जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा सभी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद धरना स्थल पर शांति स्थापित हो चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से वायरल हो रहा है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके सत्ताधारी दल बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। जब पत्रकारों ने इस संबंध में अभिजीत दीपके से सीधा सवाल किया, तो उन्होंने कई गंभीर दावे किए। उनके इन बयानों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है और उनके दावों की सत्यता को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
Gen-Z संस्कृति और पतंजलि पर तीखा हमला
अभिजीत दीपके ने अपनी बातचीत की शुरुआत में सबसे पहले उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो Gen-Z युवाओं के पहनावे और उनकी भाषा शैली पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अधिकार मांगना और पढ़ाई या भविष्य के लिए लड़ाई लड़ना किसी भी तरह से देश की संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाता है। अगर सरकार से सवाल पूछना संस्कृति खराब करना माना जाता है, तो युवा ऐसा करने से पीछे नहीं हटेंगे। इसके साथ ही उन्होंने योग गुरु बाबा रामदेव पर भी जोरदार हमला बोला।
उन्होंने बाबा रामदेव को संबोधित करते हुए कहा, "बाबा रामदेव जी, आप पतंजलि के उन खराब प्रोडक्ट्स पर ध्यान दीजिए जिन्हें लेकर सुप्रीम कोर्ट भी प्रतिबंध लगाने की बात कर रहा है।" अभिजीत ने यह तर्क दिया कि दूसरों की संस्कृति और आचरण पर टिप्पणी करने से पहले बाबा रामदेव को अपनी कंपनी के विवादित उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान देना चाहिए, जिस पर देश की शीर्ष अदालत भी सख्त रुख अपना चुकी है।
संसद, गृहमंत्री का इस्तीफा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल
संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग किए जाने के सवाल पर अभिजीत दीपके ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का उत्तर बेहद स्पष्ट है क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर गृह मंत्रालय और अमित शाह को ही रिपोर्ट करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दिल्ली में पुलिस की ऐसी कार्रवाइयों की जानकारी गृहमंत्री को नहीं है, तो यह पूरी तरह से गृहमंत्री की कार्यशैली और प्रशासनिक तंत्र की असफलता को दर्शाता है।
इसके अलावा अभिजीत दीपके ने बीजेपी और सरकार के उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर किसी भी प्रकार की गोलियां नहीं चलाई गईं। उन्होंने कहा कि बीजेपी भले ही यह बयान दे रही हो कि केवल प्रोटेस्ट पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, लेकिन हकीकत यह है कि इन पैलेट गनों से कई छात्र अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं और कई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में छात्रों पर एके 47 जैसी खतरनाक राइफलों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश में अजमल कसाब जैसे खूंखार आतंकवादियों और संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकियों पर एके 47 चलाई जाती थी, लेकिन आज वही हथियार देश के निर्दोष छात्रों पर चलाए जा रहे हैं।
बीजेपी में शामिल होने के ऑफर और धमकियों का दावा
पार्टी जॉइन करने के सवाल पर अभिजीत दीपके ने एक अत्यंत गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए कई धमकियां दी गईं। उनसे कहा गया कि यदि वे बीजेपी में आ जाते हैं तो यह उनके और उनके परिवार के भविष्य के लिए अच्छा रहेगा।
अभिजीत ने इस पूरे घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इतने वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री अपने पोते की उम्र के युवा को इस तरह की धमकियां दिलवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इतने बड़े पद पर बैठे नेताओं को अपने राजनीतिक हितों के लिए बच्चों की उम्र के युवाओं को डराना पड़े, तो ऐसे ऊंचे पदों का क्या औचित्य रह जाता है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक भारी हलचल मचा दी है।
दावों पर उठते सवाल और राजनीतिक विश्लेषकों की राय
अभिजीत दीपके का यह बयान सामने आने के बाद अब जनता और मीडिया के बीच दो स्पष्ट राय बन गई हैं। पहला पक्ष यह मान रहा है कि अभिजीत ने अपने बयान में बीजेपी के किसी भी विशेष नेता के नाम का खुलासा नहीं किया है। इस कारण यह आशंका जताई जा रही है कि उन्होंने केवल मीडिया की सुर्खियों में बने रहने और खुद को चर्चा का केंद्र बनाने के लिए यह ऑफर वाला दावा किया है।
दूसरी तरफ, राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग यह भी याद दिला रहा है कि विरोधियों को अपने पाले में लाकर उनके आंदोलन को कमजोर करना बीजेपी की एक पुरानी और स्थापित राजनीतिक रणनीति रही है। इसका उदाहरण गुजरात में देखने को मिला था, जहां हार्दिक पटेल और जिगनेश मेवानी जैसे युवा नेताओं ने शुरुआत में बीजेपी के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया था, लेकिन बाद में राजनीतिक समीकरण ऐसे बदले कि कई युवा नेता बीजेपी के साथ आ गए। इसके अलावा आए दिन विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायक और सांसद टूटकर बीजेपी या एनडीए गठबंधन का हिस्सा बनते रहते हैं। हालांकि, इन दोनों ही पक्षों के लोग इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि यदि अभिजीत दीपके को वास्तव में बीजेपी की ओर से ऐसा कोई न्योता या धमकी मिली है, तो उन्हें उस नेता के नाम को सार्वजनिक रूप से उजागर करना चाहिए।



















