भी इस कमेटी को अपने सुझाव दे सकते हैं।

'बंगाली संस्कृति को मिटाया नहीं जा सकता'

अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "सिस्टर निवेदिता को छोड़कर, कोई विदेशी नाम नहीं रहेगा। अगर एपीजे अब्दुल कलाम जैसे सच्चे देशभक्त हैं तो हमें जानकारी दें और राज्य सरकार उन्हें सम्मानित करेगी। आप बंगाली संस्कृति और गौरव को मिटा नहीं सकते।"

सवाल-जवाब

कोलकाता में किन नामों पर रोक लगाने की बात कही गई है?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि शहर में किसी सड़क या इलाके का नाम मुगल, पठान या ब्रिटिश शासकों के नाम पर नहीं रहेगा।
सुहरावर्दी एवेन्यू का नया नाम क्या रखा गया है?
कोलकाता नगर निगम (KMC) ने पार्क सर्कस इलाके की इस सड़क का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया है।
नाम बदलने वाली कमेटी का प्रमुख कौन होगा?
इस कमेटी की अगुवाई स्वामी प्रदीपानंद महाराज करेंगे, जिन्हें कार्तिक महाराज के नाम से भी जाना जाता है।
रीताब्रत बनर्जी ने क्या आपत्ति जताई?
विपक्ष के नेता रीताब्रत बनर्जी ने कहा कि नाम बदलकर इतिहास के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उनके मुताबिक यह सड़क पाकिस्तान के पूर्व पीएम के नाम पर नहीं थी।
सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम किसके नाम पर रखा गया था?
रीताब्रत बनर्जी के अनुसार यह सड़क 1932 में सर हसन सुहरावर्दी के नाम पर रखी गई थी, जो जाने-माने डॉक्टर और कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पहले मुस्लिम वाइस-चांसलर थे।
किस विदेशी नाम को बरकरार रखने की बात कही गई है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिस्टर निवेदिता को छोड़कर कोई विदेशी नाम नहीं रहेगा।
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