जापान में आशिमा अहलावत ने साधा सटीक निशाना, एशियाई खेलों में भारत की झोली में डाला रजत पदककिचन में तैयार करें मलाईदार अफगानी मोमोज, तीखे और क्रीमी स्वाद की आसान तरकीबवृषभ राशिफल 1 अक्टूबर 2026: कामकाज और घर में बनाएं तालमेल, मंगल बढ़ाएगा प्रभावसस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में अनंत अंबानी को न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने दी प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की जिम्मेदारीफ्रांस के वित्तीय संकट और वैश्विक आंकड़ों के बीच यूरो संभला, सोना 4200 डॉलर के पारयूरो और पाउंड में सीमित हलचल के आसार, वैश्विक मुद्राओं, सोने और क्रिप्टो में दिखा दबावसंतान की दीर्घायु का महापर्व जीवित्पुत्रिका: पहली बार उपवास रख रही माताओं के लिए संपूर्ण विधि और नियमअक्टूबर 2026 में त्योहारों और विशेष दिनों की पूरी सूची: नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ से लेकर संयुक्त राष्ट्र दिवस तकमिथुन राशिफल 1 अक्टूबर 2026: बजट संभालें और बातचीत में बरतें स्पष्टता, मानसिक शांति बनाए रखने पर दें जोरसस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाश
अगेती टमाटर बोने वाले किसान 5 खतरनाक बीमारियों से यूं बचाएं अपनी फसल, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बचाव के तरीकेझारखंड
30 सित॰ 2026, 9:44 pm (1 घंटे पहले)· 0

अगेती टमाटर बोने वाले किसान 5 खतरनाक बीमारियों से यूं बचाएं अपनी फसल, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बचाव के तरीके

सितंबर और अक्टूबर में अगेती टमाटर की खेती करने वाले किसानों को मौसम के बदलाव और नमी से पनपने वाले रोगों से सतर्क रहना चाहिए। बोकारो कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. सुषमा सरोज ने नर्सरी गलन से लेकर झुलसा और कुंचन रोग से बचाव के सटीक उपाय सुझाए हैं।

सितंबर और अक्टूबर के महीनों में कई क्षेत्रों के किसान अगेती टमाटर लगाने की तैयारी में जुट जाते हैं। इस दौर में मौसम तेजी से करवट लेता है और हवा में नमी बढ़ जाती है, जिसके चलते पौधों पर फफूंद तथा जीवाणुओं का हमला होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। सही समय पर रोकथाम न की जाए तो पूरी मेहनत और लागत बर्बाद हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोकारो कृषि विज्ञान केंद्र की कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुषमा सरोज ने अगेती टमाटर की फसल को पांच प्रमुख रोगों से सुरक्षित रखने के लिए जरूरी परामर्श दिए हैं।

नर्सरी में गलन रोग की रोकथाम और बीज का उपचार

टमाटर की पैदावार के शुरुआती चरण में ही नर्सरी के अंदर गलन रोग की गंभीर समस्या उभर सकती है। यह रोग फफूंद अथवा बैक्टीरिया के संक्रमण से पनपता है और बीज या मिट्टी के रास्ते तेजी से फैलता है। इस परेशानी से बचने के लिए किसानों को अपनी नर्सरी सामान्य जमीन की सतह से लगभग 15 सेंटीमीटर ऊंचाई पर तैयार करनी चाहिए। इसके साथ ही क्यारियों में जल निकासी का पुख्ता प्रबंध होना चाहिए ताकि पानी बिल्कुल न ठहरे, जिससे फफूंदी और हानिकारक बैक्टीरिया के पनपने का अवसर न मिले।

ये भी पढ़ें

नर्सरी में बीज बोने से पूर्व बीज शोधन का कार्य अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। किसान कैप्टान, थिराम अथवा कार्बेन्डाजिम जैसी उपयुक्त दवाओं से बीजों को उपचारित कर सकते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, लगभग एक किलोग्राम बीज के शोधन हेतु 2 से 2.5 ग्राम दवा का उपयोग करना पर्याप्त होता है। जब पौध पूरी तरह तैयार हो जाए और उसे मुख्य खेत में रोपना हो, तो कतारों तथा पौधों के बीच तय दूरी का कड़ाई से पालन करें और खेत की लगातार निगरानी करते रहें।

अगेती और पिछेती झुलसा से पौधों की सुरक्षा

खेत में रोपाई के बाद टमाटर की फसल पर अगेती झुलसा, पिछेती झुलसा और पत्तियों पर धब्बे उभरने वाले संक्रमण का बड़ा खतरा मंडराता रहता है। मौसम में नमी की अधिकता इन रोगों के फैलाव को तेज कर देती है। इन बीमारियों से फसल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि वैज्ञानिक ने मैनकोजेब और मेटलैक्सिन का छिड़काव करने का परामर्श दिया है। इन दवाओं को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के अनुपात में अच्छी तरह घोलकर पौधों पर छिड़का जा सकता है, जिससे संक्रमण रुक जाता है।

जीवाणु धब्बा रोग के लक्षण और प्रबंधन

अक्सर देखा जाता है कि टमाटर की पत्तियों पर भूरे रंग के छोटे-छोटे धब्बे उभर आते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे बड़े होने लगते हैं और बाद में पत्तियों में दरारें पड़ जाती हैं। इस जीवाणु धब्बा रोग की रोकथाम के लिए किसानों को संक्रमित नजर आने वाली पत्तियों तथा फलों को तुरंत तोड़कर खेत से दूर ले जाकर नष्ट कर देना चाहिए। इसके अलावा खेत में कहीं भी अतिरिक्त पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए।

सिंचाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पौधों पर ऊपर से पानी की बौछारें न डाली जाएं। पानी की छींटे उड़ने से यह जीवाणु रोग बहुत तेजी से आसपास के स्वस्थ पौधों तक फैल जाता है। रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही किसान कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का 0.2 से 0.3 प्रतिशत का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं, जिससे बीमारी वहीं थम जाती है।

पत्तियों का मुड़ना यानी कुंचन रोग और नियमित निगरानी

टमाटर के पौधों में होने वाले कुंचन रोग के प्रभाव से पत्तियां ऊपर अथवा नीचे की दिशा में मुड़ने लगती हैं। संक्रमित पत्तियां सामान्य से काफी छोटी रह जाती हैं और सिकुड़ जाती हैं, जिससे पौधे का समग्र विकास और बढ़वार बुरी तरह प्रभावित होती है। इस रोग के फैलाव में सफेद मक्खी मुख्य वाहक बनती है। इसलिए सफेद मक्खी की सक्रियता पर नजर रखना जरूरी है और समय रहते जैविक दवा का छिड़काव करके इसके प्रकोप को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुषमा सरोज ने किसानों से आग्रह किया है कि अगेती टमाटर की बुवाई से लेकर फल आने तक फसल पर सतत निगरानी बनाए रखें। नर्सरी से लेकर मुख्य खेत में रोपाई के बाद किसी भी पौधे पर संक्रमण का शुरुआती लक्षण दिखते ही फौरन कदम उठाएं और अनुशंसित दवाओं का इस्तेमाल करें, ताकि पूरी फसल को गंभीर नुकसान से बचाया जा सके।

सवाल-जवाब

टमाटर की नर्सरी में गलन रोग से बचाव के लिए क्यारी कैसी बनानी चाहिए?
नर्सरी की क्यारी को जमीन से लगभग 15 सेंटीमीटर ऊंचाई पर बनाना चाहिए और उसमें जल निकासी की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए।
टमाटर के बीज का शोधन किस मात्रा में और किन दवाओं से करना चाहिए?
एक किलोग्राम बीज के उपचार के लिए 2 से 2.5 ग्राम कैप्टान, थिराम या कार्बेन्डाजिम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
टमाटर में अगेती और पिछेती झुलसा रोकने के लिए कौन सी दवा उपयोगी है?
झुलसा रोग से बचाव के लिए मैनकोजेब और मेटलैक्सिन को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
जीवाणु धब्बा रोग होने पर सिंचाई करते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
पौधों पर ऊपर से पानी की बौछार से सिंचाई नहीं करनी चाहिए, क्योंकि पानी की छींटों के साथ यह जीवाणु बहुत तेजी से फैलता है।
पत्तियां मुड़ने वाले कुंचन रोग की रोकथाम कैसे की जा सकती है?
कुंचन रोग फैलाने वाली सफेद मक्खी की नियमित निगरानी करनी चाहिए और समय पर जैविक दवा का छिड़काव करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp