सोशल मीडिया मंच इन्स्टाग्राम पर आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में से अपनी व्यक्तिगत पसंद को लेकर पूछे गए सवाल का एक दिलचस्प उत्तर दिया। युवाओं और जनरेशन जेड (Gen Z) के साथ 'आस्क मी एनीथिंग' सत्र के दौरान जब उनसे पूछा गया कि बीजेपी में उनका सबसे पसंदीदा राजनेता कौन है, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम लिया। राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को काफी 'कूल' बताते हुए उनके सैन्य इतिहास के ज्ञान की खुलकर सराहना की और मजाकिया लहजे में 'हेलो, अंकल अमरिंदर' कहकर संबोधित भी किया। इस बयान के सामने आने के बाद देश के राजनीतिक हलकों में पुरानी राजनीतिक कहानियों और दोनों नेताओं के बीच के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर चर्चा का नया दौर शुरू हो गया है।
इन्स्टाग्राम सेशन में राहुल गांधी का जवाब और 'अंकल अमरिंदर' संबोधन
यह पूरा वाकया राहुल गांधी के इन्स्टाग्राम अकाउंट पर आयोजित जनरेशन जेड और युवाओं के साथ संवाद के दौरान हुआ। 6 अगस्त 2026 को कांग्रेस पार्टी की ओर से इस बातचीत का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा किया गया। इस सत्र में युवाओं की ओर से राहुल गांधी से कई तरह के हल्के-फुल्का और राजनीतिक सवाल पूछे जा रहे थे। इसी दौरान जब बीजेपी में उनके पसंदीदा नेता का नाम पूछा गया, तो राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह का जिक्र किया। राहुल गांधी का अंदाज पूरी तरह से इनफॉर्मल और अनौपचारिक था। उन्होंने इसे किसी आधिकारिक राजनीतिक बयान के रूप में पेश नहीं किया, लेकिन भारतीय राजनीति में दिग्गजों के बीच परस्पर बयानों के हमेशा गहरे सियासी मायने निकाले जाते हैं।
सैन्य इतिहास की समझ और इनफॉर्मल अंदाज की तारीफ
संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की तारीफ में कहा, "कैप्टन अमरिंदर सिंह, बिल्कुल। मेरी उनसे अच्छी बनती है। वह कूल हैं और सैन्य इतिहास के विशेषज्ञ हैं, इसलिए मैं उन्हें काफी पसंद करता हूं। हेलो, अंकल अमरिंदर।" राहुल गांधी ने यह बात बहुत ही सहज और अनौपचारिक तरीके से कही। उन्होंने कैप्टन के सैन्य इतिहास के व्यापक अध्ययन और अनुभव को रेखांकित किया। कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं और सैन्य इतिहास पर कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं। राहुल गांधी द्वारा सार्वजनिक रूप से उनके प्रति दिखाई गई इस गर्माहट ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि दोनों के बीच अतीत में तीखे राजनीतिक मतभेद भी देखने को मिले थे।
पांच दशक का कांग्रेसी सफर, 2022 का अलगाव और बीजेपी में विलय
कैप्टन अमरिंदर सिंह और राहुल गांधी का संबंध सिर्फ वर्तमान राजनीतिक दलबदल तक सीमित नहीं है। अमरिंदर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक रहे और पंजाब की राजनीति में पार्टी के सबसे बड़े चेहरे माने जाते थे। उन्होंने लगभग पांच दशक (करीब 50 वर्ष) कांग्रेस में बिताए और दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान के साथ मतभेदों के चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और अपनी नई पार्टी 'पंजाब लोक कांग्रेस' का गठन किया। 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद अमरिंदर सिंह ने अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया और वह बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हो गए। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा उन्हें बीजेपी का पसंदीदा नेता बताना बेहद राजनीतिक महत्व रखता है।
जून महीने का घटनाक्रम: जन्मदिन की शुभकामना और कांग्रेस-बीजेपी की कार्यशैली की तुलना
राहुल गांधी की इस ताजा टिप्पणी से पहले भी दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद और सम्मान की बातें सामने आ चुकी हैं। जून के महीने में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद इस बात की जानकारी साझा की थी कि राहुल गांधी ने उन्हें जन्मदिन की व्यक्तिगत शुभकामनाएं भेजी थीं। इसके अतिरिक्त, अमरिंदर सिंह के भाई के निधन के समय भी राहुल गांधी ने गहरी संवेदना व्यक्त की थी। जून में ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस और बीजेपी की संगठनात्मक कार्यशैली की तुलना करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक परामर्श आधारित थी, जहां पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर केंद्रीय नेतृत्व नियमित रूप से उनकी राय लेता था। इसके विपरीत, उन्होंने बीजेपी की निर्णय प्रक्रिया को अधिक केंद्रीकृत करार दिया था। इस संदर्भ को देखते हुए दोनों नेताओं के बीच की यह आपसी गर्माहट काफी दिलचस्प मानी जा रही है।
क्या दल बदलने या कांग्रेस में वापसी के संकेत हैं?
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें लगनी शुरू हो गईं कि क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी का कोई रास्ता बन रहा है। हालांकि, वर्तमान में उपलब्ध तथ्यों और राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर ऐसी किसी भी संभावना के कोई प्रत्यक्ष संकेत नहीं हैं। दोनों पक्षों की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक वापसी वार्ता की पुष्टि नहीं की गई है। राहुल गांधी का बयान पूरी तरह से व्यक्तिगत पसंद, सम्मान और पुराने पारिवारिक संबंधों के संदर्भ में था। कैप्टन अमरिंदर सिंह वर्तमान में बीजेपी के सक्रिय सदस्य हैं। इसलिए महज एक अनौपचारिक बयान के आधार पर राजनीतिक बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह स्पष्ट है कि राजनीतिक राहें अलग होने के बावजूद दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत रिश्तों का शिष्टाचार कायम है।
बैटमैन का मजाक, दार्शनिक चर्चा और संविधान का विषय
इन्स्टाग्राम के इस संवाद सत्र में सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि कई अन्य रोचक विषयों पर भी चर्चा हुई। युवाओं ने राहुल गांधी से बेहद अनौपचारिक सवाल पूछे, जिनमें से एक सवाल यह था कि क्या वह 'बैटमैन' हैं। इस पर राहुल गांधी ने मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा, "बस इतना कह सकते हैं कि किसी ने मुझे और बैटमैन को कभी एक ही कमरे में नहीं देखा है।" इसके अलावा, सत्र के दौरान गंभीर विषयों पर भी विचार विमर्श किया गया। राहुल गांधी ने भारतीय संविधान के निर्माण और उसको प्रभावित करने वाली विभिन्न दार्शनिक और सामाजिक परंपराओं पर युवाओं के सामने अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भारत का संविधान देश की ऐतिहासिक विविधता और समावेशी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
35 वर्ष से कम आयु के मतदाताओं और 2029 चुनावों के लिए Gen Z रणनीति
राहुल गांधी का इन्स्टाग्राम पर युवाओं के साथ यह सीधा संवाद एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। भारत की कुल जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है, और 2029 के आगामी आम चुनाव तक जनरेशन जेड (Gen Z) एक निर्णायक मतदाता वर्ग के रूप में उभरने वाला है। यही कारण है कि देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां युवाओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया रील्स, लाइव सेशन और 'आस्क मी एनीथिंग' जैसे माध्यमों का सहारा ले रही हैं। भारतीय जनता पार्टी भी इस मोर्चे पर बेहद सक्रिय है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सोशल मीडिया रील्स, युवा सम्मेलनों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नए दौर के मतदाताओं से जुड़ रहे हैं। राहुल गांधी का यह कदम युवाओं के बीच अपनी पहुंच को मजबूत करने और राजनीति को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास माना जा रहा है।



















