गुलाबी ठंड के आगाज के साथ ही राजस्थान के भरतपुर स्थित प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क यानी घना पक्षी अभयारण्य में सैलानियों की जबरदस्त चहल-पहल शुरू हो चुकी है। विंटर टूरिज्म सीजन की शुरुआत होते ही देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा दुनिया भर से बड़ी तादाद में पक्षी प्रेमी और प्रकृति प्रेमी यहां पहुंच रहे हैं। पार्क के जलाशयों और हरियाली के बीच सुदूर देशों तथा साइबेरियाई क्षेत्रों से आने वाले दुर्लभ प्रजातियों के खूबसूरत प्रवासी परिंदों का जमघट देखने लायक है। इन मेहमान पक्षियों की अठखेलियों को कैमरे में कैद करने और उन्हें करीब से निहारने के लिए पर्यटकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। अगर आप भी इस सर्दी के मौसम में भरतपुर के इस प्राकृतिक ठिकाने का रुख करने की योजना बना रहे हैं, तो वहां जाने से पहले प्रवेश शुल्क, अंदर आवाजाही के साधनों और जरूरी गाइड सेवाओं की पूरी रूपरेखा समझ लेना बेहद मददगार रहेगा।
प्रवेश द्वार पर टिकट काउंटर और रियायती दरों की व्यवस्था
केवलादेव नेशनल पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही आने वाले सभी सैलानियों के लिए आधुनिक टिकट काउंटर स्थापित किया गया है। अभयारण्य में दाखिल होने के लिए प्रशासन ने भारतीय नागरिकों और विदेशी पर्यटकों के लिए अलग-अलग शुल्क दरें तय कर रखी हैं। इसके साथ ही छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को नियमों के अनुसार रियायती दरों पर प्रवेश टिकट उपलब्ध कराने का विशेष प्रावधान भी रखा गया है। सैलानी मेन गेट पर पहुंचकर बिना किसी झंझट के तुरंत अपना एंट्री पास हासिल कर सकते हैं और सुगमता से अपने रोमांचक भ्रमण की शुरुआत कर सकते हैं।
पार्क भ्रमण के लिए उपलब्ध साधन: ई-रिक्शा, साइकिल और पारंपरिक तांगा
विशाल भूभाग में फैले इस अभयारण्य को अपनी सुविधा और गति से एक्सप्लोर करने के लिए आगंतुकों को कई तरह के विकल्प प्रदान किए जाते हैं। जो लोग पूरे पार्क में पैदल चलने से बचना चाहते हैं या समय बचाना चाहते हैं, उनके लिए मेन गेट पर ही पंजीकृत ई-रिक्शा, किराए की साइकिलें और पारंपरिक तांगा सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं
- साइकिल: खुले वातावरण में अपनी रफ्तार से घूमने और पक्षियों को शांति से निहारने के शौकीनों के लिए साइकिल सबसे पसंदीदा और किफायती साधन साबित होती है।
- ई-रिक्शा: परिवार के सदस्यों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ आने वाले सैलानियों के लिए पर्यावरण-अनुकूल ई-रिक्शा सबसे आरामदायक और सुगम विकल्प बनकर उभरता है।
- पारंपरिक तांगा: जो पर्यटक पुरानी शैली और पारंपरिक अंदाज में अभयारण्य के रास्तों की सैर का लुत्फ उठाना चाहते हैं, वे तय किराए पर तांगा किराए पर ले सकते हैं।
पक्षी पहचान और इतिहास समझने के लिए प्रशिक्षित गाइड
केवलादेव नेशनल पार्क में विचरण करने वाले सैकड़ों स्थानीय और विदेशी प्रवासी पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों के बारे में गहराई से जानने के लिए ट्रेंड गाइडों की मदद ली जा सकती है। ये जानकार गाइड पर्यटकों को उच्च क्षमता वाली दूरबीन और टेलीस्कोप के जरिए पेड़ों और पानी में छिपे परिंदों की पहचान कराते हैं। साथ ही उनकी आदतों, प्रवास की लंबी यात्रा, पार्क के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र और इसके ऐतिहासिक महत्व की रोचक जानकारियां भी साझा करते हैं। पर्यटक अपनी पसंद, समय और तय बजट के आधार पर इन तमाम सुविधाओं का लाभ उठाकर अपनी यात्रा को ज्ञानवर्धक और यादगार बना सकते हैं।

















