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तमिलनाडु में CM Vijay सरकार पर मंडराया संकट टला, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन की याचिका खारिज कीराजनीति
19 जून 2026, 1:30 pm (40 दिन पहले)· 2

तमिलनाडु में CM Vijay सरकार पर मंडराया संकट टला, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू करने और विधानसभा के विश्वास मत में कथित हॉर्स-ट्रेडिंग की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया. CJI Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपों को 'बेबुनियाद' करार दिया, जिससे मुख्यमंत्री Vijay की सरकार को बड़ी राहत मिली है.

तमिलनाडु की राजनीतिक अस्थिरता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. अदालत ने एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार के विधानसभा में विश्वास मत जीतने के दौरान कथित भ्रष्टाचार और विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) की CBI जांच कराने की मांग की गई थी. इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री Vijay के नेतृत्व वाली सरकार पर मंडरा रहा न्यायिक खतरा फिलहाल टल गया है.

राष्ट्रपति शासन और CBI जांच की मांग

यह याचिका K.K. Ramesh नामक एक याचिकाकर्ता ने दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए विपक्षी विधायकों को बड़ी रकम और सरकारी ठेकों का लालच दिया गया था. याचिकाकर्ता ने इस मामले की गहन CBI जांच की मांग के साथ-साथ यह भी आग्रह किया था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए.

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सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों को बेबुनियाद बताया

भारत के प्रधान न्यायाधीश CJI Surya Kant और जस्टिस V. Mohan की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों और सबूतों का आकलन करने के बाद स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोप केवल सामान्य प्रकृति के और 'बेबुनियाद' हैं. अदालत ने जोर दिया कि आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय सामग्री या ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं, जो न्यायिक हस्तक्षेप का आधार बन सकें.

याचिकाकर्ता की दलीलें और अदालत का रुख

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता C.R. Jaya Sukin ने अदालत को बताया कि तमिलनाडु में ट्रस्ट वोट के समय विपक्षी दलों के विधायकों को समर्थन के बदले धन और सरकारी ठेकों का लालच दिया गया. उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बताया और दावा किया कि देश के विभिन्न राज्यों में सत्तारूढ़ दल विधायकों और सांसदों को प्रभावित करने के लिए धनबल और दबाव का उपयोग कर रहे हैं. अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि कई राज्यों में विधायकों को चार्टर्ड विमानों से ले जाया जा रहा है और इस पर सवाल उठने चाहिए. हालांकि, पीठ इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई. CJI Surya Kant ने अधिवक्ता से पूछा कि वे किस विशेष पार्टी की बात कर रहे हैं, जब उन्होंने व्यापक स्तर पर आरोप लगाए. अधिवक्ता ने जवाब दिया कि उनका मुख्य मुद्दा तमिलनाडु से संबंधित है, लेकिन अदालत को अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए.

TVK सरकार का गठन और राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ध्यान देने योग्य है कि मुख्यमंत्री Thalapathy Vijay की पार्टी TVK ने हाल ही में हुए चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. हालांकि, पार्टी पूर्ण बहुमत से कुछ सीटों से पीछे रह गई थी. बाद में, TVK ने Congress और अन्य विधायकों के समर्थन से विधानसभा में बहुमत हासिल किया और सरकार का गठन किया था.

अदालत का स्पष्ट रुख

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता K.K. Ramesh पहले भी कई जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं और एक याचिका खारिज होने से उन्हें निराश नहीं होना चाहिए. अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमने मामले को पर्याप्त समय तक सुना. यह याचिका ऐसे सामान्य आरोपों पर आधारित है जिनके समर्थन में कोई विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध नहीं है. न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता.” इसी टिप्पणी के साथ, शीर्ष अदालत ने CBI जांच और राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिससे तमिलनाडु में राजनीतिक विवाद पर न्यायिक स्तर पर विराम लग गया है.

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु मामले में क्या फैसला सुनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है, जिसमें तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू करने और TVK सरकार के विश्वास मत के दौरान कथित भ्रष्टाचार की CBI जांच की मांग की गई थी.
किसने दायर की थी यह याचिका?
यह जनहित याचिका K.K. Ramesh नामक याचिकाकर्ता ने दायर की थी.
याचिकाकर्ता के मुख्य आरोप क्या थे?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) हुई और उन्हें बड़ी रकम व सरकारी ठेकों का लालच दिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
CJI Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने आरोपों को 'सामान्य' और 'बेबुनियाद' बताया क्योंकि उनके समर्थन में कोई विश्वसनीय सामग्री या ठोस सबूत पेश नहीं किए गए थे.
इस फैसले का CM Vijay की सरकार पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से मुख्यमंत्री Vijay के नेतृत्व वाली TVK सरकार को बड़ी राहत मिली है और उनकी कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है.
TVK ने सरकार कैसे बनाई थी?
TVK ने चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन पूर्ण बहुमत से दूर रह गई थी. बाद में, उन्होंने Congress और अन्य विधायकों की मदद से विधानसभा में बहुमत हासिल किया था.
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