पश्चिमी सीमा से सटे बाड़मेर शहर के सदर बाजार इलाके में स्थित वीर बालाजी हनुमान मंदिर में नंदोत्सव का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्साह से ओतप्रोत नजर आया। इस खास आयोजन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक पोशाक पहनकर राधा के भाव में श्रीकृष्ण की आराधना की। भजन-कीर्तन की मधुर धुनों और सामूहिक नृत्य के बीच पूरा मंदिर परिसर कृष्णमय हो गया, जहां चारों तरफ श्रद्धा और उल्लास की लहरें दिखाई दीं।
दो सौ साल पुरानी धार्मिक परंपरा
स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच वीर बालाजी हनुमान मंदिर के इस नंदोत्सव का बहुत बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह अनूठी परंपरा करीब दो सौ वर्षों से लगातार चली आ रही है, जिसमें हर पीढ़ी के लोग पूरी निष्ठा के साथ हिस्सा लेते हैं। हालांकि समय के बीतने के साथ इस आयोजन के तौर-तरीकों में कुछ बदलाव आए हैं, लेकिन इसके प्रति लोगों की श्रद्धा और भक्ति की भावना में कोई कमी नहीं आई है। नंदोत्सव के इन आयोजनों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनके जन्मोत्सव से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।
भजनों और नृत्य से सजी महफिल
मंदिर परिसर में लगातार गूंजने वाले भजन-कीर्तन के बीच महिलाओं की टोलियां पारंपरिक भक्ति गीतों पर झूमती हुई नजर आती हैं। मंदिर में मौजूद हर शख्स इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा हुआ दिखाई देता है। महिलाओं के पारंपरिक लिबास, भजनों की स्वर लहरियां और उनका सामूहिक नृत्य वहां मौजूद हर किसी का मन मोह लेता है। वीर बालाजी हनुमान मंदिर कमेटी से जुड़ी संगीता राठी के अनुसार, महिलाएं खुद को राधा के भाव से जोड़कर श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम, विरह और समर्पण को भजनों और नृत्य के माध्यम से साझा करती हैं। इन धार्मिक गीतों के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है।



















