श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पैसों में कथित हेराफेरी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साझा चिट्ठी भेजकर ट्रस्ट के पूरे वित्तीय हिसाब-किताब की एक स्वतंत्र और व्यापक जांच कराने की मांग रखी है। दोनों नेताओं का कहना है कि जिन लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था और भरोसे के साथ अपनी गाढ़ी कमाई दान की थी, वे इस चोरी से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
खड़गे ने रविवार को यह साझा पत्र एक्स पर साझा करते हुए इसे प्रधानमंत्री से की गई मांग बताया। उन्होंने लिखा कि ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की गहन और निष्पक्ष पड़ताल होनी चाहिए, क्योंकि श्रद्धा के साथ दान देने वाले लाखों भक्त इस चोरी से आहत हैं।
चिट्ठी में क्या-क्या कहा गया
18 जुलाई की तारीख वाले इस पत्र में दोनों कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में हजारों करोड़ रुपये की चोरी की जानकारी प्रधानमंत्री को भी है। उन्होंने याद दिलाया कि ट्रस्ट के गठन का ऐलान संसद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया गया था, लेकिन उसके सदस्यों की नियुक्ति पूरी तरह सरकार ने की। पत्र में यह भी कहा गया कि ट्रस्ट के सदस्य आरएसएस, वीएचपी और उससे जुड़े संगठनों से ताल्लुक रखते हैं और इसका बदनाम हो चुका पूर्व महासचिव प्रधानमंत्री का करीबी रहा है।
दोनों नेताओं ने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की खामोशी पर सवाल उठाए। पत्र में लिखा गया,
"इतने बड़े अपराध के सामने आपकी यह चुप्पी अस्वीकार्य है।"उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय करना और दान की भरपाई सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।
श्रद्धालुओं के लिए हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
खड़गे और राहुल गांधी ने पत्र में मांग की कि ट्रस्ट को मिले सभी चढ़ावे की जांच हो, जिसमें नकदी के साथ-साथ सोना और चांदी भी शामिल हो। उन्होंने कहा कि जांच के नतीजे और ट्रस्ट के खाते जनता के सामने रखे जाने चाहिए, ताकि हर श्रद्धालु यह जान सके कि उसके चढ़ावे का इस्तेमाल कहां हुआ। दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि दोषी चाहे किसी भी पद या रसूख का हो, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। पत्र के मुताबिक सरकार और ट्रस्ट की साख इसी बात पर टिकी है कि वह कितनी पारदर्शिता और तेजी से कदम उठाती है, और देश की जनता इस पर नजर बनाए हुए है।
एसआईटी की जांच में क्या मिला
दूसरी ओर, राम मंदिर दान चोरी मामले की पड़ताल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच सीसीटीवी में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं कैद हुई हैं। फुटेज में गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां छिपाते नजर आए।
प्रारंभिक रिपोर्ट में कई खामियों की ओर इशारा किया गया है। इसमें बताया गया कि प्रवेश और निकास पर तलाशी नहीं होती थी, कर्मचारियों के निजी सामान पर निगरानी कमजोर थी और कई दान पेटियों की नकदी एक साथ गिनी जाती थी। यही वजहें इस अपराध को अंजाम देने में मददगार बनीं।
रिपोर्ट के अनुसार जांच शुरू होने से पहले ही कुछ कर्मचारियों से करीब 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए थे। इसके अलावा 4 जून 2026 को गिनती कक्ष से लगे बाथरूम से कथित तौर पर 2.25 लाख रुपये और मिले। रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया कि चांदी की ईंटें या दूसरे कीमती चढ़ावे गायब होने के जो दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे थे, उन्हें साबित करने वाला कोई प्रारंभिक सबूत नहीं मिला। इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कथित गबन को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ा हुआ है और एसआईटी की जांच अभी जारी है।




















