केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए नए सुधारात्मक कदमों के बावजूद नीट परीक्षा से जुड़ा राजनीतिक घमासान गुरुवार को और अधिक तीव्र हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के न्यायिक जांच के वादों को नाकाफी बताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की अपनी मांग पर बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। कांग्रेस नेता का यह सख्त बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा में हुई धोखाधड़ी और पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है। विपक्ष इस मुद्दे पर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
विरोध प्रदर्शन और विपक्ष का एकजुट रुख
राष्ट्रीय स्तर की इस अहम मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर छात्रों और राजनीतिक दलों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह व्यापक आक्रोश एक बड़े और लंबे विरोध प्रदर्शन का रूप ले चुका है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी पिछले तेईस से चौबीस दिनों से लगातार इस ऐतिहासिक धरना स्थल पर अपना डेरा जमाए हुए है। सीजेपी के साथ-साथ पूरा विपक्ष भी इस आंदोलन के समर्थन में पूरी ताकत के साथ उतर आया है। विपक्षी दल राष्ट्रीय शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बुरी तरह विफल रहने पर केंद्र सरकार को लगातार घेर रहे हैं और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक का अनशन और गिरता स्वास्थ्य
लगातार चल रहे इस जमीनी धरने के बीच अहम प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य को लेकर भी बेहद गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। जाने-माने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पर इस विरोध प्रदर्शन का प्रमुख हिस्सा बने हुए थे। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर लगभग बीस दिनों तक एक बेहद कड़ा अनशन किया। लगातार भूखे रहने के कारण उनका स्वास्थ्य काफी ज्यादा बिगड़ गया, जिसके चलते उन्हें धरना स्थल से अस्पताल ले जाना पड़ा। वांगचुक फिलहाल मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि, अस्पताल में कड़ी चिकित्सा निगरानी और इलाज के बीच रहने के बावजूद उन्होंने अब तक अपना अनशन समाप्त नहीं किया है और वे अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री का बड़ा न्यायिक ऐलान
देश भर में छात्रों के बीच बढ़ रहे असंतोष और विपक्ष के भारी दबाव को दूर करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का सहारा लेते हुए एक अहम नीतिगत ऐलान किया। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना और उनके हितों की रक्षा करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी और सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों से सख्ती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक अदालतों के तत्काल गठन की जानकारी दी। इन विशेष अदालतों का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक न्याय प्रणाली में लगने वाले लंबे समय से बचते हुए सभी मामलों का जल्द निपटारा करना और दोषियों को तेजी से कड़ी सजा दिलाना होगा।
सरकारी विभागों को सख्त प्रशासनिक निर्देश
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में आगे यह भी बताया कि इस नई न्यायिक योजना को जमीन पर उतारने के लिए सभी संबंधित सरकारी विभागों को जरूरी प्रशासनिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस कदम को उन फैसलों की श्रृंखला का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जो सरकार द्वारा सीधे तौर पर छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। अपने संदेश के अंत में उन्होंने एक बेहद सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति युवाओं के सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करेगा, उसे कानून द्वारा किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्ष ने ठुकराए सरकारी वादे
हालांकि, फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन की यह बड़ी घोषणा विपक्ष के उग्र तेवरों को शांत करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के इस बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए समस्या का ठीकरा सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व के सिर ही फोड़ दिया। एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट करते हुए कांग्रेस सांसद ने सरकार पर एक बहुत बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने अपने सीधे संदेश में लिखा, "आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है।" इसके साथ ही गांधी ने प्रशासन पर देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था पर अवैध कब्जा होने देने और अंततः उसे पूरी तरह से बर्बाद कर देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने यह दावा भी किया कि इस पूरी धांधली के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें सत्ता का पूरा संरक्षण प्राप्त है।
सीजेपी का शिक्षा मंत्री पर निशाना
मुख्य विपक्षी दल के नेता की तरह ही सीजेपी ने भी राजनीतिक जवाबदेही की अपनी मांग को सबसे ऊपर रखा और किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया। सीजेपी ने प्रधानमंत्री द्वारा एक्स पर किए गए उसी पोस्ट पर सीधा और तीखा जवाब देते हुए अपनी एक सूत्रीय मांग को फिर से सबके सामने रखा। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से स्पष्ट रूप से लिखा, "धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा।" विपक्ष का यह एकजुट और आक्रामक रुख यह साफ तौर पर दिखाता है कि वे मौजूदा संकट में केवल भविष्य के कानूनी सुधारों से संतुष्ट नहीं होने वाले हैं, बल्कि वे शिक्षा मंत्रालय के बिल्कुल शीर्ष स्तर पर तुरंत कार्रवाई और सख्त राजनीतिक जवाबदेही चाहते हैं।




















