उत्तर प्रदेश के बरेली में एक अंतरधार्मिक प्रेम प्रसंग विवाह के बंधन में बदल गया, जहाँ रामपुर जनपद की निवासी महताब ने अपनी स्वेच्छा से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया। धर्म परिवर्तन के उपरांत उन्होंने मुरादाबाद के रहने वाले जागेश पुरी के साथ पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न किया। इस वैवाहिक संस्कार और धर्मांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद युवती को ममता नाम दिया गया है। नवविवाहिता का स्पष्ट कहना है कि यह पूरा निर्णय उन्होंने अपनी स्वतंत्र इच्छा और मर्जी से लिया है, और अब वह अपने जीवनसाथी के साथ ही अपना संपूर्ण जीवन व्यतीत करने का दृढ़ संकल्प ले चुकी हैं।
स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने और बदलाव की वजह
युवती ने अपनी बात साझा करते हुए बताया कि वह अब अपने पैतृक घर कतई वापस नहीं जाना चाहती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाया और शादी की है।" ममता ने यह भी स्पष्ट किया कि उन पर किसी भी प्रकार का कोई अनुचित दबाव, भय अथवा लालच नहीं था। अपने फैसले के पीछे के व्यक्तिगत कारणों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके मन में हलाला और तीन तलाक जैसी कुप्रथाओं को लेकर गहरा भय बना रहता था, जबकि सनातन धर्म की परंपराएं और मान्यताएं उन्हें हमेशा से आकर्षित करती थीं।
चार साल पहले निर्माण कार्य के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
इस रिश्ते की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए रामपुर के शाहबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जटपुरा निवासी ममता ने अपने और जागेश के जुड़ाव की पूरी कहानी बताई। लगभग चार वर्ष पूर्व जागेश पुरी मजदूरी के सिलसिले में जटपुरा गांव पहुंचे थे, जहां वह पुल निर्माण और सरिया बांधने के काम में लगे हुए थे। उसी कार्यस्थल और गांव के माहौल के बीच दोनों का पहली बार आमना-सामना हुआ था। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान और औपचारिक बातचीत का सिलसिला आरंभ हुआ, जो समय बीतने के साथ धीरे-धीरे प्रगाढ़ प्रेम संबंध में तब्दील हो गया।
पारिवारिक असहमति के बाद दोनों ने उठाया बड़ा कदम
लगभग चार वर्षों तक चले इस प्रेम संबंध के बाद खुद युवती ने जागेश पुरी के सामने परिणय सूत्र में बंधने का औपचारिक प्रस्ताव रखा था। जागेश ने भी बिना किसी हिचकिचाहट के इस वैवाहिक प्रस्ताव पर अपनी रजामंदी दे दी। इसके बाद दोनों ने अपने-अपने परिवारों की पूर्ण सहमति और आशीर्वाद से विवाह करने की पूरी कोशिश की। हालांकि, युवती के परिजनों ने इस अंतरधार्मिक रिश्ते को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया और अपनी घोर असहमति जताई। परिवार के इस कड़े विरोध और नाराजगी के उपरांत, दोनों प्रेमियों ने अपने घरों को छोड़कर एक साथ रहने और अपनी मर्जी से विवाह करने का साहसिक मार्ग चुना। ममता का कहना है कि उनका मायके लौटने का कोई इरादा नहीं है और वह अपने वैवाहिक जीवन को समर्पित भाव से आगे बढ़ाएंगी।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत विवरण
अपनी पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में बताते हुए ममता ने जानकारी दी कि उन्होंने कक्षा आठ तक की औपचारिक शिक्षा ग्रहण की है। उनके वालिद का नाम कासिम है, जबकि उनकी वालिदा का पूर्व में ही इंतकाल हो चुका था। उनके परिवार में तीन भाई और तीन बहनें हैं। दूसरी तरफ, दूल्हा बने जागेश पुरी मुरादाबाद जिले के मूंढापांडे थाना क्षेत्र स्थित रोंडा गांव के मूल निवासी हैं। जागेश के पिता सोन पुरी ग्रामीण परिवेश में रहकर खेती-किसानी और कृषि कार्यों से जुड़े हुए हैं।
वैदिक मंत्रोच्चार, शुद्धिकरण और सात फेरों की रस्म
विवाह की रस्में शुरू होने से पूर्व हिंदू धार्मिक परंपराओं के मुताबिक युवती का विधिवत शुद्धिकरण संस्कार संपन्न कराया गया। ममता ने इस अवसर पर यह भी साझा किया कि भगवान शिव के प्रति उनके मन में लंबे समय से अगाध श्रद्धा रही है और वह बीते करीब पांच वर्षों से सनातन धर्म के सिद्धांतों, दर्शन और जीवनशैली से बेहद प्रभावित थीं। शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात दोनों ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई। इसके उपरांत अग्नि को साक्षी मानकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिए गए और दोनों ने आजीवन एक-दूसरे का साथ निभाने का पवित्र वचन लिया।





















