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भीलवाड़ा में कपास पर गुलाबी सुंडी का हमला, कृषि विभाग ने जारी की बचाव की गाइडलाइनराजस्थान
1 अक्तू॰ 2026, 2:28 pm (51 मिनट पहले)· 0

भीलवाड़ा में कपास पर गुलाबी सुंडी का हमला, कृषि विभाग ने जारी की बचाव की गाइडलाइन

राजस्थान के भीलवाड़ा में कपास की फसल पर गुलाबी सुंडी का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिससे बचाव के लिए कृषि विभाग ने किसानों को खेत की सफाई और जैविक छिड़काव के जरूरी उपाय बताए हैं।

राजस्थान के प्रमुख कपड़ा और कपास उत्पादक जिले भीलवाड़ा में इन दिनों कपास की खेती करने वाले किसान एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। खेतों में खड़ी फसल पर गुलाबी सुंडी यानी पिंक बोलवर्म का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे पैदावार और कपास की गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय कृषि विभाग सक्रिय हो गया है और किसानों को फसल बचाने के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके अपनाने की सलाह दे रहा है ताकि समय रहते नुकसान को सीमित किया जा सके।

भीलवाड़ा में कपास का बड़ा रकबा और मौजूदा संकट

भीलवाड़ा जिला राष्ट्रीय स्तर पर कपड़ा उद्योग के लिए विख्यात है और यहां का कृषि क्षेत्र भी बड़े पैमाने पर कपास की पैदावार से जुड़ा हुआ है। स्थानीय स्तर पर अनेक कॉटन और जिनिंग मिलें चलने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होती है और बाजार में समय पर उचित दाम भी मिल जाते हैं। इसी आर्थिक लाभ के चलते जिले में किसान हर साल करीब 40 से 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई करते हैं। हालांकि, हाल के दिनों में गुलाबी सुंडी के फैलाव ने किसानों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं, क्योंकि यह कीट फसल की गुणवत्ता खराब करने के साथ कुल उत्पादन में सीधी गिरावट ला रहा है।

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लक्षण और फसल को पहुंचने वाला नुकसान

कपास में लगने वाली गुलाबी सुंडी बेहद खतरनाक कीट मानी जाती है, क्योंकि इसका सीधा निशाना पौधे के डोडे यानी टिंडे होते हैं। कृषि विभाग के उद्यान विभाग के विशेषज्ञ डॉ. शंकर सिंह राठौड़ के मुताबिक, इस कीट का प्रभाव सामान्य तौर पर बुवाई के लगभग 60 से 70 दिन बाद साफ नजर आने लगता है। सुंडी या इल्ली डोडे के भीतर चुपचाप प्रवेश कर जाती है और अंदर मौजूद बीजों तथा रुई को खाकर खोखला कर देती है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखने के कारण किसान शुरुआती चरण में इसके हमले को भांप नहीं पाते हैं। जब तक लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब तक फसल भीतर से काफी नष्ट हो चुकी होती है, इसलिए शुरुआत से ही सुरक्षात्मक कदम उठाना बेहद जरूरी होता है।

खेत की साफ सफाई और अवशेषों का प्रबंधन

गुलाबी सुंडी के जीवन चक्र को तोड़ने के लिए कृषि विभाग ने खेतों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की अपील की है। नए बुवाई चक्र में संक्रमण को रोकने के लिए पिछले मौसम के फसल अवशेषों का सही ढंग से निस्तारण करना पहली शर्त है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे बुवाई से पहले अपने खेतों और आसपास रखी सूखी बनेठियों यानी लकड़ियों को अच्छी तरह हिलाकर साफ कर लें तथा सूखे डोडों को पूरी तरह नष्ट कर दें।

  • खेतों की मेड़ों पर सूखी लकड़ियों और बनेठियों के बड़े ढेर कतई जमा न होने दें, क्योंकि इनमें सुंडी और उसके प्यूपा जीवित रहकर नई फसल पर धावा बोलते हैं।
  • जिनिंग इकाइयों और कपास प्रसंस्करण मिलों के आसपास बिखरे कचरे और फसल अवशेषों को भी समय पर समाप्त किया जाना जरूरी है, ताकि नए सीजन में कीटों का फैलाव रोका जा सके।

नीम का अर्क और अनुशंसित दवाओं का छिड़काव

कीट नियंत्रण को लेकर डॉ. शंकर सिंह राठौड़ ने छिड़काव का सही समय और तकनीक भी साझा की है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब कपास की फसल 60 दिन की अवस्था पर पहुंच जाए, तब उस पर 5 प्रतिशत नीम सीड कर्नल एक्सट्रैक्ट (NSKE) का छिड़काव किया जाना चाहिए। यह एक प्राकृतिक और जैविक उपाय है, जो प्रारंभिक चरण में सुंडी को पनपने से रोकता है और फसल की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

इसके अलावा, फसल के 60 से 120 दिन की अवधि के दौरान रासायनिक दवाओं के अनियंत्रित उपयोग से बचने की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों की सलाह के बिना किसी भी तरह के भारी या मनमाने रासायनिक मिश्रण का छिड़काव नहीं करना चाहिए। किसानों को केवल कृषि विभाग द्वारा स्वीकृत प्रामाणिक कीटनाशकों का निर्धारित मात्रा में ही उपयोग करना चाहिए, जिससे फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ मिट्टी और पर्यावरण पर भी कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा में कपास की खेती का कुल रकबा कितना है?
भीलवाड़ा जिले में किसान हर साल लगभग 40 से 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती करते हैं।
फसल में गुलाबी सुंडी का हमला कब दिखाई देने लगता है?
कपास की बुवाई के लगभग 60 से 70 दिन बीत जाने के बाद इस कीट का प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से दिखने लगता है।
गुलाबी सुंडी कपास के पौधे को किस प्रकार क्षति पहुंचाती है?
यह कीट कपास के डोडों के भीतर घुसकर अंदर मौजूद बीजों और रुई को खाकर खोखला कर देता है।
फसल 60 दिन की होने पर कृषि विभाग ने किस छिड़काव की सिफारिश की है?
विभाग ने फसल 60 दिन की होने पर 5 प्रतिशत नीम सीड कर्नल एक्सट्रैक्ट (NSKE) के छिड़काव की सलाह दी है।
नए सीजन में सुंडी के फैलाव को रोकने के लिए क्या प्रबंध करना चाहिए?
किसानों को पुरानी सूखी लकड़ियों, बनेठियों और सूखे डोडों को अच्छी तरह झाड़कर नष्ट कर देना चाहिए और मेड़ों पर ढेर नहीं लगाने चाहिए।
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