AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर तीखी टिप्पणी की है। हैदराबाद में बोलते हुए उन्होंने दुनिया में मची मौजूदा आर्थिक अस्थिरता का ठीकरा दो नेताओं के सिर फोड़ा — अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन Netanyahu। उनका कहना है कि इन्हीं दोनों की नीतियों की वजह से आम लोगों की जेब पर असर पड़ रहा है।
ओवैसी ने किसे ठहराया कसूरवार
ओवैसी ने सीधे शब्दों में कहा, "दुनिया अभी जिस आर्थिक उथल-पुथल का सामना कर रही है, उसके लिए डोनाल्ड Trump और बेंजामिन Netanyahu ज़िम्मेदार हैं। तेल और गैस का जो बड़ा संकट पैदा हुआ है, उसके लिए भी डोनाल्ड Trump और बेंजामिन Netanyahu ही ज़िम्मेदार हैं।" उनके मुताबिक आर्थिक संतुलन के बिगड़ने के पीछे भी इन्हीं दोनों का हाथ है।
AIMIM नेता ने जोर देकर कहा कि अब वह वक्त आ गया है जब इन दोनों को अपनी विनाशकारी गतिविधियां बंद कर देनी चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि दोनों को बिना देर किए युद्ध रोक देना चाहिए, क्योंकि शुरुआत भी इन्हीं ने की थी।
आम लोगों पर पड़ रही मार
ओवैसी ने रेखांकित किया कि इस खींचतान का खामियाजा सिर्फ किसी एक देश को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत समेत दुनियाभर में लाखों-करोड़ों लोग आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, और इसकी वजह यही दो लोग हैं।
पीएम मोदी से अपील
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर रुख किया। उन्होंने कहा, "मैं पीएम मोदी से अपील करता हूं कि Netanyahu जो इस वक्त कर रहे हैं, उसकी कड़ी निंदा करें।" इसी के साथ उन्होंने भारत सरकार के रुख पर सवाल भी उठाया और याद दिलाया कि पीएम मोदी ने इजरायल की संसद में खड़े होकर यह कहा था कि भारत इजरायल के साथ है। ओवैसी ने दोहराया कि Trump के साथ-साथ इजरायल भी इन तमाम समस्याओं को खड़ा करने का बराबर का जिम्मेदार है।
अमेरिका-ईरान तनाव की पृष्ठभूमि
गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटाने के लिए कई मौकों पर समझौते की दिशा में कदम बढ़े, लेकिन बातचीत किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
हालांकि शुक्रवार को सामने आई एक खबर ने उम्मीद जगाई। ईरान और अमेरिका के अधिकारियों का कहना था कि मध्य पूर्व के युद्ध को खत्म करने वाला समझौता अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। इससे यह आशा बंधी है कि दोनों पक्षों की ओर से जल्द ही तनाव का कोई हल निकल सकता है।
'रियायत' की खबरों पर सफाई
शुक्रवार को ही अमेरिका की ओर से उन खबरों को खारिज किया गया जिनमें कहा जा रहा था कि उसने ईरान को बड़ी रियायत दी है। अमेरिका ने इन्हें निराधार बताया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि समझौते की शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं कि तेहरान को आर्थिक लाभ तभी मिलेंगे, जब वह अपने वादों पर कायम रहेगा और उन्हें पूरा करके दिखाएगा।













