राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ शल्य चिकित्सा को अंजाम देकर एक किशोरी को नया जीवनदान दिया है। यह बालिका काफी लंबे समय से पेट में गंभीर दर्द की समस्या से जूझ रही थी। जब अस्पताल के विशेषज्ञों ने गहन चिकित्सकीय परीक्षण किया, तो उसके पेट के भीतर छोटी और बड़ी सैकड़ों पानी से भरी गांठें यानी सिस्ट मौजूद होने की पुष्टि हुई। इसके तुरंत बाद सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने ऑपरेशन का फैसला किया और सफलतापूर्वक इन सभी सिस्ट को शरीर से बाहर निकाला। चिकित्सकों के अनुसार, पेट से निकाली गई इन कुल गांठों का वजन लगभग 10 किलोग्राम आंका गया है।
चिकित्सकों ने जानकारी दी कि किशोरी के उदर गुहा में इन गांठों की कुल संख्या लगभग 400 से 500 के बीच थी। यह असामान्य फैलाव पूरे पेट में फैला हुआ था, जिसकी वजह से बालिका के कई आंतरिक अंगों पर भारी दबाव पड़ रहा था। इसी निरंतर दबाव के चलते वह असहनीय दर्द झेल रही थी। शल्य प्रक्रिया के दौरान कुछ सिस्ट फट भी गईं, जिससे उनके भीतर भरा हुआ तरल पदार्थ बाहर फैल गया। डॉक्टरों ने बेहद सावधानी के साथ संक्रमण के खतरे को नियंत्रित करते हुए पूरे क्षेत्र को साफ किया। सफल सर्जरी के बाद अब बालिका के स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखा जा रहा है और उसकी स्थिति पूरी तरह स्थिर बताई गई है।
स्थानीय इलाज से नहीं मिला था आराम, कोटा में हुईं जांचें
परिजनों के अनुसार, किशोरी को काफी समय से लगातार पेट दर्द की शिकायत बनी हुई थी। प्रारंभिक अवस्था में परिवार के सदस्यों ने उसे पास के एक परिधीय अस्पताल में दिखाया, जहां उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। हालांकि, दवाओं और सामान्य इलाज के बावजूद उसके दर्द में कोई राहत नहीं मिली और स्थिति लगातार बिगड़ती गई। जब समस्या कम होने के बजाय बढ़ने लगी, तब परिजनों ने उसे कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाने का निर्णय लिया। यहां पहुंचते ही मरीज को सर्जरी विभाग की यूनिट सी में भर्ती कर वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में जांच शुरू की गई।
बालिका की गंभीर शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत अल्ट्रासोनोग्राफी और सीटी स्कैन कराने के निर्देश दिए। इन आधुनिक जांचों की रिपोर्ट सामने आने पर डॉक्टरों को पेट के भीतर भारी मात्रा में तरल पदार्थ से भरी गांठों की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले। आंतरिक अंगों के आसपास सिस्ट का भारी जमावड़ा देखकर मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल सर्जिकल प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया, ताकि महत्वपूर्ण अंगों को किसी भी तरह के गंभीर नुकसान से बचाया जा सके।
पेट में मौजूद थीं त्वचा जैसी परत वाली सैकड़ों गांठें
ऑपरेशन थियेटर में जब सर्जनों की टीम ने प्रक्रिया शुरू की, तो पेट के भीतर का दृश्य देखकर वे भी चकित रह गए। मरीज के पेट में छोटे और बड़े आकार की लगभग 400 से 500 सिस्ट एक सघन जाल की तरह फैली हुई थीं। इन गांठों का कुल वजन करीब 10 किलोग्राम निकला, जो किशोरी के पेट के अधिकांश हिस्से को घेरे हुए था। ये गांठें लगातार लीवर, आंतों और अन्य अंगों पर दबाव डाल रही थीं, जिससे उसका पाचन और सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था।
सर्जरी करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि प्रत्येक गांठ के बाहरी हिस्से पर एक चमड़ी जैसी मजबूत परत मौजूद थी और उसके भीतर गाढ़ा तरल पदार्थ भरा हुआ था। ऑपरेशन की जटिल प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक दबाव की वजह से कई गांठें फट गईं और उनका पानी पेट के भीतर बह निकला। मेडिकल टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए सभी खुली गांठों और तरल को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला, जिससे मरीज को किसी भी संभावित सेप्सिस या गंभीर संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।
संक्रमित श्वानों के संपर्क से परजीवी संक्रमण का अंदेशा
सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ. आरजी मीणा ने इस दुर्लभ चिकित्सकीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रकार के रोग का सीधा संबंध एक परजीवी कीड़े से हो सकता है। यह खतरनाक परजीवी मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों के मल अथवा अपशिष्ट के संपर्क में आने से मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है। एक बार शरीर में दाखिल होने के बाद यह परजीवी धीरे-धीरे अपनी संख्या बढ़ाता है और शरीर के भीतर पानी से भरी गांठों का रूप धारण कर लेता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, इंसानों में इस तरह का अत्यधिक फैलाव और इतनी बड़ी संख्या में सिस्ट का पनपना चिकित्सा जगत में बेहद दुर्लभ माना जाता है। हालांकि, बीमारी के सटीक कारणों और गांठों की जैविक संरचना की अंतिम पुष्टि के लिए निकाली गई सिस्ट के नमूनों को हिस्टोपैथोलॉजी विभाग में विस्तृत विश्लेषण हेतु भेजा गया है। पैथोलॉजी रिपोर्ट आने के बाद ही इस संक्रमण के सही स्वरूप की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
डॉ. आरजी मीणा के दल ने संभाली पूरी कमान
इस अत्यंत संवेदनशील और जोखिम भरे ऑपरेशन की कमान सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ. आरजी मीणा के नेतृत्व में चिकित्सकों की विशेष टीम ने संभाली थी। डॉक्टरों ने न केवल कई घंटों की मशक्कत के बाद लगभग 10 किलो वजन की सभी सिस्ट को सफलतापूर्वक हटाया, बल्कि सर्जरी के बाद भी आईसीयू और वार्ड में किशोरी की स्थिति पर 24 घंटे कड़ी चिकित्सकीय निगरानी बनाए रखी।
अस्पताल प्रशासन और वरिष्ठ सर्जनों का कहना है कि समय रहते ऑपरेशन न किया जाता तो आंतरिक अंगों के पूरी तरह काम बंद करने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। किशोरी की जान बचाने में मिली इस शानदार कामयाबी को अस्पताल की पूरी मेडिकल टीम एक बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धि के रूप में देख रही है। हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट मिलने के बाद भविष्य में इस तरह के परजीवी मामलों से बचाव और दवाओं के प्रोटोकॉल को लेकर आगे की रूपरेखा भी स्पष्ट हो सकेगी।























