वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को आयोजित होने वाले स्टेट डिनर से ठीक पहले तकनीकी दुनिया के कई बड़े मसले चर्चा में आ गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मुद्दा सबसे ऊपर पहुंच चुका है। डिनर के दौरान ओपनएआई और एनवीडिया जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहने वाले हैं। इस पूरे कूटनीतिक विमर्श की सबसे प्रमुख धुरी दोनों महाशक्तियों के बीच एक ऐसी विशेष व्यवस्था तैयार करना है, जिसके जरिए एआई से पैदा होने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों पर तुरंत एक-दूसरे को सतर्क किया जा सके।
कोल्ड वॉर जैसी हॉटलाइन का विचार और मौजूदा रुकावटें
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रविवार को चीनी उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ बातचीत के बाद इस एआई नोटिफिकेशन तंत्र की रूपरेखा पेश की थी। इसकी तुलना शीत युद्ध के दौर में मॉस्को और वॉशिंगटन के बीच स्थापित की गई आपातकालीन हॉटलाइन से की जा रही है। मकसद साफ है कि अगर उन्नत एआई मॉडल से जुड़ा कोई गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट खड़ा होता है, तो दोनों देश सीधे संवाद कर सकें। हालांकि, इस दिशा में शुरुआती बातचीत के बावजूद पूरी व्यवस्था को सक्रिय होने में अभी कई हफ्तों का वक्त लगेगा। प्रशासन के अधिकारियों को भरोसा है कि साल के अंत तक इसे लागू किया जा सकता है, मगर उससे पहले कई तकनीकी और कूटनीतिक पेंच सुलझाने बाकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह तय करना है कि किस तरह की घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा माना जाएगा और उसके लिए क्या मानक तय किए जाएंगे। इस पर अभी तक स्पष्टता नहीं है। इसके अलावा, बीजिंग का रुख अब तक पूरी तरह स्पष्ट या प्रतिबद्धता भरा नहीं रहा है। बातचीत का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव दो महीने बाद चीन के शेनझेन शहर में तय है, जहां स्कॉट बेसेंट और हे लिफेंग के बीच दोबारा चर्चा होगी। अधिकारियों का लक्ष्य है कि शेनझेन वार्ता तक इस सिस्टम का एक ठोस ढांचा तैयार हो जाए, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की औपचारिक सहमति भी मिल सके।
चिप निर्यात, व्यापारिक तनाव और संतुलन की चुनौती
दोनों देशों के बीच अत्याधुनिक फ्रंटियर एआई मॉडल्स की क्षमताएं तेजी से बढ़ रही हैं और इस क्षेत्र में दबदबा बनाने की होड़ मची हुई है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी अधिकारी एक ऐसा नियम आधारित तंत्र चाहते हैं, जिसमें दोनों पक्षों पर बराबर जवाबदेही हो। ऐसा न हो कि केवल अमेरिका ही चीन को चेतावनियां भेजता रहे और चीन की ओर से कोई जानकारी साझा न की जाए। इस तंत्र को प्रभावी और सख्त बनाने के लिए कड़े नियमों की जरूरत है, मगर इसके क्रियान्वयन में व्हाइट हाउस की मंजूरी में समय लग सकता है।
इस पूरे समीकरण में व्यापारिक संबंधों और एनवीडिया के उन्नत सेमीकंडक्टर चिप्स की भी बड़ी भूमिका है। अमेरिका द्वारा व्यापारिक संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप चीन को अत्याधुनिक एनवीडिया चिप्स की आपूर्ति रोकने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। मौजूदा साल में प्रशासन ने चीन को एनवीडिया की एच200 चिप बेचने के लिए सीमित संख्या में लाइसेंस जारी किए हैं। यह चिप एआई लैब्स में बड़े मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। एनवीडिया के समर्थकों का तर्क रहा है कि अगर चीन को ये चिप्स नहीं बेची गईं, तो हुआवेई जैसी चीनी कंपनियां खुद अपनी चिप तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित होंगी। हालांकि, हालिया घटनाक्रम बताते हैं कि हुआवेई ने बाजार में उपलब्ध अपनी कमर्शियल एआई चिप्स के जरिए यह उपलब्धि पहले ही हासिल कर ली है।
प्रशासन में नए एआई जार की तलाश
नोटिफिकेशन तंत्र के फैसले में देरी का एक और कारण यह है कि डोनाल्ड ट्रंप को अभी अपने अगले एआई जार की नियुक्ति करनी है। यह पद तथाकथित एआई फोर्स का नेतृत्व करेगा, जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना होगी। इस पद की दौड़ में कई नाम चल रहे हैं। स्कॉट बेसेंट का नाम काफी चर्चा में है, मगर यह तय नहीं है कि वे ही अंतिम पसंद होंगे। वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक के अलावा व्हाइट हाउस के एआई अधिकारी माइकल क्रैटसियोस और सीन केयरनक क्रॉस भी दावेदारों की कतार में शामिल हैं।
अभी यह भी साफ होना बाकी है कि ट्रंप किसी ऐसे व्यक्ति को चुनेंगे जो अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के साथ-साथ इस पद को संभालेगा, या फिर वह अपने वर्तमान पद को छोड़कर पूरी तरह इस नए काम में लगेगा। पूर्व एआई जार डेविड सैक्स एक विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में इस भूमिका में थे, लेकिन उनकी वापसी की संभावना नहीं मानी जा रही है।
स्कॉट बेसेंट के नाम को मजबूत समर्थन मिलने की एक ऐतिहासिक वजह भी है। इसे पूर्व ट्रेजरी सेक्रेटरी हैंक पॉलसन और पूर्व चीनी वित्त उप प्रधानमंत्री वांग किशान के बीच हुए ऐतिहासिक संवाद की तर्ज पर देखा जा रहा है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय पॉलसन ने इसी तरह के सीधे संपर्क तंत्र को श्रेय दिया था, जिसने चीन को फैनी मे और फ्रेडी मैक द्वारा जारी अमेरिकी सरकारी ऋणपत्रों के बड़े हिस्से को बाजार में बेचने से रोका था। दूसरी ओर, प्रशासन के कुछ अधिकारी हावर्ड लुटनिक को एआई से जुड़ी और अधिक शक्तियां सौंपने को लेकर असहज हैं। इसके बावजूद लुटनिक इस दौड़ में बने हुए हैं क्योंकि वे सेंटर फॉर एआई स्टैंडर्ड्स एंड इनोवेशन की निगरानी करते हैं, जिसने हाल ही में फ्रंटियर एआई कंपनियों से जुड़े संकट को सफलतापूर्वक संभाला था।























