खानपान की वस्तुओं में मिलावट, हानिकारक रसायनों के बढ़ते प्रयोग और भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सीकर तथा बीकानेर इलाके के युवाओं ने एक बड़ा जनआंदोलन शुरू किया है। 'फूड रियलिटी मार्च' के बैनर तले बीकानेर से शुरू हुई यह पदयात्रा दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाएगी, जिसकी कुल दूरी 700 किलोमीटर से अधिक है। चार सितंबर से शुरू हुआ यह पैदल कारवां मंगलवार सुबह फतेहपुर शेखावाटी पहुंचा, जहां बुधगिरी मढ़ी के नजदीक स्थानीय नागरिकों ने पदयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
यह पूरा अभियान गांव-गांव और नगर-नगर पहुंचकर लोगों को भोजन में मिलावट और सेहत के लिए नुकसानदेह केमिकल्स के प्रति सचेत कर रहा है। इस पूरी पदयात्रा की कमान दमित गहलोत के हाथों में है, जबकि जयंत मूंड-मूंड के मार्गदर्शन में इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, अगले 25 दिनों के दौरान यह काफिला रतनगढ़, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, सीकर, जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़ और गुरुग्राम से गुजरते हुए अंत में दिल्ली पहुंचेगा। इस सफर के दौरान जगह-जगह लोगों से संवाद स्थापित कर उन्हें रोजाना इस्तेमाल होने वाले खानपान की गुणवत्ता परखने के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
आयोजकों ने इस बात पर जोर दिया है कि बाजार में बिकने वाले नकली दूध, मावा, पनीर, आटा और मसालों में मिलावट आम जनता की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुकी है। इसके अलावा, फलों और फसलों की पैदावार बढ़ाने या उन्हें जल्दी पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले जहरीले रसायनों पर भी गहरी चिंता प्रकट की गई है। युवाओं का मानना है कि खाद्य सुरक्षा केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आने वाली नस्लों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ता है।
इस 'फूड रियलिटी मार्च' के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कुल 12 मुख्य मांगें रखी जा रही हैं। इनमें मिलावट करने वाले कारोबारियों के खिलाफ सख्त सजा का नियम बनाने, फलों और फसलों को पकाने में काम आने वाले खतरनाक रसायनों पर पूरी तरह रोक लगाने और खाद्य उत्पादों के पैकेट पर हिंदी भाषा में साफ-साफ जानकारी छापने की बात शामिल है। इसके अलावा, हर जिले में मुफ्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने और मिलावट से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग भी उठाई गई है। पदयात्रियों का कहना है कि महज कानून बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि मैदान पर उसकी असरदार निगरानी और सख्ती से पालना भी उतनी ही जरूरी है।
बीकानेर से उठी यह आवाज अब धीरे-धीरे दिल्ली की तरफ अग्रसर हो रही है। रास्ते में पड़ने वाले तमाम कस्बों और गांवों से गुजरते हुए ये पदयात्री आम नागरिकों को अपनी इस मुहिम के साथ जोड़ रहे हैं। आयोजकों की योजना के मुताबिक, दिल्ली पहुंचने के बाद जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा और सरकार के सामने अपनी तमाम मांगें रखी जाएंगी। युवाओं की साफ मांग है कि देश के आम नागरिकों को शुद्ध, सुरक्षित और मिलावट रहित खानपान उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को कड़े कदम उठाने चाहिए और मौजूदा व्यवस्था को पूरी सख्ती से अमलीजामा पहनाना चाहिए।





















